| Jan 01, 1970 | Daily Report |
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21551. कोरोना काल में माँ-बाप खोने वाले बच्चों के लिए मसीहा बने शशि प्रकाश, कर रहे हैं अनाथ बच्चों की शिक्षा का प्रबंध
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Inspiring Stories of Students/Employees/Senior citizen/Organisation/individual
Hindi
India
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- इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद ही शशि प्रकाश ने शिक्षण कार्य की तरफ रुख कर लिया था।
- बीते 14 सालों से लगातार शिक्षण कार्य में जुटे शशि प्रकाश सिंह फिलहाल कोटा से अनअकैडमी के छात्रों को पढ़ा रहे हैं।
- आज शशि सिंह ने इस साल 2021 जरूररतमंद बच्चों की आर्थिक मदद करने का लक्ष्य रखा है।
21552. ‘बंगाल के पैडमैन’ ने स्थापित की 70 से अधिक पैड वेंडिंग मशीन, जहां महिलाएं 2 रुपये में ले सकती हैं सैनेटरी पैड्स
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Hindi
West Bengal
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- अब तक सोभन ने कोलकाता भर में 70 वॉशरूम पर बकायदा वेंडिंग मशीन स्थापित करने का काम किया है
- साथ ही महिलाओं के लिए ‘बंधन नैपकिन’ नाम से एक ऐप भी तैयार की है जिसके जरिये महिलाएं इन वेंडिंग मशीन को लोकेट कर सकती हैं।
- मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसका दुरुपयोग न हो इसके लिए शोभन ने सैनेटरी पैड्स दो रुपये का शुल्क तय किया है
21553. मदद के लिए बैंक बैलेंस नहीं, दिल होना चाहिए बड़ा; पढ़ें 25 वृद्धों वाले इस परिवार की कहानी
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Hindi
Odisha
The Better India
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- ओड़िशा के रहनेवाले किसान, जलंधर पटेल के पास खेत और घर भले ही बड़ा न हो, लेकिन उनका दिल बहुत बड़ा है। सिर्फ चार एकड़ खेत से, वह अपने परिवार का खर्च चलाने के साथ-साथ, 25 बेसहारा बुजुर्गों को भी आसरा दे रहे हैं। उनके पास पैसे नहीं बचते, जितना भी कमाते हैं वह पूरा का पूरा खर्च हो जाता है। कभी-कभी तो लोन भी लेना पड़ता है।
- लेकिन इसके बावजूद कभी भी इस वृद्धाश्रम को बंद करने के बारे में नहीं सोचा। जितने भी लोग मेरे पास आते हैं, वह और उनका परिवार उनकी ख़ुशी-ख़ुशी देखभाल करते हैं साल 2017 में पार्वती गिरी के नाम से ही वृद्धाश्रम शुरू किया। तब उन्होंने 10 से 15 लोगों के रहने के लिए कमरा बनवाया और छह लोगों के साथ इस आश्रम की शुरुआत की
- आज इस आश्रम में 25 लोग रह रहे हैं। वह उनके रहने के साथ-साथ, उनके खाने-पीने और दवाइयों का खर्च भी उठाते हैं।
21554. Scientist Quits Job To Innovate Teaching Model, Helps Over 26000 Students
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English
Jharkhand
The Better India
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- Mohammad Sajid Hussain is a scientist and educator from Jharkhand, who quit his high-flying job to return to his native village start Schoolasium, a learning centre that employs a different learning model to teach underprivileged students across the state.
- school does not follow conventional practices of teaching, which involve monologues and one-way dissemination of knowledge from teacher to students the school acts as a study lab for students, where they gain access to academic materials for practical learning.
- The school charges a fee of Rs 500 a month, which is waived off if the parents cannot afford it. over 26,618 students from 85 villages have been reached with this educational model, with more than 621 teachers implementing it in 122 schools. “There are 177 educators who conduct training for the teachers,”
21555. बीते 16 सालों से महज़ एक रुपये में इडली बेच रहा है यह शख्स, इस वजह से नहीं बढ़ाए कभी इडली के दाम
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Hindi
Andhra Pradesh
BBC News
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- आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी के राय भोपाल पट्टनम गाँव में स्थित छोटे से होटल का संचालन चिन्ना रामबाबू कर रहे हैं जो बीते 16 सालों से अपने क्षेत्र के लोगों को लगातार स्वादिस्ट इडली परोस रहे हैं। अब अगर किसी छोटे होटल की भी बात करें तो वहाँ पर भी आपको एक प्लेट इडली के लिए लगभग 25 से 30 रुपये का भुगतान करना पड़ेगा, लेकिन राय भोपाल सिर्फ 1 रुपये में इडली खिला रहे हैं।
- इस काम को जारी रखने के लिए चिन्ना रामबाबू को उनकी पत्नी और उनकी सास की पूरी मदद मिलती है सुबह 5 बजे से इडली की बिक्री शुरू कर देने के लिए चिन्ना रामबाबू को सुबह तड़के साढ़े 3 बजे उठना पड़ता है
- इडली की इतनी कम कीमत पर बीबीसी से बात करते हुए बताया था कि जब इस होटल की शुरुआत हुई थी तब क्षेत्र के सभी होटलों में भी लगभग एक ही रेट पर इडली मिलती थी। फिर जैसे-जैसे महंगाई बढ़ती गई अन्य होटल मालिकों ने अपनी इडली के दाम बढ़ाने शुरू कर दिये, लेकिन चिन्ना रामबाबू ने ऐसा नहीं किया।
21556. घाट वाला स्कूल: कभी खुद की पढ़ाई के लिए करना पड़ा था संघर्ष, आज गरीब बच्चों को मुफ़्त में पढ़ाते हैं नितिन
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Uttar Pradesh
Your Story
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- उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में गंगा नदी के तट पर संचालित किया जाने वाला ‘घाट वाला स्कूल’ आज लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। अपने शुरुआती दिनों में संघर्ष से भरी जिंदगी गुजारने वाले नितिन आज सैकड़ों की संख्या में जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त में शिक्षा उपलब्ध करा रहे हैं।
- नितिन आज करीब 200 से अधिक बच्चों को शिक्षा के उजाले से जोड़ने का काम कर रहे हैं।
- जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त में बेहतर शिक्षा व अन्य सुविधाएं हासिल हो सकें इसके लिए नितिन कुमार ने साल 2015 में ‘एक नई राह फाउंडेशन’ नाम से एक एनजीओ शुरू किया
21557. 71-YO Farmer’s Unique Technique Helps 4,000 Others Earn Profits Without Tilling
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English
Maharashtra
The Better India
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- Food scientist-turned-farmer, Chandrasekhar Bhadsavle, fondly addressed by farmers as ‘Dada’, introduced the Saguna Rice Technique (SRT) among a handful of farmers in Neral (Karjat) in 2013.
- As there is no puddling, transplanting and hand-hoeing in SRT, it save 50 per cent water, 40 per cent cost of production, and as we do not require transplanting we save 50 per cent on labour cost.
- 4,000 plus farmers are practising SRT. Of them several have their personal ‘record harvest’ stories to share, like former journalist Srinivas Pande of Ramtek (Nagpur) who harvested a yield of 18 quintals of fine rice from the earlier 12 quintals per acre, has trained over 50 farmers from Vidarbha
21558. नेपाल से आये भोपाल, साइकिल पर बेचा सूप, आज शहर भर में हैं 17 आउटलेट्स
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Nepal
The Better India
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- 2003 में डोलराज गैरे ने अपने शौक और अपनी कमाई को बढ़ाने के लिए भोपाल में साइकिल पर सूप, सैंडविच और बिरयानी बनाकर बेचना शुरू किया था। आज वह शहर के सबसे मशहूर फ़ास्ट फ़ूड कार्नर ‘सागर गैरे’ के मालिक हैं, जिसके शहर में 17 आउटलेट्स मौजूद हैं। कहते हैं न कि इंसान अगर अपने हुनर की पहचान कर ले और सच्चे मन से मेहनत करे, तो उसे कामयाब होने से कोई नहीं रोक सकता। ऐसा ही कुछ हुआ डोलराज गैरे के साथ भी।
- मूल रूप से नेपाल के रहने वाले डोलराज, वैसे तो किसान के बेटे हैं। उनके कई रिश्तेदार भारत में भी रहते थे, 1980 में वह घूमने और कुछ काम की तलाश में भारत में आए थे। आठवीं तक पढ़े डोलराज ने शुरुआत में दिल्ली में काम किया। डोलराज बताते हैं, “हम हर एक डिश में अपना खुद का मसाला ही इस्तेमाल करते हैं। फिर चाहे वह सैंडविच के लिए मायोनीज़ हो या छोले का मसाला। यही कारण है कि लोगों को हमारे यहां मिलने वाला स्वाद और कहीं नहीं मिलता।”
- डोलराज गैरे की मेहनत और उनका खुद के ऊपर विश्वास ही सही मायने में उनकी सफलता का कारण है। हालांकि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि एक दिन उनके स्वाद की तारीफ शहरभर में होगी
21559. रु.300 की कबाड़ साइकिल को बदला सोलर साइकिल में, चलाने ने नहीं आता एक पैसे का भी खर्च
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Gujarat
The Better India
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- बचपन से ही विज्ञान में रूचि रखने वाले वड़ोदरा के 18 वर्षीय, बारहवीं के छात्र नील शाह ने एक सोलर साइकिल बनाई है।
- यह साइकिल सूरज की रोशनी और पैडल के जरिए चार्ज होती है। इसमें न पैसे खर्च होते हैं और न किसी तरह का कार्बन उत्सर्जन होता है
- नील के पिता ने मात्र 300 रुपये में कबाड़वाले से एक साइकिल खरीदी थी। नील ने इसे महज 12 हजार रुपये खर्च करके एक सोलर साइकिल में बदल डाला। इस सोलर साइकिल में 10 वॉट की सोलर प्लेट है, जिससे साइकिल 10 से 15 किमी का सफर आराम से तय कर सकती है।
21560. मृत्यु के बाद भी रखा पिता की इच्छा का मान, कड़ी मेहनत से बगीचा बनाकर दिया पक्षियों को आसरा
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Gujarat
The Better India
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- गुजरात के रजनीकांत कंसारा हमेशा से अपने घर पर एक बगीचा बनाना चाहते थे। उनके जाने के बाद उनके बेटे ने ‘रजनी उपवन’ बनाकर उनका सपना पूरा किया।
- उनके पिता रजनीकांत कंसारा, एक सरकारी अधिकारी थे और वह हमेशा से वहां एक सुन्दर बगीचा बनाना चाहते थे।
- आज रजनीकांत तो इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन उनके नाम से बना ‘रजनी उपवन’ जरूर है। लॉकडाउन के दौरान उनके बेटे ने यह सुन्दर गार्डन बनाना शुरू किया और आज यहां सैकड़ों पेड़-पौधे लगे हुए हैं। परिवारवालों के साथ कई पक्षी भी इस सुन्दर उपवन का आनंद उठा रहे हैं।