| Jan 01, 1970 | Daily Report |
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21321. Skywalk connecting New Delhi railway station and Metro stations to be opened soon
- To facilitate smooth connectivity between New Delhi railway station and adjacent metro stations on the yellow metro line and the Airport Express Line, a dedicated skywalk is all set to come up very soon for public use, Delhi Metro Rail Corporation (DMRC) officials said on Thursday.
- The art skywalk, which has been constructed by DMRC in association with Northern Railways, is all set to be opened to the general public very soon.
- "This newly-constructed skywalk is an extension of the foot over bridge (FOB) inside the railway station and connects the Ajmeri Gate side of the station with the New Delhi metro stations of Yellow Line and Airport Line, including the multi-level parking side, across Bhavbhuti Marg through multiple entry and exit points, DMRC tweet read.
21322. ‘ठेंगापाली’: जानिए कैसे इस एक हथियार से 600 एकड़ जंगलों को बचाया है इस एक शख्स ने
- दामोदर ने ग्रामीणों के साथ मिलकर गाँव के आसपास की 300 एकड़ ज़मीन के जंगल का संरक्षण किया। वहां पौधरोपण किया गया और साथ ही बचे-कुचे पेड़ों को सहेजा गया। इस जंगल को बाड़लाकोट के नाम से जाना जाता है दामोदर के अनुसार, मोतीगांव, सिवनागुड़ा, गोईगुड़ा, कून्ना, सिरसियागुड़ा, केरागांव के लोगों ने भी ठेंगापाली पद्धति से जंगल बचाया है। इससे इलाके का भूजल स्तर बढ़ा
- जंगल की रक्षा के लिए उन्होंने ‘ठेंगापाली पद्धिति’ का अनुकरण किया।दामोदर बताते हैं, “ठेंगा का मतलब होता है खास बांस से बना ‘डंडा’ और पाली का मतलब होता है ‘बारी।’ इस डंडे पर बहुत सारे कपड़े बांधे जाते हैं, ये सभी कपड़े हमारी देवी का प्रतीक होते हैं। इस डंडे को लेकर हर दिन गाँव से कोई न कोई जंगल की पहरेदारी करता है ताकि कोई भी गलत तरीके से जंगल में न घुसे।
- अपनी बारी पूरी होने के बाद वह व्यक्ति इस डंडे को अपने पड़ोसी के घर के आगे रख देता है। दूसरे दिन उस पड़ोसी की बारी होती है और फिर वह तीसरे पड़ोसी के यहाँ डंडे को रखता है। इस तरह बारी-बारी से गाँव के सभी लोग जंगल की रखवाली करते हैं।”
21323. 7 दिन लगातार जुटकर खुद घर में बनाया सोक पिट, ताकि मोहल्ले में किसीको न हो पानी की कमी
- बिहार के राहुल रोहिताश्व जल संकट से निपटने के लिए अपने घर में बूंद-बूंद पानी का संरक्षण कर रहे हैं।
- आज रेन वॉटर हार्वेस्टिंग (वर्षा जल संग्रहण) को एक नए रूप में अंजाम दिया। उन्होंने बताया कि हर साल बारिश के मौसम में वर्षा जल बेकार ही बर्बाद हो जाता था। ऐसे में, इसके संरक्षण के लिए उन्होंने अपने घर में सोक पिट (पन सोखा) का निर्माण कराया।
- आप राहुल से जल संरक्षण की तकनीक को समझना चाहते हैं तो उनसे 8986431476 पर संपर्क कर सकते हैं।
21324. 70 साल के मिस्त्री का हर कोई कायल, मुफ्त में सिखाते हैं मार्शल आर्ट
- रामेश्वरम में 70 साल के राजमिस्त्री हैं गणपति मुरुगेसन। गणपति सिर्फ मजदूर ही नहीं बल्कि तमिलनाडु की प्राचीन मार्शल आर्ट कला सिलंबम में उस्ताद हैं।
- इतना ही नहीं वह अपने राज्य की इस कला को युवा पीढ़ी को सौंपना चाहते हैं। इसके लिए वह हर रोज 200 बच्चों को मुफ्त में सिलंबम सिखाकर उन्हें आत्मनिर्भर बना रहे हैं। अपनी संस्कृति और कला बचाने गणपति की इस नेक मुहिम को काफी लोगों की सराहना मिल रही है।
- गणपति पेशे से राजमिस्त्री हैं। वह कहते हैं, 'मैं हर रोज 800 रुपये कमाता हूं। मैं इस ट्रेनिंग क्लास को दिन में दो बार मुफ्त में चलाता हूं। मैं चाहता हूं कि यह कला हमारी आने वाली पीढ़ी को सौंपी जाए।'
21325. Raksha Bandhan in Prayagraj: 'ग्रीन रक्षाबंधन'...1 लाख पौधे लगाने वाले हरियाली गुरु का अनूठा संकल्प
- प्रयागराज में ग्रीन मैन ने अपने अनूठे अंदाज में मनाया रक्षा बंधन
- पेड़ पौधों को राखी बांधकर तामउम्र हिफाजत करने का संकल्प हरियाली गुरु के प्रयागराज में लगा चुके हैं 1 लाख से ज्यादा पौधे
- पेड़-पौधों की आरती उतारने के बाद तनों में बांधा गया रक्षा सूत्र
21326. घर-घर से चीजें इकट्ठा कर बेचती हैं यह महिला, कमाई से भरती हैं ज़रुरतमंदों बच्चों की फीस
- देवयानी ने एक छोटी-सी दुकान किराए पर लेकर स्टोर शुरू किया। इसमें डोनेशन के सभी सामान को अलग-अलग केटेगरी में रखकर उनका मूल्य तय किया गया। यहां से कोई भी 5 रुपये से लेकर 500 रुपये तक की चीज़ें खरीद सकता है। यहां पर मिलने वाले सामान में बच्चे-बड़े, महिला-पुरुष के कपड़ों से लेकर स्टेशनरी, बच्चों के लिए गेम्स, किताबें, बर्तन और फर्नीचर आदि शामिल हैं।
- उन्होंने सरकारी स्कूल में पढ़ाई करने वाली तीन लड़कियों का दाखिला एक प्राइवेट स्कूल में कराया है। ये बच्चियां पढने में काफी होशियार हैं।
- इनकी फीस का खर्च देवयानी इसी स्टोर की कमाई और कुछ अपनी जेब से देती हैं। समय-समय पर लोगों को जोड़कर वह सरकारी स्कूलों की मदद भी करतीं हैं।
21327. 45 सालों से जंगल में आदिवासियों के बीच रहकर उनकी ज़िन्दगी सँवार रहे हैं यह पूर्व वायु सेना कर्मी
- विलास मनोहर आज से 45 साल पहले जब आदिवासियों के गाँव हेमकलसा पहुंचे थे तब वहाँ मिट्टी की दो-तीन झोपड़ियाँ ही थीं लेकिन आज उनकी मेहनत से वहाँ अस्पताल, पक्के घर व पशुओं के लिए एक अनाथालय खुल चुका है।
- विलास मनोहर का संबंध पुणे से है। 1944 में इनका जन्म हुआ। ग्यारहवीं तक पढ़ाई की, जो उस समय काफी मानी जाती थी। इसके बाद वायरलेस ऑपरेटर के रूप में वायुसेना से जुड़े और भारत-चीन युद्ध (1962) में सेवाएँ भी दीं। वायुसेना से दिल ऊब गया तो अपने घर पुणे लौट आए और एयर कंडीशनर बनाने वाली एक कम्पनी में काम करने लगे। कुछ साल बाद इन्होंने खुद का रेफ्रीजरेशन का व्यवसाय शुरु किया। इस दौरान दोस्तों के साथ शिकार पर जाना और ग्लाइडिंग करना इनके शौक थे। बाद में वह रायफल शूटिंग क्लब से जुड़े और 1973 में नेशनल शूटिंग कम्पटीशन में महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व भी किया था।
- बात तब की है विलास मनोहर लगभग 25 साल के थे। सब कुछ ठीक चल रहा था। एक दिन अकस्मात कुछ ऐसा घटा कि उनका जीवन हमेशा के लिए बदल गया। पुणे के नज़दीक एक प्रसिद्ध तीर्थस्थान है आलंदी। वहाँ वह अपने दोस्तों के साथ जाया करते थे। लेकिन यह उपक्रम सिर्फ भगवत दर्शन के लिए नहीं था। वह अपने दोस्तों के साथ घर से 13 किमी दूर आलंदी तक पैदल जाते, वहाँ कुछ वक्त बिताते, दर्शन करते और फिर बस से वापस आते।
21328. Nagaland : Mini-Soil Testing Laboratory Inaugurated In Noklak
- The Agriculture Production Commissioner of Nagaland – Y. Kikheto Sema, IAS today inaugurated the Mini Soil Testing Laboratory at SDO (Soil) Office, Noklak. During the inauguration programme, Sema informed the gathering that he was glad to yet again inaugurate another Mini labaratory for the people of Noklak and the state as well.
- He informed the people that a more sophisticated Soil Testing Laboratory with Atomic Absorption Spectrophotometer (AAS) is in the pipeline and that the Mini lab is being commissioned for creating awareness among the farming community and for the benefit of the general public of the district.
- Meanwhile, over the telephonic conversation with the Deputy Director-General of India Meteorological Department-North East (IMD-NE) – Dr. K. N. Mohan, Sema was assured that the meteorology infrastructure at Tuensang and Noklak districts will be installed with Agro-met AWS having a range of 50 kms radius.
- He observed that there is a price list for all imported commodities like rice, dal, chilli, potatoes, tomatoes etc. but the price list for organic local products is not available. Thus making it difficult for farmers to sell their produce at a fair price. Therefore, he requested the district administration Noklak to initiate and bring out the price list for all the agriculture produce in the district and set an example for the other districts.
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21329. मिजोरम के आईएएस कपल शशांका और भूपेश ने कुपोषण के खिलाफ उठाई आवाज, अपने प्रयासों से शिक्षा का स्तर सुधारने की दिशा में दिन-रात कर रहे मेहनत
- शशांका के प्रयासों से कई स्कूलों में सुंदर बगीचे बने और कुपोषण का शिकार हुए बच्चों को आंगनवाड़ी में भरपेट खाना मिलने लगा
- इस कपल को 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस पर मिजोरम सरकार ने मुख्यमंत्री पुरस्कार से सम्मानित किया
- जब आइएएस शशांका अला ने मिजोरम के लाईवंग्टलाई जिले में जिला मजिस्ट्रेट के रूप में पदभार संभाला, तो राजधानी आइजोल से लगभग 290 किलोमीटर दूर एक दूरदराज और पिछड़े इलाके में उन्होंने अपने बेटे को आंगनवाड़ी में भर्ती कराया।
21330. After losing their son to drug abuse, this couple from Punjab is fighting against the social evil
- Mukhtiar and Bhupinder Singh’s son passed away due to drug addiction in 2016. From then on, the couple has been going door-to-door to spread awareness about the deadly habit among the community.
- And Manjeet Singh was one of them. On March 26, 2016, he lost his life to the deadly narcotics. Since then, his parents — Mukhtiar Singh and Bhupinder Kaur — have been fighting against drug abuse. The couple, who had offered their son’s shroud to the government demanding action against drug addiction, are now going door-to-door to spread awareness about the issue.
- Mukhtiar, an assistant linesman with the Punjab State Power Corporation Ltd posted in Khem Karan, makes it a point to visit at least five families each weekend.