| Jan 01, 1970 | Daily Report |
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21261. स्कूली छात्रों की पहल, घर-घर जाकर इकट्ठी करते हैं दवाइयां ताकि ज़रूरतमंदों तक पहुँचा सकें!
Life for Society: Case Studies
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Inspiring Stories of Students/Employees/Senior citizen/Organisation/individual
Hindi
Maharashtra
The Better India
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- युग सांघवी, कृष्य मनियार और अयान शाह, तीनों दोस्त धीरुभाई अम्बानी इंटरनेशनल स्कूल में 12वीं कक्षा के छात्र हैं। ये तीनों मिलकर, ‘शेयर मेड्स’ नाम से एक अभियान चला रहे हैं,
- जिसके अंतर्गत ये समृद्ध तबके के घरों से बची हुई, लेकिन बिल्कुल सही दवाईयां लेकर चैरिटेबल क्लीनिक्स को देते हैं ताकि वहां से ये ज़रूरतमंद लोगों तक पहुँच सकें।
- इससे ज़रूरतमंदों की मदद भी हो रही है और साथ ही, मेडिकल वेस्ट भी कहीं न कहीं कम हो रहा है।
21262. साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल: जींद में हिंदू परिवार ने मुस्लिम लड़की को दफनाने के लिए दी जमीन
Life for Society: Case Studies
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Inspiring Stories of Students/Employees/Senior citizen/Organisation/individual
Hindi
Haryana
NBT
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- जींद के गुल्कानी गांव का है जहां के कई मुस्लिम परिवारों ने आरोप लगाया कि वे पिछले 10 सालों से अपने परिजनों को दफनाने में समस्या का सामना कर रहे हैं, लेकिन सभी सरपंचों और जिला प्रशासन ने समस्या को हल करने के लिए कुछ नहीं किया। मुस्लिम परिवार के लोगों का कहना है कि लड़की की मौत हो जाने के बाद कई जगहों पर संपर्क करने के बावजूद दोपहर तक उसका अंतिम संस्कार करने के लिए जगह का इंतजाम नहीं पा रहा था। आखिर में हिंदू समुदाय के एक व्यक्ति ने बेटी का अंतिम संस्कार करने के लिए श्मशान के पास जमीन का एक टुकड़ा देकर उनकी मदद करने का फैसला किया.
- लड़की के पिता जोगिंदर ने बताया कि जिला प्रशासन हमारी मांगों को पूरा करने में नाकाम रहा है। हम एक छोटा सा जमीन का टुकड़ा पाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कोई भी इस मुद्दे को हल करने के लिए तैयार नहीं है। वहीं इस बीच एक हिंदू परिवार आगे आया और उन्होंने हमें श्मशान के पास की जमीन देकर हमारी मदद की। पड़ोसी किसान को नहर का पानी मिलने की बारी के बाद अपने खेत की सिंचाई करनी पड़ती है, फिर भी उसने अपनी जमीन की पेशकश की। जबकि अधिकारी इस लंबे समय तक इस मुद्दे को हल करने में नाकाम रहे हैं। उनका कहना है कि हम एक स्थायी समाधान चाहते हैं।
- वहीं गाँव के सरपंच जयदीप सिंह ने कहा, गांव में 16 जातियां रहती हैं और सभी सौहार्द और भाइचारे की भावना से रहते हैं। लगातार हो रही बारिश से कब्रिस्तान में जल जमाव हो गया है। मैंने पानी के निकास के लिए दो व्यक्तियों को पास के खेत में पाइपों के माध्यम से नियुक्त किया है। हम जल्द ही एक व्यवस्था करेंगे ताकि हमारे मुस्लिम परिवारों को भविष्य में गाँव में किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
21263. Smart City Project से इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में बनेगा 1500 सीटों वाला आलीशन आडिटोरियम
Innovation and startups, ISRO/Defense/Water infrastructure/EV and other sectors
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Innovations in Bharat
Hindi
Uttar Pradesh
Dainik Jagran
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- स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से प्रयागराज में कई ऐसे विकास कार्य हो रहे हैं जिनके पूरा होने से पब्लिक को खासी सहूलियत होगी।
- इसी प्रोजेक्ट के तहत इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इवि) में 1500 सीटों वाला आडिटोरियम (बहुउद्देश्यीय भवन) बनाया जाएगा। इसके लिए ई-टेंडर जारी कर दिया गया है। यह 30 सितंबर को खुलेगा।
- बहुउद्देश्यीय भवन के निर्माण के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने स्मार्ट सिटी मिशन को करीब 12 हजार स्क्वायर मीटर जमीन मुहैया कराया है। यूनिवर्सिटी से भूमि लीज पर मिली है। इसके निर्माण की जिम्मेदारी प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) को दी गई है।
21264. जनवरी में भारत आएगा सबसे घातक लड़ाकू विमान, इजरायली और इंडियन टेक्नोलॉजी से लैस 36वें राफेल में होंगी ये खूबियां
Innovation and startups, ISRO/Defense/Water infrastructure/EV and other sectors
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Innovations in Bharat
Hindi
India
TV9 Bharatvarsh
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- भारतीय एयरफोर्स के बेड़े में जल्द ही राफेल विमानों की संख्या 36 होने वाली है. फ्रांस अगले तीन महीनों में हर महीने 3 राफेल लड़ाकू विमानों की डिलीवरी करेगा```
- 36 राफेल विमानों में से आखिरी यानी 36वां राफेल फाइटर ऐसा विमान होगा जिसमें भारतीय टेक्नोलॉजी पर आधारित उपकरण लगे होंगे और ये सबसे ज्यादा घातक राफेल होगा
- इस लड़ाकू विमानों में हवा से जमीन में मार करने वाल स्कैल्प और हैमर मिसाइल के साथ-साथ राफेल विमान में उपयोग की जाने वाली अधिक रेंज, अधिक ऊंचाई और अधिक सटीकता के साथ हमला करने वाली मेटेअर मिसाइलों को पहले ही शामिल किया जा चुका है
21265. मशरूम की खेती: व्यापारिक मॉडल और प्रसंस्करण विधि की जानकारी
Contribution of SOCIETY to “Make in India” Self-employment (Atmanibhar)
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Agriculture(Organic Farming)
Hindi
India
Gaon Connection
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- मशरूम की खेती करने के लिए बहुत ज्यादा जगह की जरुरत नहीं होती है। अपने घर की किसी खाली जगह में भी आराम से उगाए जा सकते हैं। ग्रामीण महिलाओं के लिए भी मशरूम की खेती उनकी पारिवारिक आय बढ़ाने में मददगार हो सकती है।
- छोटे स्तर पर मशरूम खेती करने के लिए 10000 रुपए से 50000 रुपए तक की लागत आती है, जबकि बड़े स्तर पर मशरूम की खेती करने के लिए 100000 रुपए से 1000000 रुपए तक का निवेश करना उचित रहता है।
- छोटे किसान के लिए हर एक मशरूम फल के थैले पर 40% प्रतिशत तक एवं सामान्य व्यक्ति के लिए 20% तक सब्सिडी प्राप्त की जा सकती है।(
21266. जंगल, पहाड़ और सुरंगः रोज 15 किमी पैदल चलकर दुर्गम इलाकों में पत्र पहुंचाने वाले पोस्टमैन डी सिवन
Life for Society: Case Studies
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Inspiring Stories of Students/Employees/Senior citizen/Organisation/individual
Hindi
Tamil Nadu
NBT
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- तमिलनाडु के डी. सिवन पिछले हफ्ते रिटायर हो गए। डी सिवन कोई बहुत बड़ी नामी हस्ती नहीं हैं। वह यूं तो एक साधारण से पोस्टमैन हैं लेकिन उनके काम असाधारण हैं। वह कुनूर की नीलगिरी में कठिन पहाड़ी इलाकों से होते हुए लोगों तक उनके पत्र पहुंचाते थे। खासबात यह है कि इन पहाड़ियों में कोई गाड़ी तो दूर साइकल तक नहीं चल सकती इसलिए वह रोज पैदल ही चिड्ढियां बांटने जाते थे। इस दौरान उन्हें रोज लगभग 15 किलोमीटर का पहाड़ी और जंगली रास्ता तय करना पड़ता था।
- सिवन जब लोगों तक उनके संदेश पहुंचाने जाते तो कई बार जंगली हाथी उनका पीछा करते। वह स्लॉथ बियर समेत कई जंगली जानवरों ने उन्हें भगाया लेकिन वह कभी नहीं डरे। घरवालों की चिंता और अपनी जान को खतरा होने के बावजूद वह अपने कर्तव्य से कभी पीछे नहीं हटे। वह हमेशा कहते थे कि जब तक वह जिंदा हैं या जब तक रिटायर नहीं हो जाते, तब तक अपनी ड्यूटी नहीं छोड़ेंगे।
- डी सिवन ज्यादातर नीलगिरि माउंटेन रेलवे ट्रैक के साथ-साथ चलते थे। उन्हें पहाड़ियां चढ़नी पड़ती थीं। भारी उतार-चढ़ाव वाले रास्ते पार करे पड़ते थे। वह सभी बाधाएं पार करके बुरीलियार के पास सिंगार एस्टेट पर जंगलों के पास रहने वाले बागान श्रमिकों तक उनके पत्र और पेंशन पहुंचाते थे। सिवन को अपनी यात्रा के दौरान सुरंगे भी पार करनी पड़ती थीं। सुरंगे पार करने के दौरान अंदर घोर अंधेरा होता था। अंधेरे में जानवरों के छिपे होने का डर होता था लेकिन वह नहीं डरते थे।
21267. गंदा नाला बन चुकी नदी से निकाला 100 ट्रक से ज्यादा कूड़ा, ढूंढा नदी का उद्गम स्थल!
Life for Society: Case Studies
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Inspiring Stories of Students/Employees/Senior citizen/Organisation/individual
Hindi
Uttarakhand
The Better India
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- प्रयागराज में ग्रीन मैन ने अपने अनूठे अंदाज में मनाया रक्षा बंधन
- पेड़ पौधों को राखी बांधकर तामउम्र हिफाजत करने का संकल्प
- हरियाली गुरु के प्रयागराज में लगा चुके हैं 1 लाख से ज्यादा पौधे पेड़-पौधों की आरती उतारने के बाद तनों में बांधा गया रक्षा सूत्र
21268. मल्टीलेयर फार्मिंग: एक एकड़ में गोभी धनिया समेत 3 फसलें, 4 लाख की कमाई, जानिए पूरा गणित
Contribution of SOCIETY to “Make in India” Self-employment (Atmanibhar)
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Innovative ideas
Hindi
Madhya Pradesh
Gaon Connection
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- मध्य प्रदेश में धार जिले के किसान सीताराम निगवाल की कहानी, जो सिर्फ 2 एकड़ में मल्टीलेयर फार्मिंग से सालाना 7-8 लाख रुपए कमाते हैं। कमाई बाजार के भाव और उत्पादन के हिसाब से कम ज्यादा होती रहती है।
- किसानों के लिए मल्टीलेयर फार्मिंग मॉडल (Multilayer Farming Model) बेहद कारगर हो सकता है। मध्य प्रदेश के धार जिले के आवलिया गांव के किसान सीताराम निगवाल पिछले 6 सालों से सब्जियों की मल्टीलेयर फार्मिंग कर रहे हैं और सालाना अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।
- नए तरीके से खेती के लिए उन्हें आईसीएआर (ICAR) की तरफ से एक लाख का नगद ईनाम भी मिल चुका है।
21269. छत्तीसगढ़: ‘जल स्टार’ वीरेंद्र सिंह के अभियानों से एक नदी, 2 कुंड और 35 तालाब हुए स्वच्छ!
Life for Society: Case Studies
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Inspiring Stories of Students/Employees/Senior citizen/Organisation/individual
Hindi
Chhattisgarh
The Better India
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- जल-अभियानों के साथ-साथ वीरेंद्र छुट्टी वाले दिन गाँव के बच्चों और महिलाओं के साथ मिलकर वृक्षारोपण और स्वच्छता अभियान चलाते हैं!
- ‘ग्रीन कमांडो’ और ‘जल स्टार’ जैसे नामों से प्रसिद्ध वीरेंद्र सिंह हर साल रक्षाबंधन के मौके पर वेस्ट मटेरियल से राखी भी बनाते हैं।
- “13 साल पहले हमें गाँव के एक कुंड की साफ़ सफाई कर उसे सहेजा था और फिर इस पर सरकार के सहयोग से घाट बन गया। आज सभी लोग इस घाट का आनंद लेते हैं। उस कुंड से शुरू हुआ जल-स्त्रोतों को सहेजने का काम लगातार चलता रहा। हमने अब तक 35 तालाबों, 2 कुंड, तन्दला नदी और कई नालों की साफ़-सफाई की है,” उन्होंने बताया।
21270. KAU to hold farmer- scientists interface on GI-tagged rice varieties
Infrastructural Development and Government Schemes
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Border Infrastructure/ Roads Development
English
Kerala
The Hindu
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- Objective of organising Farmer Scientists Interface is to strengthen export-oriented production of GI tagged rice varieties in Kerala by involving farmers, entrepreneurs and other stakeholders.
- The Central Training Institute, Mannuthy, under the Directorate of Extension, Kerala Agricultural University in collaboration with the Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority (APEDA) will organise a Farmer- Scientists Interface on GI Tagged Rice Varieties in hybrid mode on October 12.
- Around 20 Palakkadan Matta Rice cultivating farmers are expected to participate in offline mode at the seminar hall of Communication Centre, Mannuthy. GI rice growing farmers from other districts will be participating through online mode.