| Jan 01, 1970 | Daily Report |
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20771. उत्तराखंड की हस्तशिल्प काष्ठकला को सात संमदर पार विदेशों तक पहुँचा चुके हैं धर्म लाल
- “हाथ में जमीन न हो तो कोई गम नहीं। जिसके पास कला का हुनर है, उसके हाथों से कुछ भी दूर नहीं रह सकता।” जी हाँ, इन पंक्तियों को सार्थक कर दिखाया है धर्म लाल ने। जिन्होंने बेजान पड़ी लकड़ियों पर अपनी बेजोड़ हस्तशिल्प काष्ठ कला से उन्हें जीवंत कर दिया है। धर्म लाल के पास न तो कोई इंजीनियरिंग की डिग्री है, न कोई डिप्लोमा और न ही कोई उच्च शिक्षा की डिग्री लेकिन फिर भी 57 वर्षीय धर्म लाल विगत 40 सालों से विरासत में मिली अपनी काष्ठकला को बचाने में जुटे हुए हैं।
- 57 वर्षीय धर्म लाल को बचपन से ही हस्तशिल्प से लगाव था। उन्हें हस्तशिल्प काष्ठ कला का हुनर विरासत में अपने परिवार से मिला। उनके परिवार में कई पीढ़ियों नें काष्ठकला को आगे बढ़ाने का काम किया। धर्म लाल विगत 40 वर्षों से काष्ठकला के माध्यम से ही अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं।
- महज 15-16 वर्ष की छोटी उम्र से ही धर्म लाल नें हस्तशिल्प काष्ठ कला का काम करना शुरू कर दिया था। धर्म लाल पहाड़ों में परंपरागत खोली, रम्माण के मुखौटे, घरों के लकड़ी के जंगले, लकड़ी के भगवान के मंदिर व मूर्तियाँ बनाकर स्थानीय बाजार में बेचते हैं, लेकिन बदलते दौर में स्थानीय बाजार में उनकी मांग न के बराबर है। बावजूद इसके धर्म लाल उत्तराखंड की काष्ठकला को बचाने में लगे हुए हैं।
20772. Tyre companies bet on northeast for natural rubber .
- The In a unique initiative, tyre manufacturers are pumping money to grow raw material — natural rubber — in the northeast.
- This is a template that could be repeated in other sectors, including price-sensitive vegetables such as tomatoes, onions and potatoes.
- Sources said that as part of an initiative by the commerce and industry minister Piyush Goyal, tyre manufacturers will invest around Rs 1,100 crore for growing high-yielding varieties of natural rubber in the northeast.
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20773. जयपुर: वेस्ट पेपर से बनातीं हैं धागा, जिससे बनातीं हैं 50 से ज्यादा उत्पाद
- जयपुर में रहने वाली नीरजा पालीसेट्टी ने पेपर वीविंग की प्राचीन जापानी तकनीक को भारतीय संस्कृति से जोड़कर अपने स्टार्टअप ‘सूत्रकार क्रिएशन्स’ की नींव रखी I
- साल 2016 में नीरजा ने अपने पैशन को हकीकत बनाने के लिए ‘सूत्रकार क्रिएशन’ की नींव रखी। ‘सूत्रकार’ का मतलब होता है कुछ बुनने वाला और इसकी तर्ज पर ही वह अपने स्टार्टअप के ज़रिये कागज़ की बुनाई करके बने हुए प्रोडक्ट्स ग्राहकों तक पहुँचा रहीं हैं।
- सूत्रकार क्रिएशन्स आज के समय में 50 से भी ज़्यादा तरह के प्रोडक्ट्स ग्राहकों के लिए ऑफर कर रहा है।वह कागज़ से लैंपशेड, फोटो फ्रेम, वाल हैंगिंग, क्लच, बुकमार्क, डायरी, स्केच बुक, पेनस्टैंड, और कालीन आदि बना रहीं हैं। उनके प्रोडक्ट्स की कीमत 300-400 रूपये से लेकर 10 हज़ार रुपये तक है। अपने प्रोडक्ट्स बनाने के साथ-साथ वह कई डिज़ाइनर्स के साथ काम कर चुकी हैं।
20774. बेंगलुरु: साग-सब्जियों के साथ केला, अनानास, और सीताफल जैसे पेड़ भी मिलेंगे इनकी छत पर
- बेंगलुरु के विद्यारन्यपूरा में रहने वाली 39 वर्षीया अश्विनी गजेन्द्रन पिछले 3 सालों से अपने घर की छत पर गार्डनिंग कर रहीं हैं। अपने टैरेस गार्डन में अश्विनी साग-सब्जी, फल-फूल और औषधीय पौधे उगा रही हैं। उनकी रसोईघर की ज़्यादातर ज़रूरतें टैरेस गार्डन से पूरी हो जाती हैं। बहुत ही कम उन्हें बाहर से कुछ खरीदना पड़ता है।
- पेड़-पौधों की बात करें तो अश्विनी के टैरेस पर बीन्स, टमाटर, मिर्च, कद्दू, लौकी, पेठा, मूली, आलू, करी पत्ता, शिमला मिर्च, तोरी, भिन्डी, करेला, बैंगन, अदरक, हल्दी, यम, टोपिका, बंद गोभी, फूल गोभी, चकुंदर, मोरिंगा, अनानास, अनार, अमरुद,अंजीर, आम, चीकू, आंवला, मौसम्बी, निम्बू, संतरा, सीताफल और स्ट्रॉबेरी जैसे फल भी आपको दिख जाएंगे।
- वह कहतीं हैं कि उनके गार्डन का असल महत्व तब सामने आया जब लॉकडाउन के दौरान उन्हें एक दिन भी साग-सब्जी खरीदने बाहर नहीं निकलना पड़ा। लॉकडाउन के दौरान जहाँ लोग साग-सब्जियां लेने के लिए कतारों में खड़े थे, वहीं अश्विनी के गार्डन ने उन्हें लगभग ढाई-तीन महीने तक 10 लोगों के लिए साग-सब्जियां दी हैं।
20775. गुड़गाँव: माँ-बेटी की जोड़ी ने लॉकडाउन के दौरान बेच डाले 400+ टब होममेड आइसक्रीम
- कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया की गति थम सी गई है। इस काल में गुड़गाँव की रहने वाली रितू गुप्ता (50) और उनकी बेटी मृदु गुप्ता (24) की, जिन्होंने अपने रसोई घर में आइसक्रीम बनाने का फैसला कर लिया
- जब उन्होंने किचन में आइसक्रीम बनाने का फैसला किया, तो उन्हें इसके लिए सिर्फ एक फूलप्रूफ रेसिपी का तरीका पता था। इसके बाद, करीब एक महीने तक आइसक्रीम के फ्लेवर को लेकर कई प्रयोग करने के बाद, उन्होंने ‘एमजी होममेड आइसक्रीम’ की शुरूआत की।
- मृदु के घर में आइसक्रीम बनाने का काम जून 2020 से शुरू हुआ था और पूरे परिवार के सदस्यों का वीकेंड किचन में ही गुजरने लगा। शुरूआती दिनों में हमारे पास बेल्जियम चॉकलेट, चेरी, जामुन और यहाँ तक कि आम के फ्लेवर भी मौजूद थे, जो कि उस वक्त के मौसमी फल थे।
20776. Dharward Farmer’s Strawberries Earn Rs 6 Lakh, Shares Tips For Home Garden
- Shashidhar currently cultivates 25,000 strawberry plants in one acre of land. He says, “I have taken the land for lease. In one acre, 30 tonnes of fruit can be harvested. I have already received strawberry orders from Kerala, Goa, Hyderabad and Bengaluru.”
- Shashidhar has also grown raspberries. He is expecting a harvest of raspberries by next year. The farmer is also planning to grow mulberries and gooseberries in his farms.
- Talking about the profit from the cultivation, Shashidhar says, “The profit is based on the market price. This time I got Rs 6-8 Lakh. If the market price is low then I won’t get this much.”
20777. फर्श से अर्श तक: 30 हजार रुपये लगाकर शुरू किया बिजनेस, आज है 135 करोड़ रुपये का ब्रांड
- संजीव अग्रवाल ने 2014 में Orvi को भारत के क्राफ्टमेनशिप के साथ टेक्नोलॉजी को मिलाकर और पारंपरिक सौंदर्यशास्त्र (traditional aesthetics) लाने के लिए शुरू किया था जो कि लगातार बढ़ रहा है। आज 60 से अधिक इन-हाउस कारीगरों के साथ जुड़ी कंपनी 135 करोड़ रुपये का वार्षिक कारोबार करती है।
- “वाइब्रेंट भारत में पले-बढ़े और दुनिया भर में अपनी यात्रा के कारण, मुझे इतिहास की कुछ बेहतरीन वास्तुकला का अनुभव करने का सौभाग्य मिला है, जिसे लगभग भुला दिया गया है। पहले नजरिए में, सदियों से इन स्थानों के भीतर शिल्पकारों ने जो विवरण, सटीकता और सुंदरता बनाई है, उसने मुझे इस सेक्टर में काम करने के लिए प्रेरित किया। ”
- Orvi Surfaces, पारंपरिक सतहों के साथ नई इनोवेटिव सतहों को बनाने के लिये क्राफ्टमेनशिप और टेक्नोलॉजी का निर्माण करता है, और एशिया और उसके बाहर के कारीगरों की तकनीक के साथ पश्चिमी सौंदर्यशास्त्र (western aesthetics) का भी उपयोग करता है।
20778. MBA ग्रैजुएट गृहिणी ने संभाली पिता की खेती, घर पर ही जैविक उपज से बनातीं हैं उत्पाद
- संगरूर की प्रियंका गुप्ता अपने ४ एकड़ के खेत में गोबर और गौमूत्र से जैविक खेती कर रही हैं।
- वह हरी मिर्च, हल्दी, लहसुन, गाजर, मूली, करौंदा, आम जैसे फल और सब्ज़ियों से अचार, जैम, सॉस और ज्वार, बाजरा और मक्का जैसी फसलों से आटा और बिस्कुट बना रहीं हैं। प्रियंका आज 25-30 तरह के उत्पाद बनातीं हैं।
- पंजाब के लुधियाना में रहने वाली प्रियंका गुप्ता पिछले 5 सालों से अपने पिता बद्रीदास बंसल की खेती-बाड़ी को संभाल रहीं हैं। उनके पिता की ज़मीन संगरूर में है और प्रियंका अपने घर-परिवार के साथ-साथ अपने पिता का ख्याल भी रखती हैं। इसके लिए वह अक्सर लुधियाना से संगरूर और फिर वापस ट्रेवल करतीं हैं।
20779. Engineer Returns from US to Start Aquaponics Farm, Grows 4 Tonnes of Veggies/Month
- Jegan Vincent quit his US software job to start aquaponics (integration of aquaculture such as pisciculture with hydroponics, i.e. cultivating plants in water) in his Freshry Farms in Chengalpet, Chennai, Tamil Nadu.
- The farm currently yields 45 tonnes of fish every year and 3 to 4 tonnes of vegetables every month without artificial fertilizers.
- He also runs a free three-day course for anyone interested in modern organic farming and pisciculture. Jegan has tied up with four universities in Tamil Nadu and two in Africa.
20780. India Imported 60% of its Pencil Wood. This Kashmir Village Made Us Self-Reliant
- The Oukhoo village in Pulwama district of Kashmir holding 17 units and the 4,000 employees is scripting a new success story to make India Atmanirbhar (self-reliant).
- “Pencil village of India”, got a mention in Mann Ki Baat,
- The monthly turnover of the industry is Rs 3 crore. The industry member says that over 20,000 locals could get employment if the deadlock between the industry giants and the locals’ end.