| Jan 01, 1970 | Daily Report |
| RISING BHARAT | News Count (102317) | |
21541. Pivot and Persist: Flinto Learning brings preschool experience at home, generates 100k customers in three months
Innovation and startups, ISRO/Defense/Water infrastructure/EV and other sectors
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Startups in Bharat
English
India
Your Story
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- Flinto was founded in September 2013 by Arunprasad, Vijay Babu Gandhi, and Shreenidhi Srirangam to change the way children between ages two and 12 learn. In the last seven years, the startup has yielded two products — Flintobox and Flintoclass.
- The startup launched Flintoclass@HOME, a preschool system providing structured early learning to children, in June 2020. The solution is focussing on making children school-ready from the safety of home.
- Flintoclass@HOME already has one lakh-plus customers across the country, and the team claims the number is doubling every 10 days.
21542. आज की पॉजिटिव खबर:जबलपुर में ननद और भाभी मिलकर चलाती हैं डेयरी, सालाना 2 करोड़ रु का टर्नओवर; ऑर्डर से डिलीवरी तक सबकुछ ऑनलाइन
Innovation and startups, ISRO/Defense/Water infrastructure/EV and other sectors
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Startups in Bharat
Hindi
India
Dainik Bhaskar
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- मध्य प्रदेश के जबलपुर की वंदना अग्रवाल और डॉक्टर मोनिका अग्रवाल रिश्ते में ननद - भाभी हैं।दोनों मिलकर जबलपुर में डेयरी चलाती है, वो भी हाईटेक डेयरी जहां पूरा सिस्टम कैशलेश और ऑनलाइन है, डिलीवरी से लेकर मेंटेनेंस तक सबकुछ। अभी ये लोग करीब 400 घरों में दूध, पनीर और खोया सप्लाई करती हैं।
- 44 साल की वंदना अग्रवाल ने एनवायरमेंटल साइंस से मास्टर्स किया है जबकि 36 साल की मोनिका अग्रवाल वेटरनरी डॉक्टर हैं।
- दना प्रोडक्ट प्रमोशन और डिलीवरी का काम संभालती हैं। कहती हैं,” अभी हमारे पास 200 से ज्यादा भैंस और 10-12 गायें हैं। 400 से ज्यादा घरों में हम दूध की सप्लाई करते हैं। सालाना 2 करोड़ रुपए का टर्नओवर है। 25 लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं।“
21543. एक मशीन से रोपें कई तरह के बीज, छात्र के आविष्कार को मिला बालशक्ति पुरस्कार
Life for Society: Case Studies
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Inspiring Stories of Students/Employees/Senior citizen/Organisation/individual
Hindi
Karnataka
The Better India
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- कर्नाटक के दक्षिण कन्नडा के पुत्तुर में रहने वाले राकेश कृष्ण के. मंगलुरु के एक्सपर्ट पीयू कॉलेज में 12वीं कक्षा के छात्र हैं। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने किसानों के लिए मशीन बनाई है, जिससे किसान कई तरह की फसलों के बीजों की रोपाई कर सकते हैं।
- उन्होंने अपनी मशीन को ‘सीडोग्राफर’ नाम दिया है, इस नवाचार के लिए उन्हें कई पुरस्कार भी मिले हैं। जिनमें साल 2021 का प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बालशक्ति पुरस्कार भी शामिल है, अप्रैल 2020 में SAKURA- International Science Exchange प्रोग्राम के लिए भी चुना गया।
- 2017 में नैशनल इनोवेशन फेस्टिवल के दौरान राष्ट्रपति भवन में भी तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को अपने इस अविष्कार को दिखाने का मौका मिला था।
21544. मुमकिन योजना के प्रति बेरोजगार होने लगे आकर्षित
Life for Society: Case Studies
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Inspiring Stories of Students/Employees/Senior citizen/Organisation/individual
Hindi
India
Dainik Jagran
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- सरकार की युवाओं को स्वरोजगार के लिए मुमकिन योजना के प्रति बेरोजगार आकर्षित होने लगे हैं। इसके चलते बड़ी संख्या में बेरोजगार रोजगार पाने के लिए मुमकिन योजना के तहत व्यवसायिक वाहन खरीदने के लिए रोजगार एवं परामर्श कार्यालय में आवेदन कर रहे हैं। योजना लाभार्थियों को छोटे व्यवसायिक वाहनों की खरीद के लिए 1.60 लाख सब्सिडी प्रदान की जा रही है और शेष राशि जम्मू और कश्मीर बैंक द्वारा मुद्रा ऋण के तहत प्रदान की जाती है।
- कठुआ जिले के इच्छुक युवाओं से कुल 62 आवेदन प्राप्त हुए हैं, व्यवसायिक वाहनों को खरीदने वाले लाभार्थियों की संख्या 27 हो गई है।
- मिशन यूथ के तहत एक और योजना ''तेजस्वनी'' शुरू की गई है। “यह उन महिलाओं के लिए समर्पित है जिन्होंने 10 वीं कक्षा पास की है और 18-35 वर्ष की आयु वर्ग में आती हैं। उन्हें एक व्यावसायिक इकाई शुरू करने के लिए 5 लाख का ऋण दिया जाएगा।
21545. दृष्टिहीन बच्चों की जिंदगी में रंग भर रहे हैं सुमित, सिखा रहे हैं खूबसूरत पेंटिंग बनाना
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Hindi
Maharashtra
Your Story
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- सुमित मुंबई में उन बच्चों को चित्रकारी करना सिखा रहे हैं जो बच्चे देख सकने में सक्षम नहीं हैं। ‘रंग गंध’ के साथ सुमित का यह खास सफर बीते 15 सालों से लगातार जारी है।
- समाजसेवी सुमित पाटिल ‘रंग गंध’ नाम के एनजीओ के संचालक हैं। ये बच्चे रंगों को देखकर पहचान नहीं सकते थे तो इसके लिए सुमित ने एक अनूठा उपाय खोज निकाला। सुमित ने हर रंग को एक अलग खुशबू दे दी, जिसके बाद अब बच्चे आसानी से इन रंगों को पहचान पाते हैं।
- सुमित अब तक करीब एक हज़ार से अधिक बच्चों को पेंटिंग करना सिखा चुके हैं। खास बात यह भी है कि इन बच्चों द्वारा बनाई गई तमाम पेंटिंग्स को प्रदर्शनियों में भी शामिल किया जा चुका है।
21546. Meet The School Teacher Making Way For 500 Elephants to Cross 25 Tea Gardens
Life for Society: Case Studies
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Inspiring Stories of Students/Employees/Senior citizen/Organisation/individual
English
West Bengal
The Better India
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- SP Pandey runs SPOAR – Society for Protecting Ophiofauna and Animal Rights – an organisation that works to resolve animal human conflict in West Bengal, and collaborates with the forest officials, gram panchayat and tea estate owners
- A group of villagers teased a herd of elephants on NH 39 and when one of them retaliated, it led to the death of Munda, a local. S P Pandey, a primary school teacher from Malbazar in Jalpaiguri district, has been conducting sensitisation workshops for the last two years across five elephant corridors.
- SP Pandy approached more than 25 tea state owners and requested them to replace electrical fencing with natural fencing like wood, bamboo or bushes.
21547. 88 की उम्र में 18 की फिटनेस! रोज़ 4 घंटे की गार्डनिंग है इसका राज़
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Inspiring Stories of Students/Employees/Senior citizen/Organisation/individual
Hindi
Gujarat
The Better India
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- 88 वर्षीय पद्माकर फरसोले, 30 सालों से बागवानी कर रहे हैं। वह घर पर ही कम्पोस्ट बनाकर जैविक फल-सब्जियां उगाते हैं और इसे ही वह अपने अच्छे स्वास्थ्य का कारण भी मानते हैं। उनके 425 स्क्वायर यार्ड के प्लॉट के तकरीबन आधे हिस्से में घर है और आधे में गार्डन, जिसमें उन्होंने हजारों पौधे लगाए हैं।
- यूँ तो मुझे हमेशा से पौधों का शौक़ रहा है। हालांकि किराये के मकान में कभी ज्यादा पौधे लगाने का मौका नहीं मिला। लेकिन साल 1985 में, जब मैंने खुद का घर बनवाया, तब जाकर मैं ढेरों पौधे लगा पाया।
- वह साल में 1000 किलो कम्पोस्ट तैयार कर लेते हैं। उनका कहना है, “खुद कम्पोस्ट तैयार करने से, साल में 5000 रुपये की बचत होती है। क्योंकि मुझे बाहर से कुछ भी नहीं लेना पड़ता, ऊपर से सोसाइटी में सफाई भी रहती है।
21548. भारतीय सेना जम्मू और कश्मीर के स्थानीय लोगों को मशरूम की खेती से बनाएगी आत्मनिर्भर
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Hindi
Jammu and Kashmir
Republic
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- भारतीय सेना न केवल दुश्मनों से लड़ती है बल्कि जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को आत्मनिर्भर बनाने में भी मदद करती है। सेना ने किश्तवाड़ जिले के शेरगवारी के नागरिना गांव में बेरोजगार युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मशरूम की खेती परियोजना का उद्घाटन किया है।
- इसमें स्थानीय बेरोजगारों को गांव में 60 दिवसीय वाणिज्यिक मशरूम की खेती के बारे में पूरी जानकारी दी जाएगी। लाभार्थियों में आतंकवादी हमलों के शिकार, स्थायी रूप से अक्षम / मारे गए आतंकवादियों के परिवार के सदस्य, विकलांग व्यक्ति और गरीबी रेखा से नीचे के लोग शामिल हैं।
- प्रशिक्षण कृषि विभाग द्वारा दिया जाएगा। इसकी निगरानी सेना द्वारा की जाएगी। भारतीय सेना की इस पहल से स्थानीय लोगों का विकास होगा। वो इससे आत्मनिर्भर बन पाएंगे।
21549. गरीबों का मुफ्त इलाज करते हैं यह डॉक्टर, कई बार खुद की जेब से देते हैं दवा के पैसे भी
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Inspiring Stories of Students/Employees/Senior citizen/Organisation/individual
Hindi
Jharkhand
The Better India
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- झारखंड के रांची में रहने वाले 52 वर्षीय डॉक्टर अनिल कुमार का। साल 1995 में अपनी मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने वाले डॉ. अनिल ने गुजरात और झारखंड के सरकारी स्वास्थ्य विभागों में कई सालों तक अपनी सेवाएं दी हैं।
- शहर में उन्हें लोग ‘गरीबों का मुफ्त इलाज करने वाले’ डॉक्टर के रूप में जानते हैं। लॉकडाउन और कोरोना महामारी के दौरान जब उन्होंने लोगों की मदद के लिए ‘Save Life Mission’ के नाम से व्हाट्सऐप ग्रुप शुरू किए तो लोगों को उनके काम के बारे में पता चला।
- व्हाट्सऐप के जरिये हर तबके के लोग मुझसे जुड़े हुए हैं। मैंने कभी भी किसी को ऑनलाइन परामर्श देने के लिए मना नहीं किया। न ही इसके लिए कोई फीस ली।
21550. दोनों पैर नकली लेकिन हौसले थे फौलाद, यूरोप की सबसे ऊंची चोटी फतह कर गए चित्रसेन
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Inspiring Stories of Students/Employees/Senior citizen/Organisation/individual
Hindi
Chhattisgarh
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- जब हौसले बुलंद हो तो किसी भी बाधा को पार करते हुए कामयाबी पाई जा सकती है और छत्तीसगढ़ के युवा पर्वतारोही चित्रसेन साहू इस का ताजा उदाहरण हैं। साल 2014 में हुए एक हादसे के चलते चित्रसेन को अपने पैर गँवाने पड़ गए थे।
- चित्रसेन ने अपने कृत्रिम पैरों के साथ यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस को फतह कर एक नेशनल रिकॉर्ड स्थापित कर दिया है। चित्रसेन को यह कामयाबी 23 अगस्त को हासिल हुई थी जब उन्होने चोटी पर गर्व के साथ तिरंगे को लहराया था। रूस में स्थित इस पर्वत की ऊंचाई 5 हज़ार 642 मीटर है। अपनी इस सफलता के साथ अब चित्रसेन ऐसा करने वाले देश के पहले डबल अम्पुटी पर्वतारोही भी बन गए हैं।
- चित्रसेन के नाम 14 हज़ार फीट से स्काई डाइविंग करने का भी रिकॉर्ड दर्ज़ है, इतना ही नहीं वे एक सर्टिफाइड स्कूबा डाईवर भी हैं।