| Jan 01, 1970 | Daily Report |
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22651. झारखंड: कारोबार बंद हुआ तो इस युवक ने कर दिया ‘मैजिक बल्ब’ का आविष्कार
- झारखंड के कामदेव जमशेदपुर में इमरजेंसी लाइट बेचने का काम करते थे, लेकिन इसी कड़ी में उन्होंने हाथ के छूने से जलने वाले बल्ब से लेकर सेंसर और रिमोट से जलने वाले बल्ब का आविष्कार कर दिया।
- सरायकेला कॉलेज से भौतिकी में मास्टर्स करने वाले कामदेव ने द बेटर इंडिया को बताया, “मुझे बचपन से ही इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से खास लगाव रहा है। मैं इसी क्षेत्र में कुछ करना चाहता था। लेकिन, घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। जिस वजह से 2011 में 10वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद मुझे रोजगार के लिए बेंगलुरु जाना पड़ा।”
- इस मॉडल विकसित करने में कामदेव के महज 7 हजार रुपए खर्च हुए। लोगों को यह काफी पसंद आया, जिसके बाद उन्होंने इस डिजाइन के 70 से अधिक साइकिल तैयार किये।
22652. भारत दुनिया में ककड़ी और खीरे का सबसे बड़ा निर्यातक बनकर उभरा
- भारत ने अप्रैल-अक्टूबर 2021 से 114 मिलियन अमरीकी डॉलर मूल्य के खीरे का निर्यात किया, जबकि 2020-21 में निर्यात 200 मिलियन अमरीकी डॉलर से अधिक हुआ। भारत ने अप्रैल-अक्टूबर (2020-21) के दौरान 114 मिलियन अमरीकी डॉलर के मूल्य के साथ 1,23,846 मीट्रिक टन ककड़ी और खीरे का निर्यात किया है।
- खीरे को वर्तमान में 20 से अधिक देशों को निर्यात किया जाता है, जिसमें प्रमुख गंतव्य उत्तरी अमेरिका, यूरोपीय देश और महासागरीय देश जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, स्पेन, दक्षिण कोरिया, कनाडा, जापान, बेल्जियम, रूस, चीन, श्रीलंका और इजराइल हैं।
- एक खीरा किसान प्रति फसल 4 मीट्रिक टन प्रति एकड़ का उत्पादन करता है और 40,000 रुपये की शुद्ध आय के साथ लगभग 80,000 रुपये कमाता है। खीरे में 90 दिन की फसल होती है और किसान वार्षिक रूप से दो फसल लेते हैं। विदेशी खरीदारों की आवश्यकता को पूरा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किए गए हैं।
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22653. मिलें उस शख्स से जिसने बेंगलुरू में झीलों को फिर से जीवित करने के लिए छोड़ दी नौकरी Inspiration
- आनंद मल्लिगावड ने कार्रवाई करने का फैसला किया। वह 2017 से शहर में झीलों को फिर से जीवंत करने के लिए काम कर रहे हैं और अब तक 12 झीलों को पुनर्जीवित कर चुके हैं। उत्तरी कर्नाटक के कोप्पल जिले के एक छोटे से गाँव के रहने वाले, आनंद मल्लिगावड ने अपना अधिकांश समय प्रकृति और उससे सीखने के बीच बिताया क्योंकि उनका स्कूल एक झील के किनारे स्थित था।
- मेरे पास 1 करोड़ रुपये का बजट था, जो संसेरा इंजीनियरिंग (Sansera Engineering) का CSR फंड था जहां मैंने तब काम किया था। इसे ध्यान में रखते हुए, मैंने गणना की और पाया कि हम लागत कहां कम कर सकते हैं। हमने ज्यादातर प्राकृतिक सामग्री, मिट्टी, और झील से बजरी ही बांध और अलगाव बनाने के लिए काम में ली।
- 20 अप्रैल, 2017 को संसेरा फाउंडेशन द्वारा प्रदान किए गए 1 करोड़ और 17 लाख के बजट के साथ काम शुरू किया। हमने 5 जून को प्रोजेक्ट पूरा किया। 1 घंटे 45 मिनट में करीब 5,500 पौधे लगाए गए। जो स्वयंसेवक आए, उन्होंने इस बात का प्रचार-प्रसार करना शुरू कर दिया और अधिक लोग मेरे पास पहुंचने लगे।
22654. IIT Delhi Innovation: बोतल में पानी डालते ही खत्म हो जाएंगे जीवाणु-कीटाणु , IIT दिल्ली ने विकसित की तकनीक
- 1. प्रौद्योगिकी संस्थान ने एक बोतल तैयार किया है जो जीवाणु-कीटाणु को खत्म कर सकेगा। आइआइटी दिल्ली-इनक्यूबेटेड स्टार्टअप नैनोसैफ सॉल्यूशंस ने नैनो-टेक्नॉलॉजी और पारंपरिक विज्ञान के मिश्रण से पानी की यह बोतल तैयार की है। बोतल तांबे के एंटीमाइक्रोबियल गुणों पर आधारित है। इसे एक्यूक्योर (AqCure) नाम दिया गया है।
- 2. आइआइटी पदाधिकारी ने बताया कि पानी की बोतल एंटीवायरल, जीवाणुरोधी और एंटिफंगल हैं। इसमें पॉलीमर मैट्रिक्स से सक्रिय नैनो-तांबा निकलता है। निकलने वाला तांबा कंटेनर के बाहरी और आंतरिक सतह को एंटीवायरल बनाता है। सीधे संपर्क पर यह किसी भी तरह के जीवाणु और कीटाणु को कम या खत्म करता है। साथ ही संग्रहण किए गए पानी सुरक्षित बनाता है।
- 3. यह एक पेटेंट तकनीक है जिसमें पॉलीमर मैट्रिक्स से संयमित तरीके से सक्रिय नैनो-तांबा उत्सर्जित होता है। उत्सर्जित तांबा कंटेनर के बाहरी और आंतरिक सतह को एंटीवायरस बनाता है, जो सीछे संपर्क पर रोगाणुओं के संचरण को कम करता है और पानी को सूक्ष्मजीव विज्ञानी रूप से सुरक्षित बनाता है।
22655. वृद्धाश्रम के निर्माण के लिए डॉक्टर ने दान कर दी 5 करोड़ की जमीन, पूरी की पत्नी की आखिरी इच्छा
- 72 वर्षीय राजेंद्र कंवर रिटायर्ड डॉक्टर हैं और उनकी पत्नी कृष्णा कंवर का देहांत करीब एक साल पहले हो गया था। राजेंद्र कंवर और कृष्णा कंवर की कोई संतान नहीं है और कृष्णा कंवर ने यह फैसला लिया था कि वे अपनी सारी संपत्ति को सरकार के नाम कर देंगे।
- डॉक्टर राजेंद्र कंवर ने बताया है कि ऐसे तमाम लोग होते हैं जिनको उनके बुढ़ापे में घर से बेदखल कर दिया जाता है या अन्य वजहों से भी उनके पास आसरे के लिए छत नहीं होती है। ऐसे में वे चाहते हैं कि अब सरकार को दे दिये गए उनके आलीशान घर में एक वृद्धाश्रम का संचालन हो।
- राजेंद्र कंवर ने साल 1974 में शिमला के स्नोडेन अस्पताल से अपनी एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की थी और साल 1977 में उन्होने भोरंज स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से अपने मेडिकल करियर की शुरुआत की थी। फिलहाल राजेंद्र कंवर जोलसप्प्ड स्थित अपने घर पर ही मरीजों का इलाज करते हैं।
22656. IIT-M Develops Wrapping Material That Can Prevent Food Contamination & Plastic Waste
- 1. The material is both biodegradable and reduces bacterial colonies by 99.99 per cent when compared with an ordinary wrapper.
- 2. Earlier this week, the Indian Institute of Technology-Madras (IIT-M), announced the development of their Sustainable Antimicrobial Wrapping Material, which they believe will prevent packaged food contamination by bacteria as well as reduce plastic waste. This biodegradable food wrapper reportedly has an in-built antibacterial compound and is safe for consumption.
- 3. The wrapping material also degrades at various environmental conditions with the rate of degradation varying from 4 to 98 per cent in 21 days, adds Professor Doble.The wrapping material degraded rapidly in moist conditions when compared to dry ones. Hence, they believe, this wrapper can play a major role in plastic waste reduction.
- 4. At present, researchers are looking for funds to scale up the process and test their product with more food samples.
22657. केरल की इस कंपनी का कमाल, धूप से इडली बनाना हुआ संभव, जानिए कैसे!
- 1. सोलर सॉल्यूशंस में माहिर केरल के कोच्चि स्थित क्राफ्टवर्क सोलर नाम की कंपनी ने एक ऐसा मशीन तैयार किया है, जिसमें इडली और अन्य उबले हुए खाद्य पदार्थों को सौर ऊर्जा का इस्तेमाल करते हुए बनाया जाता है। यह कंपनी पिछले दो दशकों से सोलर इंडस्ट्री में है और वॉटर हीटर, ड्रायर और फोटोवोल्टिक (PV) आदि जैसे सौर ऊर्जा से संचालित कई मशीनों को बना चुकी है।
- 2. क्राफ्टवर्क के प्रबंध निदेशक केएन अय्यर ने द बेटर इंडिया को बताया, “यह तिरुपति मंदिर में लगे स्टीम कुकिंग सिस्टम की तरह ही काम करता है और इसमें हमने बस सोलर कम्पोनेन्ट को छोटा किया है। इडली ओवन से जुड़े स्टीमर्स, पैराबोलिक रिफ्लेक्टर द्वारा संचालित होते हैं, जो भाप उत्पन्न करने के लिए एक छोटे से क्षेत्र में सूर्य की रोशनी को निर्देशित करते हैं। यह मशीन 130 डिग्री सेल्सियस के ताप तक पहुँच सकता है, और इससे तेल को भी गर्म किया जा सकता है।”
- 3. कंपनी ने अपने अनुसंधान और विकास के जरिए एक वर्ष में सौर-संचालित कुकर को विकसित किया है। इसके तहत उनका लक्ष्य स्कूल या कैंटीन जैसे कम आबादी वाले जगहों पर सौर ऊर्जा के जरिए खाना तैयार करने की आदत को बढ़ावा देना है।
22658. गाजर की सफाई के लिए मशीन से लेकर बैलगाड़ी के लिए ब्रेक तक बना चुके हैं संतोष
- 1. संतोष ने अपने इनोवेशन के लिए बेसिक तकनीक को समझा और लगभग 11 असफलताओं के बाद 12वीं बार में ‘कैरट क्लीनिंग मशीन’ बनाकर तैयार की।उनकी यह मशीन मात्र 15 मिनट में लगभग 1 क्विंटल गाजर आसानी से साफ़ कर सकती है। इसके लिए बिजली की भी ज़रूरत नहीं है, सिर्फ दो लोग इसे ऑपरेट कर सकते हैं। साथ ही, पानी की भी बचत इसमें होती है। संतोष के मुताबिक उन्होंने लगभग 2500 मशीन अब तक छोटे-बड़े किसानों को दी हैं। फ़िलहाल, वह अपनी जॉब कर रहे हैं लेकिन अगर उन्हें कोई ऑर्डर करता है तो वह अपने गाँव में ही एक मैकेनिक से मशीन बनवा कर उन्हें देते हैं।
- 2. संतोष को अपने इस इनोवेशन के लिए कई पुरस्कार मिले। उन्हें रतन टाटा द्वारा बेस्ट लीडर अवॉर्ड से भी नवाज़ा गया। यह संतोष और उनके परिवार के लिए किसी सपने से कम नहीं था। उनके माता-पिता ने कभी नहीं सोचा था कि वह अपने बेटे को टीवी पर रतन टाटा से अवॉर्ड लेते हुए देखेंगे!
- 3. कैरट क्लीनिंग मशीन के अलावा, संतोष ने बैलगाड़ी के लिए ब्रेक सिस्टम और गर्म पानी के लिए इको हॉट वाटर क्वाइल बनाई। अक्सर हम ब्रेक्स को किसी मोटर गाड़ी के साथ जोड़ते हैं। लेकिन संतोष ने बैलगाड़ी की समस्याओं पर काम किया।
22659. More than 162.73 crore COVID vaccine doses provided to States/UTs: Govt (
- more than 162 crore 73 lakh COVID vaccine doses have been provided to States and Union Territories so far
- more than 13 crore 83 lakh unutilized vaccine doses are still available with the States and UTs to be administered.
- As part of the Nationwide Vaccination Drive, the government has been supporting the States and Union Territories by providing them COVID vaccines free of cost.
22660. सीमैप किसान मेला: 21 से 31 जनवरी तक किसानों को मिलेंगी मेंथा की उन्नत किस्मों की जड़ें, ऑनलाइन करें आवेदन
- मेंथा या मेंथाॅल मिंट की खेती करने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर है। अगर आप मेंथा की ज्यादा पैदावार और उत्पादन देने वाली किस्म की नर्सरी करना चाहते हैं तो सीमैप से 21 से 31 जनवरी के बीच प्लांटिंग मटेरियल मिल सकता है लेकिन कोविड के चलते पहले ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
- किसानों को मेंथाल मिंट जैसी नगदी फसल का उपहार देने वाले वैज्ञानिक संस्थान केन्द्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीएसआईआर-सीमैप) में इस बार किसानों को सिम उन्नति किस्म की जड़ें (सकर्स) दी जाएंगी। कोविड के चलते सीमैप में 21 से 31 जनवरी तक रोजाना करीब 200 किसानों को ये पौध सामग्री दी जाएगी।
- लखनऊ स्थित केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप) के मुताबिक भारत दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक मेंथा का निर्यातक है। भारत में लगभग 3 लाख हेक्टेयर में मेंथा की खेती होती है और करीब सालाना 30 हजार मीट्रिक टन मेंथा ऑयल का उत्पादन होता है।