| Jan 01, 1970 | Daily Report |
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20641. जैविक दाल, मसालों से लेकर रागी की आइस-क्रीम तक, स्वदेशी को बढ़ावा दे रहा है यह युवक
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- जेएसएस नेचर फूड्स स्टार्टअप की ब्रांड आद्यम ग्राहकों को पौष्टिक अनाजों से बनी आइसक्रीम भी खिला रहा है। आइसक्रीम के साथ-साथ आद्यम पारंपरिक तरीकों से बने मसाले और रागी जैसे मिलेट्स से बनी सेवैयाँ और नूडल्स भी बना कर बेच रहा है।
- 32 वर्षीय भार्गव आर. ने पिछले साल आद्यम की नींव रखी और आज वह कोयम्बटूर से बाहर भी एक अच्छी पहचान बना चुके हैं।
- आद्यम ब्रांड के अंतर्गत, आज वह सभी तरह के मसाले, 9 तरह के अनाजों की सेवैयां (बिना किसी मैदे के इस्तेमाल से बनी), नूडल्स, शुद्ध जंगली शहद, और मिलेट्स से बनी आइसक्रीम बेच रहे हैं।
20642. 12वीं पास युवक ने शुरू किया प्रोसेसिंग का व्यवसाय, 650 आदिवासी महिलाओं को मिला रोज़गार
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- राजेश ने बताया कि कई सालों तक बाहर काम करने के बाद वह अपने गाँव लौट आए क्योंकि उनकी वह अपने इलाके के लिए कुछ अलग करना चाहते थे।
- उन्होंने धीरे-धीरे महिलाओं का समूह बनाया और सभी को आश्वासन दिया कि वह उनसे बाजार भाव में सीताफल हर दिन खरीदेंगे। साल 2017 में राजेश ने जोवाकी एग्रोफ़ूड इंडिया की नींव रखी और इसे कोई कमर्शियल कंपनी बनाने की बजाय सोशल एंटरप्राइज बनाया। इसके अंतर्गत उन्होंने 12 गाँव की महिलाओं का समूह बनाया और उन्हें कई चरणों में ट्रेनिंग दी गई।
- जोवाकी एग्रोफ़ूड को भारत सरकार के सोशल स्टार्टअप प्रोग्राम, रफ़्तार में भी जगह मिली है। इसके अलावा, उन्हें IIM कोलकाता, विल्ग्रो फाउंडेशन, नियम एग्री बिज़नेस आदि से भी सपोर्ट मिल रहा है। कंपनी फ़िलहाल सीताफल और जामुन के अलावा हरे चने और आंवला पर काम कर रही है।
20643. कभी 316 रुपये में बेचते थे 1 क्विंटल गन्ना, अब उसी का सिरका बनाकर कमा रहे हैं 1000 रुपये
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- पृथ्वी पाल ने कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों से बात की। उन्होंने पूछा कि वह गन्ने में क्या वैल्यू एडिशन कर सकते हैं? उन्हें गन्ने का सिरका बनाने की सलाह मिली। पृथ्वी पाल ने गन्ने का सिरका बनाने की कोशिश की लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। इस बारे में उन्होंने एक बार फिर वैज्ञानिकों से बात की। उन्हें पता चला कि इसका मुख्य कारण है खेती में इस्तेमाल होने वाले रसायन। रसायनों की वजह से गन्ने की गुणवत्ता खत्म होने लगती है। इसलिए अगर किसान अच्छे तरीके का सिरका बनाना चाहते हैं तो उन्हें जैविक तरीकों से गन्ना उगना होगा।
- पृथ्वी पाल को कई बार असफलता के बाद आखिरकार सफलता मिली। उन्होंने अपनी खुद की तकनीक विकसित की और पहले जो गन्ने का सिरका 6 महीने में बनता था, उसे वह एक महीना और 45 दिन में गन्ने का सिरका बना रहे हैं। इस तकनीक के लिए उन्होंने साल 2017 में पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी से एमओयु किया ताकि इस तकनीक पर उनका ही अधिकार रहे। तकनीक बनने के बाद अब वह गन्ने, करेला, जामुन आदि का सिरका बना रहे हैं।
- उनके मुताबिक, एक क्विंटल गन्ने का वह 50 लीटर सिरका बनाते हैं और एक लीटर सिरका बनाने में उनकी लागत 50-60 रुपये की आती है। 2 एकड़ ज़मीन से उन्हें 1000-1200 क्विंटल गन्ना मिल जाता है। पृथ्वी कहते हैं कि पहले जब वह अपने गन्ने को चीनी मिल या फिर मंडी में बेचते थे तो उन्हें एक क्विंटल गन्ना की कीमत 316 रुपये मिलती थी।
20644. खाट के नीचे एक किलो मशरूम उगाकर की थी शुरुआत, आज हर महीने कमातीं हैं 90 हज़ार रूपये
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- यह बीना की ही मेहनत है, जिस कारण अब मशरुम की खेती उनके 105 पड़ोसी गाँवों में भी मशहूर हो गई है। इन इलाकों से बीना ने करीब 10,000 ग्रामीण महिलाओं को ट्रेनिंग दी है।
- इसी साल बीना को भारत के राष्ट्रपति, रामनाथ कोविद द्वारा नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। 8 मार्च को, 16 अन्य महिलाओं के साथ उन्हें भी इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से नवाज़ा गया था।
- एक किलोग्राम मशरुम उगाने से लेकर ‘मशरुम महिला’ के नाम से जाने जाने का सफर बीना के लिए काफी असाधारण रहा है।
20645. 52,000 new companies opened in India amid lockdown; more firms opened than closed
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- India registered more new companies since the start of the lockdown till August, while the number of companies that shut down in the period were comparatively small.
- The number of companies registered from April to August 2020 by all Registrar of Companies (ROCs) is 51,807, while only nine companies closed or were struck off during the same period, according to the data provided by MoS Finance and Corporate Affairs Anurag Singh Thakur.
- However, the applications for setting up of new companies were received prior to Covid period, he said in a written reply to questions in Lok Sabha.
20646. यूपी: फलों की खेती से ऐसे मालामाल हो गया यह किसान, सिर्फ लीची से सालाना कमा रहे 7.5 लाख
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- उत्तर प्रदेश के राजपाल ने अबतक 4 हजार किसानों को प्रशिक्षित किया है, जो लगभग 4200 हेक्टेयर जमीन पर फलों की खेती करते हैं।
- उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के जगैठा गुर्जर गाँव के रहने वाले वाले राजपाल सिंह कई दशकों से खेती कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने कई वैज्ञानिक प्रयोग किए और वर्षों तक बाजार के गहन शोध और आत्मविश्वास से उन्होंने गन्ने की खेती के विकल्प के तौर पर आम, अमरूद, लीची और आड़ू जैसे फलों की खेती का ऐसा मॉडल विकसित किया है, जिससे उन्हें हर साल लाखों की कमाई होती है।
- राजपाल अपने उत्पादों को स्थानीय मंडी में बेचने के अलावा बेंगलुरू और भुज तक निर्यात करते हैं। इसके बारे में वह कहते हैं, “स्थानीय मंडी में लीची 70 से 130 रुपए और अमरूद 60-65 रुपए प्रति किलो बिकता है। वहीं लीची को बेंगलुरू और भुज भेजने के बाद 400-450 रुपए का भाव मिलता है। इस तरह लीची से हर साल प्रति हेक्टेयर 7.5 लाख से 8 लाख रुपए और अमरूद से 6 लाख से 7 लाख रुपए तक की कमाई होती है।”
20647. दिल्ली: पिछले 7 सालों से नहीं फेंका घर का जैविक कचरा, खाद बनाकर करतीं हैं गार्डनिंग
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- दिल्ली के पश्चिम विहार इलाके में रहने वाली 65 वर्षीय रेखा मान पिछले 7 सालों से अपनी लाइफस्टाइल को सस्टेनेबल बनाने में जुटी हैं। इसकी शुरुआत उन्होंने अपने घर के गीले कचरे से खाद बनाने से की। वह बतातीं हैं कि पिछले कई वर्षों से वह अपने घर में पेड़-पौधे लगा रही हैं और गार्डनिंग के लिए वह सभी ज़रूरी पोषक चीजें और कीट प्रतिरोधक आदि घर पर ही तैयार करती हैं।
- रेखा अपनी हाउसिंग सोसाइटी की अध्यक्ष भी हैं और उनकी कोशिश यही है कि वह लोगों को ज्यादा से ज्यादा पर्यावरण के अनुकूल गतिविधियों से जोड़ें। पिछले 7 सालों में उनकी यह मुहिम काफी तेज भी हुई है।
- वह कहती हैं कि पहले उन पर परिवार की काफी ज़िम्मेदारी होती थीं और तब वह कोई दो-चार पेड़-पौधे ही लगा पाती थीं। पर अब वह अपना पूरा वक़्त अपने गार्डन को और नई-नई चीजें सीखने में बिताती हैं। उन्होंने अपनी छत और आँगन में गार्डन लगाने के साथ-साथ दूसरों के घर भी गार्डन लगवाए हैं।
20648. उत्तर- प्रदेश: गन्ना-किसान ने खेत पर ही लगा ली प्रोसेसिंग यूनिट, 45 लोगों को रोज़गार
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- हर साल योगेश लगभग 5000 क्विंटल गुड़ बनाते हैं, जिसे वह सीधा कंपनियों को बेचते हैं और इसके साथ वह 2000 लीटर गन्ने का सिरका भी बना रहे हैं, जिसे वह मुफ्त में लोगों को बांटते हैं!
- योगेश ने अपने खेतों पर ही प्रोसेसिंग यूनिट सेट-अप की। गन्ने से रस निकालने की मशीन, फिर इस रस को उबालने के लिए बड़े-बड़े कड़ाहों का सेट-अप किया। इसके बाद, गुड़ को सेट करने के लिए ट्रे आदि और शक्कर को छानने के लिए छलनी आदि का सेट-अप किया। वह बताते हैं कि सबसे पहले वह गन्ने का रस निकालते हैं और फिर इसे गर्म किया जाता है। अच्छे से गाढ़ा होने के बाद इसे सेट किया जाता है। वह गुड़ के बड़े-बड़े भेलों की जगह छोटे-छोटे बर्फी के आकार में बनाते हैं।
- पहले साल में, उन्होंने लगभग 42 क्विंटल गुड़ और शक्कर बेचा। योगेश कहते हैं कि उन्होंने धीरे-धीरे अपना सेट-अप बढ़ाया। अपने गन्ने से शुरू करके उन्होंने दूसरे किसानों से भी गन्ना खरीदना शुरू कर दिया। आज वह एक साल में लगभग 50 हज़ार क्विंटल गन्ने की प्रोसेसिंग करते हैं और 5000 क्विंटल गुड़ और शक्कर का उत्पादन करते हैं। इसके साथ ही, वह 2000 लीटर सिरका भी बनाते हैं। गन्ने का सिरका बहुत-सी औषधियों में इस्तेमाल होता है।
20649. पंजाब: लॉकडाउन में रुका काम तो बढई ने बना दी लकड़ी की साइकिल, अब विदेशों से मिले रहे ऑर्डर
Innovation and startups, ISRO/Defense/Water infrastructure/EV and other sectors
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Innovations in Bharat
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- धनी राम ने कभी नहीं सोचा था कि उनकी यह साइकिल इतनी वायरल हो जाएगी कि उन्हें कनाडा और साउथ अफ्रीका से भी कॉल आएंगे!
- सबसे पहले, उन्होंने चड़ीगढ़ के प्रशासनिक अधिकारी राकेश सिंह के लिए यह साइकिल बनाई। राकेश सिंह बताते हैं कि धनी राम का पहला प्रोटोटाइप देखकर ही उन्होंने इसे खरीदने का फैसला कर लिया था। उन्होंने जब उनसे संपर्क किया तो पता चला कि वह उस साइकिल में और बदलाव कर रहे हैं और राकेश ने उसी वक़्त उन्हें अपनी ज़रूरत के हिसाब से भी कुछ चीजें बता दीं। इस तरह से उन्होंने इस साइकिल को प्री-ऑर्डर पर बनवाया। धनी राम की इस साइकिल की कीमत 15 हज़ार रुपये है।
- अब तक धनी राम को लगभग 10 ऑर्डर मिल चुके हैं। पहली साइकिल बनाने में उन्हें एक महीना लग गया था। पर अब वह एक हफ्ते में एक साइकिल तैयार कर देते हैं। सोशल मीडिया पर उनकी साइकिल को देखकर उन्हें विदेशों से भी ऑर्डर मिले हैं। वह कहते हैं कि उनकी आगे की योजना इस साइकिल में डिस्क ब्रेक्स और गियर लगाने की है और उन्हें उम्मीद है कि वह कामयाब होंगे।
20650. ठाणे: इस सोसाइटी में बाल्टी में उगाई जाती हैं सब्जियाँ, सौर ऊर्जा से होता है बिजली उत्पादन
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- नेल्सन ने सोलर प्लांट सप्लायर (SKS GLOCHEM) के साथ एक नए तरह का सौदा किया है , जिसके अनुसार प्लांट मुफ्त में स्थापित किया गया। कंपनी का प्लांट पर सात साल तक(जब तक वे लागत वसूल नहीं कर लेते) मालिकाना हक होगा और फिर वह उसे बिल्डिंग को सौंप देगी। प्रति दिन प्लांट 140 यूनिट देता है जो MSEDCL को बेची जाती हैं।
- SKS GLOCHEM के सह-संस्थापक गोपालकृष्णन अय्यर ने बताया, “हमारा मुख्य उद्देश्य सौर प्लांट और इसके लाभों के बारे में जागरूकता लाना था। हम चाहते हैं कि लोगों को नेट मीटरिंग के कॉन्सेप्ट, निवेश पर वापसी और सोलर प्लांट स्थापना पर सरकार की सब्सिडी के बारे में पता चले और साथ ही यह गलतफहमी भी दूर करना चाहते थे कि दीर्घकालिक समाधानों में भारी निवेश की आवश्यकता है। सोलर प्लांट की स्थापना कॉमन एरिया के बिजली बिल को शून्य तक लाती है। निवेश और ROI जेनरेशन प्लांट के आकार पर निर्भर करते हैं।”
- SKS GLOCHEM के सह-संस्थापक गोपालकृष्णन अय्यर ने बताया, “हमारा मुख्य उद्देश्य सौर प्लांट और इसके लाभों के बारे में जागरूकता लाना था। हम चाहते हैं कि लोगों को नेट मीटरिंग के कॉन्सेप्ट, निवेश पर वापसी और सोलर प्लांट स्थापना पर सरकार की सब्सिडी के बारे में पता चले और साथ ही यह गलतफहमी भी दूर करना चाहते थे कि दीर्घकालिक समाधानों में भारी निवेश की आवश्यकता है। सोलर प्लांट की स्थापना कॉमन एरिया के बिजली बिल को शून्य तक लाती है। निवेश और ROI जेनरेशन प्लांट के आकार पर निर्भर करते हैं।”