| Jan 01, 1970 | Daily Report |
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20811. विदेश से गांव लौटे यशपाल रावत कर रहे जैविक खेती
Contribution of SOCIETY to “Make in India” Self-employment (Atmanibhar)
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Agriculture(Organic Farming)
Hindi
India
Dainik Jagran
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- चकराता: पिछले डेढ़ दशक से होटल व्यवसाय से जुड़े जौनसार के रंगेऊ निवासी यशपाल रावत विदेश में जनरल मैनेजर की नौकरी छोड़ गांव में आकर जैविक खेती कर रहे हैं।
- उनकी यह पहल पलायन रोकने के साथ पहाड़ में खेती-बागवानी के जरिए स्वरोजगार को बढ़ावा देना है। इसके लिए वह दिन-रात कड़ी मेहनत कर अन्य ग्रामीण किसानों के साथ मिलकर जैविक खेती से नकदी फसलों का उत्पादन कर रहे हैं।
- विज्ञानी तकनीक से खेती-बागवानी कर रहे प्रगतिशील किसान यशपाल रावत ने गांव में चार हेक्टेयर का बाग तैयार किया है। इसमें अमरूद, अनार, नाशपाती, आडू व अन्य प्रजाति के करीब 12 सौ पौधों का प्लानटेंशन लगाया है।
20812. 10 हजार रुपये में शुरू की काली मिर्च की खेती, आज 17 लाख रुपये होती है कमाई, सरकार से मिल चुका है अवॉर्ड
Contribution of SOCIETY to “Make in India” Self-employment (Atmanibhar)
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Self -Reliance
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India
TV9 Bharatvarsh
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- मेघालय के किसान ने जैविक तरीके से काली मिर्च की खेती कर कृषि में नया मुकाम हासिल किया है. इसके लिए उन्हें पद्मश्री सम्मान से भी नवाजा गया है.
- मेघालय के इस किसान का नाम नानादरो बी. मारक है. नानादरो जैविक विधि से अपने खेतों में काली मिर्च की खेती करते हैं. इन्होंने काली मिर्च के लगभग 3400 पेड़ लगाए. 61 साल के नानादर मारक वेस्ट गारो हिल्स के अग्रणी किसान हैं.
- इन्होंने पहली बार किरामुंडा काली मिर्च की किस्म लगाई जो मध्यम आकार की होती है. उन्होंने 10 हजार रुपये की लागत से खेती शुरू की थी जिसमें उन्होंने लगभग 10 हजार पेड़ लगाए.
20813. लॉकडाउन ने जीना सिखाया, मजदूरी गंवाई तो खेती से नौ लाख कमाया
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Self -Reliance
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Dainik Jagran
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- बोकारो जिले के जरीडीह प्रखंड का टाडबालीडीह गाव। इस गाव में रहते हैं आदिवासी किसान शकर सोरेन पाच एकड़ जमीन के मालिक।
- पिछले साल लॉकडाउन लगा. मजदूरी का काम भी नहीं मिला तो शुरू की सब्जी की जैविक खेती करने लगे। एक वर्ष में ही करीब नौ लाख कमा चुके हैं। गाँव के 10 लोगों को खेती में काम भी दिया है। उनको हर माह चार से पाच हजार रुपये देते हैं। इस आदिवासी किसान शंकर को राज्य सरकार ने राची में मार्च में सम्मानित भी किया है।
- कई सब्जिया जब बाजार में आनी बंद हो जाती हैं तो उनकी कीमत बढ़ती है। हमने ऐसी व्यवस्था बनाकर फसलें तैयार की कि बाजार में उन सब्जियों की आवक बंद होने के बाद भी हम आपूíत कर सकें। लौकी, गोभी, टमाटर, हरी सब्जिया, भिंडी, करेला आदि उगाते हैं।
20814. डिजिटल मार्केटिंग छोड़कर शुरू किया मधुमक्खी पालन का काम, एक साल में ही 20 लाख तक पहुंच गया टर्नओवर
Contribution of SOCIETY to “Make in India” Self-employment (Atmanibhar)
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Agriculture(Organic Farming)
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TV9 Bharatvarsh
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- हरियाणा के किसान नरेश जांग ने. कोरोना संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए लगाए लॉकडाउन के दौरान उन्होंने मधुमख्सी पालन और प्रोसेसिंग का काम शुरू किया. एक साल के भीतर ही टर्नओवर 20 लाख तक पहुंच गया है.
- नरेश जांग खेती-किसान में आने स पहले डिजिटल मार्केटिंग एक्सपर्ट के तौर पर काम करते थे. नरेश ने अपने आप को मधुमक्खी पालन तक ही सीमित नहीं रखा.
- उन्होंने इसके बाइ प्रोडक्ट तैयार करने के लिए एक स्टार्टअप की शुरुआत की. नरेश ने एक कंपनी रजिस्टर्ड करवाया, जिसका नाम रखा स्क्रॉलिंग बी. डिजिटल मार्केटिंग से ताल्लुक रखने वाले नरेश को अपने कंपनी की मार्केटिंग में कोई दिक्कत नहीं आई और जल्द ही कस्टमर्स बढ़ने लगे.
20815. पेटरवार : वैज्ञानिक तकनीक से खेती कर आत्मनिर्भर बन रहे किसान
Innovation and startups, ISRO/Defense/Water infrastructure/EV and other sectors
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Innovations in Bharat
Hindi
India
Hindustan
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- बोकारो : जिले के विभिन्न प्रखंडों के युवा किसान कृषि को व्यवसाय बनाकर वैज्ञानिक तकनीक के सहारे 4 से 5 लाख रुपये प्रति एकड़ सालाना आय प्राप्त कर रहे हैं।
- कृषि विज्ञान केंद्र पेटरवार ने खेती करने के लिए प्रशिक्षण और प्रत्यक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से युवा कृषकों को नई-नई तकनीक से खेती करने का गुर सिखाया।
- नई तकनीक से खेती करने पर कृषकों को अधिक आय प्राप्त होने लगा। नई तकनीकों में टपक सिंचाई तकनीक लोकप्रिय रहा। जिसे अपनाकर युवा किसान काफी लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
20816. Ramagya Group launching B2B E-commerce platform Ramagya Mart
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Startups in Bharat
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India
ANI
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- Ramagya Group is a well-recognized entity with over 36 years of excellence in India. With 20 brands in different verticals under the parent company, Ramagya Group is going to launch its B2B E-commerce platform "Ramagya Mart" shortly.
- The platform will connect manufacturers with the whole-sellers, distributors, and dealers directly.
- The objective of Ramagya Mart is to drive a specific category of Indian manufacturers by offering them a platform to create their wholesale e-marts on the portal and use the platform as an image-building tool to engage with a large diaspora of tier 2 and tier 3 wholesale businesses primarily.
20817. कुकिंग, बेकरी का प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर बन रहे युवक, रामनगर में खाद्य प्रशिक्षण संस्थान करा रहा कोर्स
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Startups in Bharat
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The Better India
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- कुकिंग, बेकरी और केनिंग का हुनर सीखने के बाद युवक आत्मनिर्भर बन दूसरों के लिए भी प्रेरणा का श्रोत बन रहे हैं। यह सब कुछ संभव हो पा रहा है रामनगर के खाद्य प्रशिक्षण केंद्र की मदद से।
- यहां से प्रशिक्षण लेने के बाद युवा आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को साकार कर रहे हैं। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद कुछ युवाओं को जहां प्रतिष्ठानों में जॉब मिल जा रही है वहीं कुछ अपना रोजगार शुरू कर आत्मनिर्भर बन रहे हैं।
- रामनगर से पहले यह प्रशिक्षण केंद्र उत्तराखण्ड में केवल कोटद्वार में ही था। एक केंद्र नैनीताल के मेविला कम्पाउंड में हुआ करता था मगर 2003 में उसे कोटद्वार में स्थित केंद्र में मिला दिया गया था।
20818. 16 किस्म के मशरूम उगाकर हर महीने रु. 5 लाख कमाता है यह किसान
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- राजस्थान के सीकर में मशरूम की खेती करने वाले मोटाराम शर्मा को आज लोग ‘मशरूम किंग’ के नाम से जानते हैं।
- मोटाराम शर्मा अपने मशरूम के खेत में 16 किस्म के मशरूम उगाते हैं, जिनमें ओएस्टर, बटन, पिंक मशरूम, साजर काजू, काबुल अंजाई, ब्लैक ईयर, डीजेमोर, सिट्रो मशरूम, शीटाके जैसी किस्मों के साथ गैनोडर्मा और कार्डिसेप्स मिलिट्री मशरूम जैसी मशहूर किस्में भी शामिल हैं।
- मोटाराम शर्मा की उगाई मशरूम की बाजार में काफी मांग है। अपनी ज्यादातर उपज को वह सीधा बाजार तक पहुँचाते हैं, तो कुछ बची हुई उपज को प्रोसेस करके पाउडर, अचार जैसे खाद्य उत्पाद भी बना रहे हैं।
20819. मालामाल हुए दुबे जी! 100 पेड़ के हैंं मालिक; लाॅकडाउन में भी छाप रहेंं पैसे Dhanabd
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- कालाझार गांव के युवा किसान विष्णुकांत दुबे कृषि को बढ़ावा देने को लेकर युवाओं को कृषि के क्षेत्र में जुड़कर आत्मनिर्भर बनने का संदेश दे रहे है । युवा किसान दुबे ने साइक्लोजी से ऑनर्स तथा विशेष शिक्षा से बीएड की पढ़ाई की है।
- पढाई के साथ पर्यवरण और कृषि पर उनका विशेष ध्यान रहा है। जिसके कारण आज वे कृषि के क्षेत्र में अच्छा मुनाफा कमा रहे है ।
- कृषि के माध्यम से हर वर्ष उन्हें हजारों का मुनाफा होता है। उन्होंने बताया कि बंजर जमीन पर वर्ष 2016 में 50 हजार रुपया खर्च करके 100 आम का पौधा लगाया था, जो 2019 से लगातार फल दे रहा है। और प्रत्येक वर्ष 50 हजार की आमदनी उससे होती है।
20820. Carnivorous Plants बेचने को बनाया पार्ट टाइम बिज़नेस, हर माह कमा लेते हैं 25 हज़ार रुपये
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- केरल के एर्नाकुलम में रहने वाले 28 वर्षीय निर्मल कुमार, पेशे से इंटीरियर डिज़ाइनर हैं और साथ ही, कैक्टस, आर्किड और कीड़े खाने वाले पौधों की गार्डनिंग भी करते हैं।
- उन्होंने आगे कहा कि आज उनके गार्डन में लगभग 800 पौधे हैं, जिनमें से ज्यादातर पौधे कीटाहारी हैं। उन्होंने कुछ कीटाहारी पौधे (Carnivorous Plants), शिमला की नर्सरी से ख़रीदे हैं और कुछ पौधे, अलग-अलग प्रकृति प्रेमियों से मंगवाए हैं।
- नए पौधे खरीदने के साथ, वह पुराने पौधों को कटिंग से भी लगाते हैं। अपने गार्डनिंग के बारे में जानकारी साझा करने के लिए, उन्होंने अपना फेसबुक पेज और यूट्यूब चैनल, Nandanam Exotics भी शुरू किया।