| Jan 01, 1970 | Daily Report |
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21561. राम मास्टर: 15 किमी तक रास्ते के किनारे लगाए हज़ारों पौधे, पेड़ बनने तक दिया पिता जैसा स्नेह
- ओडिशा में बारगढ़ के रहने वाले 77 वर्षीय राम चंद्र साहू रिटायर्ड शिक्षक हैं और पिछले लगभग 40 सालों से लगातार पौधरोपण कर रहे हैं। साल 1964 में बतौर सरकारी शिक्षक की नौकरी की शुरुआत करने वाले राम चंद्र साहू एक किसान परिवार से हैं।
- उन्होंने अपने ही गांव के स्कूल में लगभग 26 सालों तक पढ़ाया है। इसलिए गांव में सब उन्हें राम मास्टर के नाम से जानते हैं।
- उन्हें हमेशा से प्रकृति से लगाव रहा है और यही वजह है कि वह बचपन से लेकर आजतक केवल और केवल पेड़-पौधों की सेवा में लगे हैं।
21562. Cargo movement through Inland waterways increases 2.76 times
- Cargo movement through National Waterways (NWs) and coastal waterways having linkage with NWs have registered a growth of more than 2.76 times during the past five years, said Union Minister for Ports, Shipping and Waterways Sabananda Sonowal here on Tuesday.
- the growth rate of IWT on National Waterways from 2009-10 to 2013-14 was at 1.5%, the growth rate increases to 13.5% in 2020-21 annually.
- The cost of water transport in India is roughly Rs 0.5 paise per kilometer as compared to Rs 1 by railways and Rs 1.5 per kilometer by road. India has a navigable length of 14,500 kilometers and moves about 44 million tonnes of cargo annually through these waterways using mechanized vessels and country boats in an organized manner in the waterways of Goa, West Bengal, Assam, and Kerala.
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21563. How this small textile manufacturer is recycling plastic water bottles to make fashion sustainable
- Mumbai-based Kapil Bhatia has been in the textile sector for more than 20 years, still he hardly knew about ways to reduce carbon emissions by the clothing industry.
- To cater to the opportunity of recycled synthetic fabric, Bhatia launched his direct-to-consumer (D2C) recycled fabric brand UNIREC under the parent entity Cambridge Textiles India to manufacture blazers, trousers, sleeveless jackets, T-shirts from recycled PET bottles.
- The company focuses on stitching the apparel and have outsourced the recycling part. The recycled fabric is sourced from third-party manufacturers who procure yarn from yarn manufacturers who are further connected to multiple recyclers of plastic bottles into the recycled fibre.
21564. Railways plans double decker trains for passenger & cargo transport
- the Indian Railways plans to roll out double decker trains which can transport cargo and passengers as well. First two such trains with 20 coaches will be manufactured with nearly Rs 160 crore investments at a rail coach factory
- the middle and upper decks of the coaches in the trains will have the seating space to accommodate a maximum of 72 passengers, the lower deck can be used for transporting goods of upto 4-5 tonnes.
- It has set the target for the highest ever freight loading during 2022-23 at 1,475 million tonnes (MTs), an increase of 5% from the current fiscal year. This is estimated to generate around Rs 1.65 lakh crore, which is nearly 14% more than the earning from the freight segment in the current fiscal year ending March 2022.
21565. 6 बार कैंसर को मात दे चुके हैं जयंत, आज दो स्टार्टअप चलाने के साथ लेखन में भी चख रहे हैं सफलता का स्वाद
- अजमेर के रहने वाले जयंत कंदोई को 6 बार कैंसर हुआ है और उन्होने कैंसर को हर बार हराया है। जयंत कैंसर सर्वाइवर होने के साथ ही एक लेखक और आंत्रप्रेन्योर भी हैं जयंत को बोन मैरो ट्रांसप्लांट से भी गुज़रना पड़ा क्योंकि कई बार ऐसा भी होता है कि इलाज के बाद भी कुछ कैंसर सेल मनुष्य के शरीर में रह जाती हैं।
- इस सब के बीच जयंत ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर सिटी स्टार्स क्लब नाम की एक संस्था शुरू की।जो लोग कैंसर के साथ ही डिप्रेशन जैसी बीमारी से लड़ रहे हैं और उनके पास जानकारी का अभाव है, ऐसे लोगों की मदद के लिए ही उन्होने यह एनजीओ शुरू किया है।
- जयंत के अनुसार आज उनके एनजीओ के साथ करीब 700 से अधिक वॉलंटियर जुड़े हैं जो सक्रिय रूप से संस्था को डोनेशन भी देते हैं।
21566. छत को बनाया खेत, 10 सालों से बाजार से नहीं खरीदनी पड़ी सब्जियां
- तेलंगाना के तुम्मेटि रघोत्तम रेड्डी। वह पिछले 10 वर्षों से अपने घर की छत पर बागवानी कर रहे हैं। उनके बगीचे में कई तरह की सब्जियां, फल, फूल और औषधीय पौधे आपको मिल जायेंगे। दिलचस्प बात यह है कि रघोत्तम ने बागवानी के अपने अनुभव के अधार पर एक किताब भी प्रकाशित की है, जिसका नाम है- ‘Terrace Garden: Midde Thota’
- टेरेस गार्डन सेटअप करने में लगभग 20 हजार रुपए का खर्च आया था। एक बार में यह सभी पैसे निवेश नहीं किए बल्कि धीरे-धीरे गार्डन को बढ़ाया। आज गार्डन की वजह से बाहर से कोई सब्जी खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती है।
- यदि हिसाब लगाया जाए तो 10 साल में टेरेस गार्डन से 25 क्विंटल सब्जी का उत्पादन हुआ है।
21567. कभी खेती करने को थे मजबूर, अब 40 लाख रुपये की स्कॉलरशिप पर UK पढ़ने जाएंगे केरल के एबी जॉर्ज
- अपने परिवार की मदद करने के लिए खेतों में काम करने वाले एबी जॉर्ज अब यूनाइटेड किंगडम के एक बड़े विश्वविद्यालय में पढ़ाई करने जाने वाले हैं।
- केरल के कुट्टनाड के चेंपमपुरम के एक छोटे से गाँव के निवासी एबी जल्द ही दक्षिण पश्चिम इंग्लैंड में स्थित डेवोन काउंटी के एक्सेटर विश्वविद्यालय में ‘ग्लोबल सस्टेनेबिलिटी सोल्यूशंस’ में मास्टर्स की पढ़ाई शुरू करेंगे।
- स्थानीय स्तर पर कृषि क्षेत्र असंगठित था और कई किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा था। इस समस्या को हल करने के लिए एबी ने एक 'किसान उत्पादक संगठन' बनाया। अब इस संगठनके लगभग 900 सदस्य हैं।
21568. 2017 में दो छात्रों के साथ शुरू हुआ यह एनजीओ 1,000 बच्चों को स्कूल भेज चुका है
- जयपुर स्थित Smile For All सोसाइटी झुग्गी-झोपड़ियों के बच्चों को वापस स्कूलों में लाने के मिशन पर है।
- 500 रुपये प्रति माह से शुरू होने वाले इसके हैप्पीनेस सब्सक्रिप्शन के साथ, संरक्षक वंचित बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने में मदद कर सकते हैं।
- जयपुर की Smile For All society (SFA) इन बच्चों को वापस स्कूल भेजने की कोशिश कर रही है। भुनेश शर्मा और उनकी पत्नी नेहा शर्मा की एक पहल, SFA एक गैर सरकारी संगठन है जो वंचित बच्चों को निजी स्कूली शिक्षा प्रदान करने के लिए समर्पित है।
21569. पहले मेहनत से बने इंजीनियर, फिर छोड़ी दी नौकरी, अब कर रहे हैं तालाबों की सफाई
- गाजियाबाद के Pond Man, रामवीर तंवर ने इंजीनियर की नौकरी छोड़कर, तालाबों को स्वच्छ करने का बीड़ा उठाया है। इसके लिए उन्होंने say earth संस्था की स्थापना की है। रामवीर तंवर का जन्म ग्रेटर नोएडा के डाढ़ा-डाबरा गांव में हुआ। उनके पिता पेशे से किसान थे। रामवीर की प्रारंभिक और उच्च शिक्षा गांव में ही पूरी हुई।
- उन्होंने 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद इंजीनियरिंग में दाखिला लिया। रामवीर के पिता के पास उन्हें पढ़ाने के लिए पैसे नहीं थे, लेकिन उनके पिता चाहते थे कि रामवीर इंजीनियर बने। इसके लिए उन्होंने अपनी जमीन तक बेच दी थी। जमीन के पैसों से रामवीर का दाखिला ग्रेटर नोएडा के एक कॉलेज में कराया। साल 2014 में रामवीर तंवर ने मेकैनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर ली। साइंट लिमिटेड कंपनी में नौकरी करने लगे। उन्हें अच्छा खासा सैलरी पैकेज मिल रहा था। लेकिन साल 2015-16 में उन्होंने नौकरी छोड़ दी।
- उन्होंने यूपी के कई इलाकों, जैसे ग्रेटर नोएडा के चौगानपुर, रौनी गांव, गाजियाबाद के मोरटा गांव, सहारनपुर के नानाखेड़ी गांव सहित राजधानी दिल्ली के गाज़ीपुर गांव के पानी में पड़े कचरे को साफ करके उसे स्वच्छ तालाब में तब्दील कर दिया है। अब तक 30 से अधिक तालाबों को वह संरक्षित कर चुके हैं। लोग उन्हें तालाबों से जुड़ी इस मुहिम में सफल होने के बाद से पॉन्ड मैन (Pond man) के नाम से पुकारते हैं।
21570. Once A Child Labourer, Hero Helps Hundreds Of Homeless Get Care & Jobs
- Anumuthu’s childhood was marred with poverty and struggle as a child labourer after he lost his father at only 7. Learning from his own experiences, today he provides dignity and care in the form jobs, medical attention, food and clothes to the homeless through his NGO Snehan.
- There are 1.77 million homeless people in India, a majority of whom do not have access to shelter, sanitation, food, health ,water, let alone a source of livelihood.
- The 39-year-old first worked on establishing a brand under which he would sell cotton-based products like bags, aprons, and more. He would use the income to help the destitute and continue doing photography to support himself and his family.