| Jan 01, 1970 | Daily Report |
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22581. दो महिलाओं की पहल:बेंगलुरु की शैला गुरुदत्त और लक्ष्मी भीमाचार ने आईबीएम की नौकरी छोड़ी, बिजनेस की शुरुआत कर बनाए ऐसे बर्तन जिन्हें खा भी सकते हैं
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Karnataka
Dainik Bhaskar
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- 1. इनकी कंपनी का नाम एडिबल-प्रो है, जो इको फ्रेंड्ली और जीरो वेस्ट खाने योग्य कटलरी बनाती है।
- 2. इसमें कांटे, छुरी, चम्मच, प्लेट, कटोरी के अलावा 80 से अधिक प्रोडक्ट बनाए जाते हैं। इनकी कीमत सामान्य ही है जिसमें खाने की प्लेट और कटोरी भी एक मीठी डिश होती है।
- 3. बेंगलुरु में एफएसएसएआई प्रमाणित प्रयोगशाला द्वारा कटलरी के नमूनों को मंजूरी मिलने के बाद ही उन्होंने आधिकारिक तौर पर कंपनी पंजीकृत कराई।
- 4. सभी उत्पाद बाजरा, अनाज, दाल और मसालों से बने हैं और सीधे स्थानीय किसानों से लिए जाते हैं।
22582. IIT मद्रास के पुर्व छात्र ने बनाया अनोखा अस्पताल, फोल्ड करके कहीं भी ले जा सकते हैं
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Tamil Nadu
The Better India
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- 1. इस स्टार्टअप ने एक ऐसा हॉस्पिटल यूनिट डिज़ाइन किया है जिसे फोल्ड किया जा सकता है और कहीं भी लाया ले जाया सकता है।
- 2. ख़ास बात है कि इस यूनिट को चार लोग मिलकर दो घंटे के अन्दर कहीं भी सेट-अप कर सकते हैं। इसका नाम मेडीकैब (MediCAB) है।
- 3. इस इनोवेटिव आइडिया को हकीकत बनाने वाले स्टार्ट-अप का नाम है मोडयुल्स हाउसिंग सोल्यूशन। यह IIT मद्रास के एक पूर्व छात्र का स्टार्टअप है। कोरोना काल में दूरगामी क्षेत्रों के लिए यह बहुत ही बेहतर साधन साबित हो सकता है।
- 4. सीईओ श्रीराम रविचंद्रन बताते हैं कि यह फोल्डेबल पोर्टेबल अस्पताल चार जोन में बना है जिसमें एक डॉक्टर का कमरा, एक आइसोलेशन रूम, एक मेडिकल रूम / वार्ड और एक ICU शामिल हैं।
22583. किसानों के लिए औज़ार बनाते हैं यह दसवीं पास इनोवेटर, तिपहिया ट्रैक्टर के लिए मिला अवार्ड!
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Gujarat
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- 1. गुजरात में अमरेली के रहने वाले 40 वर्षीय उपेंद्र भाई राठौर पिछले लगभग 15 सालों से किसानों के लिए उनकी ज़रूरत के हिसाब से औज़ार बना रहे हैं।
- 2. उपेंद्र भाई ने बुलेटसांती को और थोड़ा एडवांस करके इसे सनेडो ट्रेक्टर का रूप दिया। यह एक तिपहिया ट्रेक्टर है जो किसानों के लिए काफी मददगार है, खासतौर पर छोटे किसानों के लिए।
- 3. उपेंद्र भाई बताते हैं कि उनके इस ट्रेक्टर की मांग भारत के साथ-साथ अफ्रीका जैसे देशों में भी है।
- 4. इसकी कीमत 1 लाख 37 हज़ार रुपये से 1 लाख 60 हज़ार रुपये के बीच है।
22584. आंध्र-प्रदेश के राजेंद्र प्रसाद का अनोखा आविष्कार, मटके को बिना छुए निकाल सकते हैं पानी!
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Andhra Pradesh
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- 1. आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में रहने वाले 34 वर्षीय राजेंद्र प्रसाद द्वारा बनाए गए ‘पेडल वाटर टैप’ की हर जगह सराहना हो रही है। कुछ दिन पहले, जल शक्ति मंत्रालय ने भी सोशल मीडिया पर इस बारे में पोस्ट करते हुए उनकी तारीफ़ की।
- 2. ‘वाटर पेडल टैप’ से आपको मटके या फिर किसी भी पानी के बर्तन को छूने की ज़रूरत नहीं है। आप सिर्फ अपने पैर से टैप करके पानी ले सकते हैं।
- 3. इसे चलाने के लिए बिजली की ज़रूरत नहीं है, यह सौर ऊर्जा पर काम करता है। एक दिन में आपको इससे 500 से 700 लीटर शुद्ध पानी मिल सकता है।
- 4. लॉकडाउन में उन्होंने ‘वाटर पेडल टैप’ के अलावा पॉट सोलर वाटर प्यूरीफायर भी तैयार किया है। इसकी कीमत महज 5200 रुपये है। वहीं ‘वाटर पेडल टैप’ को आप 700 रुपये में खरीद सकते हैं।
- 5. 15 वाटर पेडल टैप सिस्टम आंध्र-प्रदेश और ओडिशा बॉर्डर पर रहने वाले आदिवासियों के यहाँ मुफ्त में लगा रहे हैं।
22585. नारियल किसानों के लिए आय का नया जुगाड़, बनाई एक मिनट में पानी ठंडा करने वाली सस्ती मशीन!
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Karnataka
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- 1. ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई करने वाले विनोद ने एक ऐसी मशीन का आविष्कार किया है, जिससे एक मिनट में ही नारियल का पानी ठंडा हो जाता है। उन्हें उनके आविष्कार के लिए दो-दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है।
- 2. विनोद ने नारियल को तोड़ने से लेकर उसे तुरंत ठंडा करने वाली मशीन विकसित की है, जिसका लाभ अब स्थानीय किसानों को भी मिल रहा है।
- 3. विनोद का कहना है कि उनका यह आविष्कार किसानों की आमदनी बढ़ाने में कारगर है।
- 4. विनोद नारियल आधारित खाद्य उत्पादों जैसे कि ठंडा नारियल पानी, नारियल आइसक्रीम, नारियल जेली बेचते हैं।
22586. IIT-Kharagpur researchers develop ultra-low-cost device for rapid Covid-19 detection
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English
West Bengal
Indian Express
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- 1. In a unique effort, researchers at IIT-Kharagpur have developed a first-of-its-kind portable rapid diagnostic device that can detect Covid-19 within an hour.
- 2. This test can be conducted for less than Rs 400 per test, after taking all components of expenses and business model into account.
- 3. The results can then be accessed from a customised smartphone application, without requiring manual interpretation.
- 4. The project received financial support from the institute in late April as Prof. V K Tewari, Director, IIT Kharagpur, decided to set up a fund to support Covid-19 related research and product development.
22587. पर्यावरण बचाने की सराहनीय पहल:मदुरैई के एक चाय बेचने वाले की कहानी, प्लास्टिक वेस्ट से बचने के लिए ग्राहकों को बिस्किट से बने कप में सर्व करते हैं चाय
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Tamil Nadu
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- 1. इस टी सेलर ने चाय सर्व करने के लिए बिस्किट से कप का इस्तेमाल किया है।
- 2. चाय देने के लिए प्लेन से लेकर चॉकलेट फ्लेवर वाले कपों की वैरायटी इस दुकान में देखी जा सकती है।
- 3. इस चाय को लोगों के बीच कितना पसंद किया जाता है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां रोज 500 कप की खपत होती है। इस टी स्टॉल के मालिक विवेक सबापथी हैं।
- 4. उनकी एक कप चाय की कीमत 20 रुपए होती है। वे अपने ग्राहकों को बिस्किट वाले कप में चाय देते हैं। चाय पीने के बाद लोग ये कप भी खा लेते हैं।
22588. कमाल का किसान: पहले बनाई मक्का के दाने निकालने की मशीन और फिर मक्का से बनाया दूध
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Tamil Nadu
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- 1. हरियाणा में यमुनानगर के दामला गाँव में रहने वाले किसान अन्वेषक धर्मबीर कंबोज ने सालों पहले मल्टी-पर्पस प्रोसेसिंग मशीन इजाद की थी। उनकी इस मशीन से किसी भी फसल जैसे एलोवेरा,आंवला, तुलसी, आम, अमरुद आदि को प्रोसेस कर सकते हैं।
- 2. “मक्के की प्रोसेसिंग में इसके दाने निकालना सबसे मुश्किल काम है। इसलिए मैंने सबसे पहले यह मशीन बनाई, जिसकी लागत 20 हज़ार रुपये आई है। चीन में ऐसी ही मशीन ढाई लाख रुपये से ज्यादा कीमत की है।“
- 3. धर्मबीर कहते हैं कि उन्होंने मक्की का दूध बनाने की सोची। इसका आईडिया उन्हें कॉर्न स्टार्च से मिला।
- 4. वह बताते हैं कि उन्होंने एक 200 मिली की बोतल को 20 रुपये में बेचा।
22589. 600 से अधिक देशी बीज किए विकसित, 9वीं पास किसान ने तोड़े कई विश्व रिकॉर्ड।
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- 1. जय प्रकाश सिंह अन्य किसानों की तरह ही एक सामान्य किसान हैं। इन्होंने धान की 460, गेहूं की 120 और दालों की 30 किस्में विकसित की हैं।
- 2. उनके द्वारा विकसित गेहूं के बीज की एक किस्म से 79 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की उपज होती है।
- 3. इसी तरह धान का बीज (HJPW157) जीरा की तरह दिखता है और साइज़ में काफी छोटा है। यह 130 दिनों में पक कर तैयार हो जाता है और सिंचाई की भी कम जरूरत पड़ती है।
- 4. उन्होंने एक खास तरह का वुड एप्पल या बेल भी उगाए हैं। इसके एक ही गुच्छे में 8-10 फल लगते हैं। वह गरीब किसानों के लिए इसकी पैदावार बढ़ा रहे हैं।
22590. माँ की परेशानी देख इस बेटे ने बना दिया एक घंटे में 200 चपाती तैयार करने वाला रोटीमेकर
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- 1. यह कहानी कर्नाटक के बोम्मई एन वास्तु की है, जिन्होंने एक ऐसे रोटीमेकर का निर्माण किया है जो एक घंटे में लगभग 200 चपाती तैयार करता है।
- 2. चित्रदुर्ग स्थित होसादुर्ग के रहने वाले बोम्मई एन वास्तु ने जब देखा कि उनकी मां को रोटी बनाने में दिक्कत हो रही है तो उन्होंने यह नायाब चीज बना डाली।
- 3. चलाने में बेहद आसान छह किलो की इस मशीन की लागत 15 हजार रुपये है। इसका आकार इंडक्शन स्टोव जैसा है।