| Jan 01, 1970 | Daily Report |
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20761. जानिए कैसे निम्बू और संतरे के छिलकों से बना सकते हैं होम क्लीनर्स, स्क्रब और कंपोस्ट
Contribution of SOCIETY to “Make in India” Self-employment (Atmanibhar)
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Agriculture(Organic Farming)
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- पिछले दो सालों से सस्टेनेबल लाइफस्टाइल प्रैक्टिस कर रही कौस्तुभा शर्मा बतातीं हैं कि बहुत से पर्यावरण के प्रति संवेदनशील लोगों की तरह, वह भी पहले निम्बू और संतरे के छिलकों को कंपोस्ट बिन में डालती थीं लेकिन फिर उन्हें पता चला कि इनसे हम अपने घर की साफ़-सफाई के लिए क्लीनर्स बना सकते हैं। ऐसा करने से आप अपने घर के वेस्ट को अच्छे से मैनेज कर सकते हैं और साथ ही, आपको अपने घर में केमिकल से भरे क्लीनर्स को भी कम करने का मौका मिलता है।
- कौस्तुभा ने द बेटर इंडिया को बताया, “निम्बू या संतरे को इस्तेमाल करने के बाद सभी छिलकों को आप एक डिब्बे में इकट्ठा कर सकते हैं और फिर इन्हें फ्रिज में स्टोर कर सकते हैं। कुछ घंटे बाद डिब्बे को निकालें और इसमें सफ़ेद विनेगर मिलाएं। अब इसे और दो हफ्तों के लिए फ्रिज में रख दें।” जब यह मिक्सचर थोड़ा पुराना हो जाए तो आप इसे एक स्प्रे बोतल में भरकर खिड़की आदि की सफाई कर सकते हैं। यह आपकी रसोई से भी गहरे और चिकने दाग-धब्बों को हटाने में काफी कारगर होते हैं। इसी क्लीनर को आप बाथरूम और वॉश बेसिन साफ़ करने के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
- पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ यह तरीका किफायती भी है। इन छिलकों को आप बर्तन साफ़ करने के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं। खासकर कि चिकनाई वाले बर्तनों के लिए ये काफी अच्छे स्क्रब का काम करते हैं।
20762. Kerala Photographer Raises 80 Types of Veggies, Fishes & Beehives in His Backyard
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- Joshy, a photographer by profession and an environmentalist by heart, is widely known in the village for his eco-friendly practices that have made his family completely self-sufficient. Except for rice and wheat, all their food including fish, fruits, vegetables and chicken is grown in the house.
- Joshy has consciously stayed away from using any complicated farming methods like permaculture, intercropping or multi-layering. He conventionally sows seeds and harvests. However, his watering method is the hero here.
- Explaining the process, Joshy says, “In wick irrigation or as known as Thiri Nana in Malayalam, we fill a bucket with water and cover it with a tray. A hole is drilled on the tray to incorporate one end of the rope. The other end goes through the grow bags that are placed on top of the tray. In simple terms, this method is a self-watering one and twice in a week, we refill the bucket.”
20763. UP Man Increases Earnings From Rs 11,000 to Rs 12 Lakh Through Banana Farming
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- By growing sugarcane, Chandranath was earning a profit of less than Rs 1 lakh, which wasn’t worth “the time taken” or his efforts. So, he strived to find something unique, more profitable and low-risk and eventually stopped growing sugarcane in 2018.
- Chandranath reveals that banana farming is low-risk as every season is suitable for the banana plants. He says that even heavy rain can’t affect the crop. “It also doesn’t demand much care as compared to sugarcane or any other crop,” he adds.
- As a contractor, I could not increase my earnings by much. I wanted to earn more to give my children a better education and a better life for my family. I also wanted to do something unique with my farmland and not just grow crops that are necessary at home like rice, wheat and veggies. I wanted to make it a profitable business,” says Chandranath, who has dabbled in farming for almost three decades now.
20764. UPSC में नहीं हुए सफल, तो तीन दोस्तों ने शुरू कर दी मिलिट्री मशरूम की खेती, लाखों है कमाई
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- यह कहानी है राजस्थान के गंगानगर जिले के रावल मंडी गाँव के रहने वाले संदीप बिश्नोई, अभय बिश्नोई और मनीष बिश्नोई की। बता दें कि संदीप और मनीष बी.टेक करने के बाद और संदीप एमसीए करने के बाद प्रशासनिक सेवा परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे, लेकिन इसमें दो-बार प्रयास करने के बाद, उन्होंने अपना खुद का कुछ शुरू करने का फैसला किया।
- अभय ने द बेटर इंडिया को बताया, “हम अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद, यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे, लेकिन इसमें कोई संभावना नहीं देखते हुए, हमने कुछ अलग करने का फैसला किया। इसी कड़ी में, मुझे यूनाइटेड किंगडम के एक दोस्त के जरिए मिलिट्री मशरूम के बारे में पता चला, वहाँ लोग इसे हेल्थ सप्लीमेंट के तौर पर लेते हैं। इसके बाद मैंने इंटरनेट पर इसके बारे में जानकारी हासिल की।”
- वह आगे बताते हैं, “इसी सिलसिले में मुझे उत्तराखंड में मिलिट्री मशरूम की खेती करने वाली दिव्या रावत जी के बारे में पता चला और मैंने उनके यूट्यूब चैनल पर इससे संबंधित कई वीडियो देखे और इन विचारों को अपने दोस्त संदीप और मनीष से साझा किया।”
20765. उत्तराखंड: फल-सब्जियों की प्रोसेसिंग कर पहाड़ी महिलाओं का जीवन संवार रही हैं ये माँ-बेटी
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- उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में रहने वाली दिव्या पिछले 4 सालों से अपनी माँ इंदिरा के साथ मिलकर ‘हिमालयन हाट ‘ नामक एक एंटरप्राइज चला रहीं हैं। उनकी यह एंटरप्राइज न सिर्फ उनकी पहचान हैं बल्कि उनके साथ काम करने वाली लगभग 25 पहाड़ी महिलाओं की पहचान है।
- हिमालयन हाट के ज़रिए दिव्या और इंदिरा अपने खेतों में उगने वाले फल, सब्ज़ी, हर्ब्स और ड्राई फ्रूट आदि को प्रोसेस करके अलग-अलग तरह के प्रोडक्ट्स बना रही हैं। उनके प्रोडक्ट्स पौड़ी गढ़वाल से निकलकर दिल्ली पहुँचते हैं और फिर यहाँ से अलग-अलग ऑर्डर्स के हिसाब से भेजे जाते हैं।
- साल 2015 में दिव्या ने ‘हिमालयन हाट’ की नींव रखी थी। उनकी शुरूआत नाशपाती के ड्रिंक से हुई थी। आज वह अलग-अलग किस्म के लगभग 30 प्रोडक्ट्स बना रही हैं। दिव्या ने द बेटर इंडिया को बताया, “मेरे पास 13 एकड़ जमीन है, जिस पर जंगल पद्धिति से खेती की जा रही है। हमारे खेत में आपको तरह-तरह के पेड़-पौधे मिलेंगे, जिसे मेरे पिताजी ने लगाया था। वह जैविक किसान थे, वहीं मेरी माँ स्कूल टीचर थीं। पापा तो अब नहीं रहे लेकिन माँ रिटायरमेंट के बाद पापा के काम को आगे बढ़ा रहीं हैं।”
20766. माँ ने 30 साल पहले घर के आँगन में शुरू की थी मशरूम की खेती, बेटों ने बनाया ब्रांड
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- पंजाब के अमृतसर जिला के धरदेव गाँव के रहने वाले मंदीप सिंह पूरे इलाके में मशरूम उत्पादन के लिए पहचाने जाते हैं। मंदीप अपने फर्म “रंधावा मशरूम” के तहत बड़े पैमाने पर मशरूम का कारोबार करने के साथ ही, वह इसे प्रोसेस कर अचार, भूजिया, बिस्कुट आदि जैसी कई खाद्य सामग्रियों भी बनाते हैं, जिससे उन्हें हर साल करोड़ों की कमाई होती है।
- 32 वर्षीय मंदीप ने द बेटर इंडिया को बताया, “हमारे यहाँ पिछले 30 वर्षों से मशरूम की खेती हो रही है। इसे मेरी माँ ने साल 1989 में शुरू किया था। अब हम चार भाई मिलकर इसे संभालते हैं।”
- “मशरूम उत्पादन से लेकर इसे बाजार में बेचने तक के लिए, हर भाई की भूमिका अलग-अलग है। हमारे बड़े भाई मंजीत सिंह प्रोडक्शन का काम संभालते हैं, तो हरप्रीत सिंह स्पॉन बनाने और प्रोसेसिंग का। मेरे पास मार्केटिंग, बैंकिंग, मीडिया, आदि के कार्यों को संभालने की जिम्मेदारी है। हमारे एक और भाई आस्ट्रेलिया में खेती करते हैं और जब भी यहाँ आते हैं हमारा भरपूर हाथ बँटाते हैं। जबकि, सभी कार्यों की बागडोर हमारी माँ संभालती हैं।”
20767. असम: छोटे किसानों की मदद के लिए 10वीं पास ने बना दिया सस्ता और छोटा ट्रैक्टर
Innovation and startups, ISRO/Defense/Water infrastructure/EV and other sectors
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Innovations in Bharat
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- यह कहानी गुवाहाटी में रहने वाले कनक गोगोई की है, जिन्हें सीरियल इनोवेटर के तौर पर जाना जाता है। पिछले दो दशक से भी ज्यादा समय से वह लोगों के लिए इनोवेशन कर रहे हैं। उनकी कोशिश रहती है कि वह लोगों की समस्यायों को हल करने के लिए काम करें। हाल ही में, उन्होंने एक कम लागत वाला ट्रैक्टर (Low-cost Tractor) बनाया है। गोगोई को उनके कई आविष्कारों के लिए सम्मानित भी किया गया है।
- बचपन से ही कनक को कुछ अलग करने का शौक रहा। मूल रूप से लखीमपुर के तेकेलबोरा गाँव से संबंध रखने वाले कनक के पिता सरकारी कर्मचारी थे। कनक ने द बेटर इंडिया को बताया, “मेरे पिताजी की इच्छा थी कि मैं पढ़-लिखकर नौकरी करूँ लेकिन मुझे स्कूली पढ़ाई में मन नहीं लगता था। मैंने जैसे-तैसे स्कूली पढ़ाई पूरी की लेकिन कॉलेज की पढ़ाई मुझसे नहीं हो सकी। उस वक्त मैं जोरहाट में था और वहीं मैंने मन बना लिया कि अब यहीं रहकर अपना कोई बिज़नेस करना है, पढ़ना नहीं है।”
- कनक ने आगे बताया, “मैंने दूध का काम शुरू किया। लगभग तीन साल तक जोरहाट के गांवों से दूध इकट्ठा करके शहर में बेचता था। इसके साथ-साथ मैं दूसरे काम भी करता था। मैंने जोरहाट में कई मैकेनिकल वर्कशॉप में भी काम सीखा और किया। यहीं से एक अलग कहानी शुरू हुई। मैं कुछ अलग और हटकर करना चाहता था, कुछ ऐसा जो पहले न हुआ हो।”
20768. राजस्थान: अकाउंटेंट की नौकरी छोड़ शुरू किया नर्सरी बिज़नेस, करते हैं लाखों का कारोबार
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- आकाशदीप की कहानी में सबसे दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने इससे पहले कभी गार्डनिंग नहीं की थी। न ही उनके परिवार में कोई गार्डनिंग करता है। पढ़ाई के बाद उन्हें एक अच्छी फर्म में एकाउंटेंट की नौकरी भी मिली। लगभग 6 साल तक उन्होंने वह जॉब की लेकिन उनका मन कुछ और करने का था, वह कुछ अलग व्यवसाय करना चाहते थे।
- आकाशदीप ने द बेटर इंडिया को बताया, “दरअसल, मुझे किताबें पढ़ने का शौक रहा है। मैंने किसी किताब में पढ़ा था कि अगर किसी इंसान को अपने जीवन में कुछ अलग करना हो या फिर अपने सपनों के लिए काम करना तो 20 से 30 वर्ष की उम्र के बीच करना चाहिए। ज़िंदगी के इन दस सालों में आप पर बहुत ज्यादा ज़िम्मेदारी नहीं होती है और आप इस वक़्त को अपने सपनों को पूरा करने के लिए उपयोग कर सकते हैं।”
- आकाशदीप के घर में सभी लोग नौकरी-पेशे वाले थे लेकिन वह बिजनेस शुरू करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने अपने घर वालों से बात की। आकाशदीप को यह तो पता था कि वह बिज़नेस करना चाहते हैं लेकिन क्या बिज़नेस करेंगे, यह उन्हें भी नहीं पता था।
20769. Meet Delhi’s Gritty Rajma Chawal Didi who Used a Moped to Earn During the Pandemic
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- March 2020, Asha sold materials of varying patterns at the weekly bazaar, which she would source from a local wholesaler. She says, “When the lockdown was announced everything stopped and there was no income for almost five to six months until September when I decided to set up a food stall near my house.” She decided to start small and test the waters before making a bigger investment.
- “I knew I had to do something, and do it quickly if I wanted to keep my family afloat,” she says. “My husband had an unfortunate accident a few years ago, where lost both his legs. He has since then been dependent on me for everything,” she says, adding that it was her husband’s moped that she uses now for her food stall business.
- On 2 September, armed with the moped, a makeshift wooden box to hold the food that she borrowed from a neighbour, and a lot of trepidation, Asha set out to sell the food she made. She mentions that it was her community that helped her a lot.
20770. वाटर लिली के पैशन को बनाया बिज़नेस, IT कंपनी में जॉब के साथ, इससे भी होती है अच्छी कमाई
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- महाराष्ट्र के ठाणे में रहने वाले सोमनाथ प्रदीप पाल कई सालों से गार्डनिंग कर रहे हैं। उनकी गार्डनिंग की खास बात यह है कि वह अलग-अलग किस्म के वाटर लिली और कमल के फूल उगाते हैं। सोमनाथ सिर्फ वाटर लिली और कमल के फूल उगा ही नहीं रहे हैं बल्कि वह इनकी हाइब्रिड किस्में भी तैयार करते हैं। साथ ही, इनके बल्ब और ट्यूबर तैयार करके वह कमर्शियल स्तर पर बेचते भी हैं।
- गार्डनिंग के प्रति उनका लगाव बचपन से ही रहा है। फ़िलहाल, वह एक आईटी फर्म में बतौर प्रोजेक्ट मैनेजर काम कर रहे हैं और इसके साथ-साथ वह वाटर लिली और कमल के फूल भी उगा रहे हैं। सोमनाथ कहते हैं कि गार्डनर से लेकर हाइब्रिडाइज़र और सेलर बनने का सफ़र एक दिन में उन्होंने तय नहीं किया है।
- वाटर लिली के बारे में बात करते हुए सोमनाथ कहते हैं कि वह लगभग 16-17 साल के रहे होंगे जब उन्हें पहली बात वाटर लिली को जाना। वह बताते हैं कि एक बार वह अपनी बड़ी बहन के साथ नर्सरी गए थे। उस वक़्त उन्होंने नर्सरी में वाटर लिली के पौधे देखे और वह दिखने में इतने आकर्षक थे कि सोमनाथ ने ठान लिया अब वह भी वाटर लिली उगाएंगे।