| Jan 01, 1970 | Daily Report |
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21251. प्रदूषण से बिगड़ रहे हालात! छात्रों ने संभाली कमान, बेकार प्लास्टिक बॉटल्स में कर रहे खेती
- प्लास्टिक की बोतल को डीकंपोज होने में 450 साल लगते हैं और अपने इस पूरे जीवनकाल में वह पर्यावरण को किसी न किसी रूप में नुकसान पहुंचाते रहते हैं।
- प्लास्टिक का कचरा, खासकर बोतलें पर्यावरण के लिए एक बड़ा खतरा हैं। मुंबई में USB के दस छात्र इस कचरे से निपटने में जुटे हैं। प्लास्टिक की बोतलों को अपसाइकिल कर, वे ऐसे हाइड्रोपॉनिक प्लांटर बना रहे हैं जिसकी लागत काफी कम है और पानी भी ज्यादा खर्च नहीं होता।
- एक बार में चार से पांच बोतलों का इस्तेमाल किया जाता है और उन्हें आधा काटकर, बोतल के ऊपरी हिस्से को उलटकर नीचे वाले हिस्से में डाल दिया जाता है। ऊपरी हिस्से में जूट भरकर प्लांट लगाए जाते हैं। हर बोतल के निचले हिस्से में दो छेद कर उसमें पाइप डाल दिया जाता है ताकि बोतल एक दूसरे से जुड़ी रहें और सभी को पानी का फ्लो मिलता रहे।
21252. Infra works of Rs 10,757 crore completed in Noida since 2017
- Infrastructure projects worth Rs 10,757 crore have been completed in Noida since 2017, with the Aqua Line metro, a COVID-19 hospital and a parking space for over 12,500 cars key among them, according to officials.
- There have been 28 important infrastructure projects, totalling worth Rs 3,062 crore that have been inaugurated since April 2017 while work on several minor projects worth Rs 2,192 crore have been completed till July 2021, it said.
- “In all, work has been completed on infrastructure projects worth Rs 10,757 crore in Noida from April 2017 till July 2021,” Noida Authority CEO Ritu Maheshwari said.
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21253. गौमूत्र, दूध, हल्दी जैसी चीज़ों से बनाया खेती को सफल, विदेशों से भी सीखने आते हैं किसान
- सूरत के ही किसान, अश्विन नारिया जिन्होंने गाय आधारित खेती को अपनाकर, खेती के खर्च को 80% तक कम कर दिया है। साथ ही, वह एक कंसल्टेंट भी हैं और दूसरे किसानों को भी इस तरह की खेती करने में मदद करते हैं।\
- गाय आधरित और पंच संस्कार से मिलने वाले परिणाम, वैज्ञानिक रूप से भी साबित हो चुके हैं। साथ ही इससे होने वाले फ़ायदे काफी चौंकाने वाले हैं।”
- संस्कार का मतलब हम अपने प्राकृतिक तरीकों से बीज, भूमि, वायु, वनस्पति और जल को शुद्ध करके उसमें सकारात्मक ऊर्जा डालते हैं। जिससे खेती की पैदावार पर काफी अच्छा असर होता है।
21254. उत्तर प्रदेश: गन्ना किसानों को भा रहा ई-गन्ना ऐप, 44 लाख किसानों ने किया डाउनलोड [
- उत्तर प्रदेश सरकार के अनुसार साल 2020-21 में 66,963 किसानों को गन्ना खेती में आधुनिक और उन्नत तकनीक का प्रयोग करना सिखाया गया। प्रशिक्षण के माध्यम से यूपी में रिकॉर्ड 81.5 टन गन्ना उत्पादन हासिल किया गया
- प्रदेश के 44.40 लाख किसानों ने ई-गन्ना ऐप डाउनलोड किया है, जहां उन्हें सीधे उत्तर प्रदेश गन्ना विभाग से जुड़े होने का लाभ मिल रहा है। ऐप के माध्यम से किसानों को छुटकारा मिल गया है और ऐप में माध्यम से किसानों को नई जानकारियां भी मिलती रहती हैं।
- ऐप और वेब पोर्टल के माध्यम से किसानों को गन्ना बेचने, सर्वे डेटा, गन्ने से जुड़ी सरकारी सूचनाएं (प्री कैलेंडर), बेसिक कोटा और गन्ने की पर्ची से जुड़ी जैसी सभी जानकारियां मिल जाती है। (
21255. Noida to get 350-acre medical device park, provide employment to 20,000 people: UP govt
- Infrastructure The Yamuna Expressway Industrial Development Authority (YEIDA) has earmarked 350 acres of land for the first medical device park in Uttar Pradesh and the largest in North India.
- The park will be built in two phases. In the first phase, sheds will be built on 125 acres of land while in the second phase, sheds will be built on the rest of 225 acres.
- With the help of the Indian Institute of Technology (IIT) Kanpur, an incubation centre will also be constructed over five acres of land at the medical device park.
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21256. Record Bookings for Make in India Electric Bike
- eBikeGo announced on that its Rugged electric bike, which was released in India two months ago, had received over one lakh orders.
- eBikeGo claims that the paid bookings total roughly Rs 1,000 crore, indicating that the electric vehicle revolution in India is still on two wheels.
- The Rugged e-bike has a projected range of 160 kilometres and an intriguing design that is not traditional. The rugged e-bike comes with an LCD cluster, a USB charging port, and the ability to lock and unlock it using a smartphone.
21257. देश ने अक्षय उर्जा में 100 गीगावाट की ऐतिहासिक उपलब्धि की हासिलः सीआईआई
- देश ने अक्षय उर्जा में 100 गीगावाट की ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ली है। सन् 2030 तक 450 गीगावाट का लक्ष्य हासिल किया जाएगा।
- गीगावाट के लक्ष्य को हासिल करना ऐतिहासिक उपलब्धि है। पीएम मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत के तहत देश आगे बढ़ते हुए सन् 2030 तक 450 गीगावाट के टारगेट को भी पूरा कर लेगा।
- नीति आयोग के चीफ अमिताभ कांत ने कहा भारत का लक्ष्य होना चाहिए कि वो कम से कम 200 गीगावाट ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया साल 2030 तक एक्सपोर्ट करे।
21258. सामरिक चुनौतियों से निपटने की तैयार, स्वदेशी विमानवाहक पोत विक्रांत दूसरे समुद्री परीक्षण के लिए रवाना, जानें इसकी खूबियां
- इस वर्ष बाजार भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत (Indigenous Aircraft Carrier (IAC) विक्रांत (Vikrant) दूसरे समुद्री परीक्षण के लिए रविवार को कोच्चि से रवाना हुआ। अगले साल अगस्त तक इसे नौसेना में शामिल किया जाना है।
- देश में बने सबसे बड़े और 40 हजार टन वजनी पोत ने अगस्त में पांच दिवसीय पहली समुद्री यात्रा सफलतापूर्वक पूरी की थी।
- युद्धपोत के निर्माण में 23 हजार करोड़ रुपये की लागत आई है। इससे मिग-29 लड़ाकू विमानों, कामोव-31 व एमएच-60आर हेलीकाप्टरों का संचालन किया जा सकता है। इसमें 2300 से अधिक कम्पार्टमेंट हैं, जिन्हें 1700 से अधिक लोगों के रहने के लिए डिजाइन किया गया है। युद्धपोत की लंबाई 262 मीटर, चौड़ाई 62 मीटर और लंबाई 59 मीटर है।
21259. दोना पत्तल बनाकर संवर रही ग्रामीणों की जिंदगी
- शाहजहांपुर जिले के चकराता ब्लॉक के छोटे से कस्बे बरोंथा में ग्रामीण दोना पत्तल बनाकर अपनी जिंदगी बदल रहे हैं। उनके बनाए दोना पत्तल का शादी ब्याह में खूब इस्तेमाल हो रहा है।इन दिनों ग्रामीणों का समूह आसपास से मिले ऑर्डर को पूरा करने में व्यस्त है।
- आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत जलागम परियोजना की ओर से कस्बे में दोना पत्तल बनाने की मशीन निशुल्क दी गई। दोना पत्तल बनाने और उनको बेचने के लिए ग्रामीणों ने एक समिति का गठन किया है।
- बरोंथा कस्बे में बन रहे दोना पत्तलों को बेचने के लिए बाजार की सुविधा भी मुहैया कराई जाएगी। इसके साथ ही ग्रामीणों को बैंकिंग से संबंधित जानकारी भी दी जाएगी।
21260. फलों और सब्जियों को लंबे समय तक सुरक्षित रखेगा उपकरण, बढ़ेगी किसानों की आमदनी
- भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा विकसित यह सस्ता उपकरण फसलों के उत्पादन के बाद होने वाले नुकसान से बचा सकता है।
- यह उपकरण फलों और सब्जियों को लंबे समय तक सुरक्षित रखता है, और बिजली की कटौती से प्रभावित कोल्ड स्टोरेज के विपरीत, यह उपकरण सौर ऊर्जा पर काम करता है।
- भारत में उत्पादित कुल फलों और सब्जियों का लगभग 30 प्रतिशत हर साल बर्बाद हो जाता है, लगभग 40 मिलियन टन फलों और सब्जियों के बर्बाद होने से 965.39 बिलियन रुपये का नुकसान होता है।