| Jan 01, 1970 | Daily Report |
| RISING BHARAT | News Count (102271) | |
22631. Coronavirus India HIGHLIGHTS: भारत दुनिया का सबसे अच्छा वैक्सीन उत्पादक, अपने संसाधनों को पूरी क्षमता के साथ इस्तेमाल करे, अमेरिका के महामारी विशेषज्ञ का सुझाव
- An IAS officer-turned-actor Abhishek Singh has launched an online portal 'Unitedbyblood' to streamline the plasma donation process and an oxygen taxi for refilling the empty oxygen cylinders. The portal, launched a week ago, was founded with an aim to create a repository for plasma by establishing real-time and seamless contact between donors and recipients.
- On the online portal, the recipient and donor are required to fill a one-page form, where they give details like name, phone number and location is captured automatically. 'Oxytaxi' project is for oxygen cylinders. Under the project, a volunteer team delivers 100 oxygen cylinders to people in need every day.
- The required information for availing of the service is an SpO2 level reading, a prescription from a doctor and an empty cylinder. The 'Oxytaxi' team will give a filled cylinder and take the empty cylinder from the patient.
22632. Indian Railways: डंपयार्ड को साफ़ कर उस ज़मीन पर सब्ज़ियाँ उगा रहा है रेलवे स्टाफ
- लॉकडाउन के दौरान भारतीय रेलवे स्टाफ ने डंपयार्ड की तरह इस्तेमाल हो रही इस ज़मीन को साफ़ कराकर 6-7 तरह की सब्ज़ियों के बीज लगाए थे!
- बेंगलुरु डिवीज़न के बंगारपेट रेलवे स्टेशन पर रेलवे अधिकारियों और कर्मचारियों ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम उठाया है। रेलवे स्टेशन की एक जगह को डंपयार्ड की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था। लॉकडाउन के दौरान अधिकारियों ने इस जगह को एक नया रूप देने पर विचार किया और अब यहाँ एक सुंदर सा किचन गार्डन है, जहाँ कई तरह की सब्जी उगाई जा रही है।
- लगभग 50×20 फीट की इस ज़मीन को पहले नगर निगम की मदद से खाली कराया गया। कचरे को हटाया गया और फिर यहाँ पर गार्डन लगाने की तैयारी हुई। रेलवे कर्मचारियों में जिन्हें भी थोड़ी -बहुत कृषि के कामों की या गार्डनिंग की जानकारी थी, उन्हें इस प्रोजेक्ट से जोड़ा गया। यह ज़मीन भले ही कूड़े-कचरे से भरी थी लेकिन काफी उपजाऊ है।
- उन्होंने आगे बताया कि इस किचन गार्डन के अलावा भी, बंगारपेट रेलवे और भी कई प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है जैसे ग्राउंड वाटर रिचार्ज के लिए एक जगह तालाब बनाया जा रहा है और रेलवे कॉलोनी में मियावाकी जंगल भी लगाया जा रहा है। “ये सभी प्रोजेक्ट्स अभी चल रहे हैं, पूरे नहीं हुए हैं। जैसे ही ये पूरे होंगे डिपार्टमेंट की तरफ से इनके बारे में भी जानकारी साझा की जाएगी,” उन्होंने आगे कहा।.
22633. किसान ने बनाया ट्रॉली वाला सोलर पैनल सिस्टम, ट्रैक्टर से कहीं भी ला-ले जा सकते हैं
- 1. अनोखे सोलर ट्रॉली को डिज़ाइन और डेवलप किया है हरियाणा के एक किसान प्रदीप कुमार ने। हिसार में पेटवाड़ गाँव में रहने वाले प्रदीप ने 12वीं तक पढ़ाई की है और इसके बाद, वह अपने पिता के साथ खेती करने लगे। 4.5 एकड़ पुश्तैनी ज़मीन पर खेती के साथ-साथ उन्होंने सोचा कि क्यों न कोई व्यवसाय भी किया जाए।
- 2. अनोखे सोलर ट्रॉली को डिज़ाइन और डेवलप किया है हरियाणा के एक किसान प्रदीप कुमार ने। हिसार में पेटवाड़ गाँव में रहने वाले प्रदीप ने 12वीं तक पढ़ाई की है और इसके बाद, वह अपने पिता के साथ खेती करने लगे। 4.5 एकड़ पुश्तैनी ज़मीन पर खेती के साथ-साथ उन्होंने सोचा कि क्यों न कोई व्यवसाय भी किया जाए।
- 3. प्रदीप को इसकी मार्केटिंग करने में भी ज्यादा दिक्कत नहीं हुई। वह बताते हैं कि उन्हें पिछले साल अक्टूबर में हुए हिसार एक्सपो के दौरान बहुत प्रसिद्धि मिली। अलग-अलग लोगों ने उनके इस सोलर ट्रॉली के वीडियो बनाए क्योंकि सभी के लिए यह अनोखा था। बाद में उन्होंने अलग-अलग गाँव में जाकर भी अपने सोलर ट्रॉली को दिखाया है। अब वह अपनी कंपनी, TG सोलर पंप के नाम से इसे ग्राहकों तक पहुँचा रहे हैं।
- 4. प्रदीप कहते हैं कि उनकी सोलर ट्रॉली हरियाणा के अलावा उत्तर-प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, झारखंड और ओडिशा आदि में सप्लाई हो रही है।
22634. Meet the 14-year-old teen who has designed a sanitiser kit for sterilising vegetables
- 1. Aditya Pachpande, a class XI student of Indus International School in Pune has developed a sanitiser kit that resolves one of the most daunting challenges that households face presently – of decontaminating vegetables.
- 2. The young boy, whose role model is Elon Musk, the chief designer of SpaceX, already has a patent for the kit. He recently received a note from the Council of Scientific and Industrial Research Institute, an autonomous body known for its ground-breaking R & D. The letter stated that the product can be used for UV-C sterilisation activities.
- 3. Fourteen-year-old Aditya who has been distributing the product completely free of cost in vegetable markets at Dadar in Mumbai, said that the sanitiser kit resolves one of the most daunting challenges that households are facing presently – of decontaminating vegetables (on which neither soap nor alcohol-based sanitisers can be applied).
- 4. Once Aditya receives the final evaluation report from CSIR-CMERI, he is looking forward to making over 1,000 such similar sanitisation boxes and distributing them to the economically weaker sections of society.
22635. Meet IIT-M’s Moushik: A Giant Leap on India’s Road to Tech Independence
- 1. Researchers at the Indian Institute of Technology (IIT), Madras have created a completely open-source microprocessor, the first of its kind to be made in India. Moushik, named for its small size, is special in many ways and is a crucial step in our country’s journey to self-sufficiency in technology.
- 2. A microprocessor, which can be thought of as a tiny CPU – tinier than the width of a human hair – has a wide range of applications. It is an essential component of credit cards, washing machines, phones, computers, drones, televisions, cars, elevators – pretty much anything that uses electronics for its functioning.
- 3. At the moment, the microprocessors used in these products are made by private manufacturers from countries like the US, China, Taiwan, and South Korea. The problem with this is that they are black boxes, meaning their workings are closed to us at some level or the other. In certain cases, the architecture is known only to the designers. In others, the code through which the microprocessor controls the devices is hidden.
- 4. This limits how flexibly we can use the processor, but an even bigger issue is the inherent security risk. There’s no way of knowing if any information is being collected or how secure the software is against hacking. A bad idea, especially when it comes to sensitive devices like credit cards, surveillance equipment and military devices.
- 5. Moushik removes these concerns by being open-source. Even its communication in 1s and 0s with the machines it controls is entirely transparent – written in an internationally understood machine assembly language called RISC-V. Moushik’s transparency makes it super-safe for anyone to use.
22636. झारखंड: कारोबार बंद हुआ तो इस युवक ने कर दिया ‘मैजिक बल्ब’ का आविष्कार
- झारखंड के कामदेव जमशेदपुर में इमरजेंसी लाइट बेचने का काम करते थे, लेकिन इसी कड़ी में उन्होंने हाथ के छूने से जलने वाले बल्ब से लेकर सेंसर और रिमोट से जलने वाले बल्ब का आविष्कार कर दिया।
- सरायकेला कॉलेज से भौतिकी में मास्टर्स करने वाले कामदेव ने द बेटर इंडिया को बताया, “मुझे बचपन से ही इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से खास लगाव रहा है। मैं इसी क्षेत्र में कुछ करना चाहता था। लेकिन, घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। जिस वजह से 2011 में 10वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद मुझे रोजगार के लिए बेंगलुरु जाना पड़ा।”
- इस मॉडल विकसित करने में कामदेव के महज 7 हजार रुपए खर्च हुए। लोगों को यह काफी पसंद आया, जिसके बाद उन्होंने इस डिजाइन के 70 से अधिक साइकिल तैयार किये।
22637. भारत दुनिया में ककड़ी और खीरे का सबसे बड़ा निर्यातक बनकर उभरा
- भारत ने अप्रैल-अक्टूबर 2021 से 114 मिलियन अमरीकी डॉलर मूल्य के खीरे का निर्यात किया, जबकि 2020-21 में निर्यात 200 मिलियन अमरीकी डॉलर से अधिक हुआ। भारत ने अप्रैल-अक्टूबर (2020-21) के दौरान 114 मिलियन अमरीकी डॉलर के मूल्य के साथ 1,23,846 मीट्रिक टन ककड़ी और खीरे का निर्यात किया है।
- खीरे को वर्तमान में 20 से अधिक देशों को निर्यात किया जाता है, जिसमें प्रमुख गंतव्य उत्तरी अमेरिका, यूरोपीय देश और महासागरीय देश जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, स्पेन, दक्षिण कोरिया, कनाडा, जापान, बेल्जियम, रूस, चीन, श्रीलंका और इजराइल हैं।
- एक खीरा किसान प्रति फसल 4 मीट्रिक टन प्रति एकड़ का उत्पादन करता है और 40,000 रुपये की शुद्ध आय के साथ लगभग 80,000 रुपये कमाता है। खीरे में 90 दिन की फसल होती है और किसान वार्षिक रूप से दो फसल लेते हैं। विदेशी खरीदारों की आवश्यकता को पूरा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किए गए हैं।
Click here to find 860 similar incidents of Bharat Economic Growth -> Increasing Exports
22638. मिलें उस शख्स से जिसने बेंगलुरू में झीलों को फिर से जीवित करने के लिए छोड़ दी नौकरी Inspiration
- आनंद मल्लिगावड ने कार्रवाई करने का फैसला किया। वह 2017 से शहर में झीलों को फिर से जीवंत करने के लिए काम कर रहे हैं और अब तक 12 झीलों को पुनर्जीवित कर चुके हैं। उत्तरी कर्नाटक के कोप्पल जिले के एक छोटे से गाँव के रहने वाले, आनंद मल्लिगावड ने अपना अधिकांश समय प्रकृति और उससे सीखने के बीच बिताया क्योंकि उनका स्कूल एक झील के किनारे स्थित था।
- मेरे पास 1 करोड़ रुपये का बजट था, जो संसेरा इंजीनियरिंग (Sansera Engineering) का CSR फंड था जहां मैंने तब काम किया था। इसे ध्यान में रखते हुए, मैंने गणना की और पाया कि हम लागत कहां कम कर सकते हैं। हमने ज्यादातर प्राकृतिक सामग्री, मिट्टी, और झील से बजरी ही बांध और अलगाव बनाने के लिए काम में ली।
- 20 अप्रैल, 2017 को संसेरा फाउंडेशन द्वारा प्रदान किए गए 1 करोड़ और 17 लाख के बजट के साथ काम शुरू किया। हमने 5 जून को प्रोजेक्ट पूरा किया। 1 घंटे 45 मिनट में करीब 5,500 पौधे लगाए गए। जो स्वयंसेवक आए, उन्होंने इस बात का प्रचार-प्रसार करना शुरू कर दिया और अधिक लोग मेरे पास पहुंचने लगे।
22639. IIT Delhi Innovation: बोतल में पानी डालते ही खत्म हो जाएंगे जीवाणु-कीटाणु , IIT दिल्ली ने विकसित की तकनीक
- 1. प्रौद्योगिकी संस्थान ने एक बोतल तैयार किया है जो जीवाणु-कीटाणु को खत्म कर सकेगा। आइआइटी दिल्ली-इनक्यूबेटेड स्टार्टअप नैनोसैफ सॉल्यूशंस ने नैनो-टेक्नॉलॉजी और पारंपरिक विज्ञान के मिश्रण से पानी की यह बोतल तैयार की है। बोतल तांबे के एंटीमाइक्रोबियल गुणों पर आधारित है। इसे एक्यूक्योर (AqCure) नाम दिया गया है।
- 2. आइआइटी पदाधिकारी ने बताया कि पानी की बोतल एंटीवायरल, जीवाणुरोधी और एंटिफंगल हैं। इसमें पॉलीमर मैट्रिक्स से सक्रिय नैनो-तांबा निकलता है। निकलने वाला तांबा कंटेनर के बाहरी और आंतरिक सतह को एंटीवायरल बनाता है। सीधे संपर्क पर यह किसी भी तरह के जीवाणु और कीटाणु को कम या खत्म करता है। साथ ही संग्रहण किए गए पानी सुरक्षित बनाता है।
- 3. यह एक पेटेंट तकनीक है जिसमें पॉलीमर मैट्रिक्स से संयमित तरीके से सक्रिय नैनो-तांबा उत्सर्जित होता है। उत्सर्जित तांबा कंटेनर के बाहरी और आंतरिक सतह को एंटीवायरस बनाता है, जो सीछे संपर्क पर रोगाणुओं के संचरण को कम करता है और पानी को सूक्ष्मजीव विज्ञानी रूप से सुरक्षित बनाता है।
22640. वृद्धाश्रम के निर्माण के लिए डॉक्टर ने दान कर दी 5 करोड़ की जमीन, पूरी की पत्नी की आखिरी इच्छा
- 72 वर्षीय राजेंद्र कंवर रिटायर्ड डॉक्टर हैं और उनकी पत्नी कृष्णा कंवर का देहांत करीब एक साल पहले हो गया था। राजेंद्र कंवर और कृष्णा कंवर की कोई संतान नहीं है और कृष्णा कंवर ने यह फैसला लिया था कि वे अपनी सारी संपत्ति को सरकार के नाम कर देंगे।
- डॉक्टर राजेंद्र कंवर ने बताया है कि ऐसे तमाम लोग होते हैं जिनको उनके बुढ़ापे में घर से बेदखल कर दिया जाता है या अन्य वजहों से भी उनके पास आसरे के लिए छत नहीं होती है। ऐसे में वे चाहते हैं कि अब सरकार को दे दिये गए उनके आलीशान घर में एक वृद्धाश्रम का संचालन हो।
- राजेंद्र कंवर ने साल 1974 में शिमला के स्नोडेन अस्पताल से अपनी एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की थी और साल 1977 में उन्होने भोरंज स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से अपने मेडिकल करियर की शुरुआत की थी। फिलहाल राजेंद्र कंवर जोलसप्प्ड स्थित अपने घर पर ही मरीजों का इलाज करते हैं।