| Jan 01, 1970 | Daily Report |
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20701. दिल्ली: लॉकडाउन में पति की नौकरी गई, तो कार को स्टॉल बना पत्नी बेचने लगीं बिरयानी
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- रजनी और उनके पति दिल्ली में रोहिणी कोर्ट के पास बिरयानी का स्टॉल लगाते हैं। दरअसल ये पूरी तरह से एक स्टॉल भी नहीं है। इन्होंने अपनी कार को स्टॉल बना दिया है। इसी कार पर रजनी बिरयानी बेचती हैं और अपने घर के खर्चों को पूरा करती हैं।
- रजनी सुबह 5 बजे उठ जाती हैं। बिरयानी तैयार करने में 4 – 4.30 घंटे लग जाते हैं। वह ग्राहकों को बिरयानी के साथ चाप और तड़के वाला रायता भी देती हैं। कोरोना संक्रमण के बाद स्वच्छता को लेकर हर कोई सजग है। बिरयानी बनाने से लेकर ग्राहकों तक उसे पहुँचाने में वह स्वच्छता का पूरा ध्यान रखती हैं। रजनी 10 बजे अपनी गाड़ी लेकर पश्चिम विहार से करीब 9 किलोमीटर की दूरी पर स्थित रोहिणी कोर्ट पहुँच जाती हैं।
- सड़क किनारे उनका स्टॉल लग जाता है। 3 बजे तक उनकी पूरी बिरयानी बिक जाती है। यहाँ भी साफ सफाई का पूरा ध्यान रखा जाता है। इस पूरे काम में रोहित पूरा साथ देते हैं। रोहित पहले कॉसमेटिक इंडस्ट्री में काम करते थे। नौकरी जाने के बाद जब रजनी ने उन्हें यह आइडिया दिया तो झट से तैयार हो गए। इसके बाद दोनों ने मिलकर काम शुरू कर दिया।
20702. यूट्यूब से आया आइडिया तो पड़ोसियों से उधार लेकर, घर में एक कमरे से शुरू किया मसाला पैकिंग का काम, हर महीने 45 हजार कमाई
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- जयपुर के अमित कुमार ने जब धंधा शुरू करने का सोचा तब जेब में महज दस हजार रुपए थे, कहते हैं, जिनसे पैसे लिए थे, उनके पैसे वापस कर दिए और अब मेरे पास की खुद की मशीनें हैं
- अमित के माता-पिता और बेटा भी उनके साथ में काम में हाथ जुटाते हैं, पत्नी घर का कामकाज करती हैं, मां ब्लिस्टर में मटेरियल भरतीं हैं, अमित मशीन में उसे पैक करते हैं, बेटा पैकेट एक जगह पर रखता है
- अमित कहते हैं, पिछले डेढ़ साल में औसत कमाई की बात करें तो हर माह 40 से 45 हजार रुपए की कमाई हुई है। अमित ने अब बर्तन साफ करने वाले स्क्रब की मशीन भी खरीद ली है, जो साढ़े तीन लाख रुपए की आई है। इसमें स्क्रब तैयार करेंगे। इसकी पैकिंग मसाले वाली मशीन से ही हो जाती है। कहते हैं, जिनसे पैसे लिए थे उनके पैसे वापस कर दिए।
20703. चेन्नई की निशा रामासामी बच्चों के लिए लकड़ी से बना रही हैं डेवलपमेंटल खिलौने, पांच साल पहले अपनी तीन महीने की बेटी की खातिर शुरू किया था ये काम
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- उनके बनाए प्रोडक्ट अमेजन और फ्लिपकार्ट सहित 20 प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं
- फिलहाल निशा के इस स्टार्ट अप से 200 कारीगरों को रोजगार मिल रहा है
- तब निशा ने नीम की लकड़ी से शिशु के लिए टीथर और रेटल्स बनाना शुरू किया। निशा के अधिकांश मिलने-जुलने वाले लोग भी पैरेंट्स हैं। उन्हें निशा का ये क्रिएशन बहुत पसंद आया। उन्होंने अपने बच्चों के लिए भी निशा को इसी तरह के खिलौने बनाने के ऑर्डर दिए। यहीं से निशा के फाउंडेशन 'अरिरो वुडन टॉयज' की शुरुआत हुई। निशा ने पति वसंत के साथ मिलकर 2018 में इसे शुरू किया।
20704. कोविड ने छीनी एयरलाइन की नौकरी, पर नहीं मानी हार, घर से शुरू किया फूड डिलीवरी बिज़नेस
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- अपनी कुछ सेविंग और पिता से कर्ज से लेकर राहुल ने एक रसोई घर बनाया। राहुल अपने बंगले के ग्राउंड फ्लोर में रहते हैं, जबकि उनके छत पर दो कमरे बने हुए हैं। इसके एक कमरे में घर के जरूरी सामान रखे गए हैं और दूसरे का इस्तेमाल भंडारण के लिए किया जाता है। राहुल ने यहीं से अपने कारोबार को शुरूआत की।
- राहुल ने अपने फूड डिलीवरी सर्विस का नाम ‘शेफ सिटी’ रखा और अगस्त के पहले सप्ताह से सेवाएं शुरू कर दी।.
- विमान कंपनियों में काम के दौरान अपने अत्यधिक व्यस्त जीवनचर्या के मुकाबले, इन दिनों राहुल की जिंदगी बिल्कुल अलग है।इस विषय में राहुल बताते हैं, “मैं सुबह 6 बजे उठता हूँ, फिर दौड़ने या साइकिल चलाने जाता हूँ। इसके बाद, किसी दिन सब्जियाँ या अन्य सामग्रियों को खरीदने की जरूरत होती है। फिर 10 बजे तक, मैं खाने को बनाने के लिए सब्जियाँ उबालने, ग्रेवी बनाने आदि का काम पूरा करता हूँ।”राहुल बताते हैं कि उनके पास एक हेल्पर है, जिसे व्यंजनों के बारे में अच्छी जानकारी है और दोनों मिलकर खाना बनाते हैं।
20705. चाय की दुकान छोड़ शुरू की एलोवेरा की खेती, अब 47 तरह के उत्पाद बनाते हैं राजस्थान के अजय
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- राजस्थान के हनुमानगढ़ जिला के परलीका गाँव में रहने वाले 31 वर्षीय अजय स्वामी पिछले 12 साल से एलोवेरा की खेती कर रहे हैं। खेती करने के साथ -साथ अजय इसकी प्रोसेसिंग भी करते हैं और खुद अपने उत्पाद तैयार करके बाज़ार में बेचते हैं। उनके उत्पाद ‘नैचुरल हेल्थ केयर’ के नाम से लगभग 20 अलग-अलग कंपनियों को जा रहे हैं।
- अपनी खेती और प्रोसेसिंग के काम से आज लाखों में कमाने वाले अजय ने कभी अपनी शुरूआत मात्र 10 रुपये दिन की कमाई से की थी। बचपन में ही पिता का साया सिर से उठ गया और विरासत में मिला जीवन का संघर्ष और केवल दो बीघा ज़मीन।
- उन्होंने सामान्य पानी की बोतल में एलोवेरा का जूस भरकर बेचना शुरू किया। एक से दो, दो से चार, चार से दस बोतलें तैयार हुईं और ऐसे करते-करते उनका यह प्रोसेसिंग का काम जम गया। उनके उत्पादों को एक-दो कंपनियाँ खरीदने भी लगीं। इसके बाद, उन्होंने अपनी चाय की दुकान बंद करके सिर्फ खेती और प्रोसेसिंग पर ध्यान दिया। अपनी खेती के सिलसिले में कृषि विज्ञान केंद्र भी जाने लगे। यहाँ से भी उन्हें और अलग-अलग उत्पाद जैसे साबुन, क्रीम बनाने के बारे में जानकारी मिली।
20706. किसानों ने अभिशाप को बनाया वरदान, अब सफेद रेत पर हरा सोना उगाकर हो रहे मालामाल, तस्वीरें
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- पहले उपजाऊ भूमि में रेत भर जाने से किसान खेती से मुंह मोड़ने लगे थे, लेकिन किसान अब नई तकनीक से खेती करने लगे हैं। जिससे सफेद रेत में हरी सब्जियों व रेत पर उगने वाली फसल से वे अच्छी कमाई कर रहे हैं। कछार की मिट्टी में न तो अधिक खाद की जरूरत होती है न ही सिंचाई की। बाढ़ के इस अभिशाप को कछार के किसानों ने अपने लिए वरदान बना लिया है।
- दो माह पूर्व जहां 15 से 20 फीट तक बाढ़ का पानी भरा था जिसमें किसानों की हजारों बीघा धान, गन्ना आदि फसल बर्बाद हो गई थी, आज उन्हीं सफेद रेत वाला खेतों को हरा सोने की खदान में बदलने के लिए संसाधन जुटाने और संवारने में किसान अपना पसीना बहा रहे है। यहां नवंबर माह से खेती का काम शुरु होकर मई माह में खत्म हो जाता है।
- नदी के रेत में बड़े स्तर पर तरबूज व खरबूजा की फसल लगाई जाती है फसल तैयार होने पर कई जिले के व्यापारी ट्रक द्वारा ले जाते हैं। दो जिलों की सीमा पर बसा गांव गुनौली निवासी पांचवी जमात तक पढ़े कालीप्रसाद व सीताराम कहते हैं कि खरबूजे की खेती ने उनके बैंक के खाते को भी वजनी कर दिया है, कहते हैं कि हसरत से हौसला है और हौसले से ही उड़ान होती है।
20707. दिल्ली से मां को केक की रेसिपी भेजती, मां जम्मू में केक बनाकर रिश्तेदारों को गिफ्ट करतीं; इसी बेकरी से 50 हजार रु महीना कमाई
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- दिल्ली में मोटी तनख्वाह वाली नौकरी करती थीं तान्या, जनवरी में खुद का बिजनेस करने लौट आईं, अपने घर के किचन को ही वर्कशॉप में बदला
- लॉकडाउन में फेसबुक-इंस्टाग्राम पर पेज बनाकर बेकरी आइटम्स को प्रमोट करना शुरू किया, ऑनलाइन और फोन पर ऑर्डर आने लगे
- तान्या के 'द बेकिंग वर्ल्ड ' पर अब केक के अलावा पेस्ट्री, कप केक, ब्राउनी, कुकीज जैसे बेकरी आइटम्स भी ऑर्डर पर तैयार किए जाते हैं। तान्या के पिता एक बिजनेसमैन और मां हाउसवाइफ हैं। मां केक मेकिंग में उन्हें सपोर्ट करती हैं, हालांकि रेसिपी तान्या की होती है।
20708. After Son Misses Desserts, Mumbai Parents Launch Amazing 100% Vegan Ice Creams
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- Samir and Hemali from Mumbai turned vegans two decades ago and raised their children as vegans. Here’s how they found alternatives to everything, including ice cream
- The decision to turn vegan was not easy for Mumbai-based Samir Pasad, the founder of Vegan Bites and Nomou, and his father. As vegetarians, their diet was heavily dairy dependent and since they made the decision to go vegan virtually overnight, twenty years ago, it meant their food choices became extremely limited. Vegans are people who refrain from consuming meat, eggs, dairy products, and any other animal-derived substances.
- Their initial guinea pigs were their own children and relatives who gave genuine feedback to help them develop a vegan ice cream closest to a conventional one. They also got reviews from customers who were offered ice creams along with their catered meals.
20709. महाराष्ट्र: पपीता-तरबूज की खेती कर लाखों कमाता है यह किसान, 50 अन्य को किया प्रेरित
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- महाराष्ट्र के बीड जिले के पराली तालुका के नंदगौल गाँव के संदीप गिते ने सूखाग्रस्त क्षेत्र में विपरीत परिस्थितियों खेती कर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।
- संदीप बताते हैं कि जैविक विधि से खेती करने में परम्परागत शैलियों के मुकाबले काफी कम पानी की जरूरत होती है और खर्च में भी कम होता है।
- संदीप फिलहाल, 20 टन पपीते की खेती करते हैं और उनके उत्पादों की आपूर्ति राज्य के कई हिस्सों में की जाती है।
20710. Kerala Man’s New Jackfruit Flour Helps Control Diabetes, Bags National Award
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- Jackfruit is now clinically proven to reduce blood sugar levels and help reverse diabetes. According to a study published by the American Diabetes Association, it brings down glycosylated haemoglobin (HbA1c), fasting blood glucose (FBG), and postprandial glucose (PPG).
- The conclusion of the study is based on a randomized, double-blind design where 20 of the 40 participants with type 2 diabetes (T2DM) were given 30 grams of green flour made from jackfruit for three months. The rest used regular wheat or rice flour to make rotis or idlis.
- At the end of the study, that was approved by the Indian Council of Medical Research (ICMR), it was found that people who mixed flour in their idli batter or wheat dough showed improvement in their plasma glucose levels.