| Jan 01, 1970 | Daily Report |
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23901. Bajaj’s new EV production unit to start by June 2022 in India
- The whole R&D department of Bajaj will now be focused on developing future technologies for EVs. However, as Rajiv Bajaj’s statement mentions in the release, there’s one state-of-the-art ICE platform under development, which is certainly the result of the Bajaj-Triumph collaboration.
- The Chakan-based two-wheeler manufacturer is investing Rs 300 crore on this project. Spread over half a million square feet area, it will have an annual capacity to churn out as many as 500,000 electric vehicles per annum.
- Bajaj announces beginning of work at its new plant for EVs, Invests Rs 300 crore in the project, First electric two-wheeler to be rolled out in June 2022
- Bajaj Auto has announced that it’s establishing a new manufacturing unit for electric vehicles in India. Located at Akurdi, Pune, this plant will be ready to roll out electric two-wheelers for domestic and export markets by June 2022.
23902. This Indian firm to deliver 8,000 agro, mapping, and inspection drones to UAE, Malaysia, and Panama
- Indian drone firm Garuda Aerospace is working on fulfilling orders from foreign customers for 8,000 drones that serve purposes including agriculture (pesticide spraying), industrial inspection, and mapping.
- a single drone was able to map five villages (each measuring up to 3 sq km) in a day and that they had deployed a sizable fleet to map 1000 villages in a month. Their work involved not just aerial mapping, but also providing the final output of processed map data.
- While he does admit that delivery of all 8,000 drones by March 2022 is an aggressive target, he hopes to enable delivery of a significant portion of the order within the deadline.
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23903. India's exports jump to $56.51 billion in October
- The country's overall imports in October are estimated to be $68.09 billion, a growth of 57.32% over the same period last year and 40.82$ over October 2019
- India’s overall exports jumped to $56.51 billion in October, exhibiting a positive growth of 35.16% over the same period last year and a positive growth of 29.13% over October 2019, the Ministry of Commerce & Industry said on Monday.
- India’s overall exports (merchandise and services combined) in April-October were estimated to be $369.39 billion, registering a positive growth of 39.83% over the same period last year and 19.97% over April-October 2019.
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23904. इस इंजीनियर ने बनाई कम लागत वाली मशीन, जो बंजर ज़मीन को घंटों में बनाती है खेती के योग्य
- अधिकांश लोगों के लिए शिक्षा सिर्फ पैसा कमाने और आगे बढ़ने का जरिया है। लेकिन 25 साल के दीपक ऐसा नहीं सोचते। उनके अनुसार शिक्षा का फायदा तभी है, जब वह किसी जरूरतमंद के काम आ सके। अपनी इस सोच के चलते दीपक ने इंजीनियरिंग करने के बाद नौकरी की राह नहीं पकड़ी बल्कि किसानों के लिए एक ऐसी किफायती हार्वेस्टिंग मशीन बनाने में जुट गए, जिससे उनकी बंजर पड़ी सैंकड़ों एकड़ जमीन को खेती के योग्य बनाया जा सके।
- तेलंगाना के इंजीनियर दीपक रेड्डी ने एक ऐसी मल्टी हार्वेस्टिंग मशीन बनाई है, जो बंजर जमीन से पत्थरों और चट्टानों को खोदकर उन्हें बाहर निकाल फेंकती है। यह आलू, प्याज और अन्य जड़ों वाली सब्जियों की भी खुदाई कर सकती है।
- संतोष ने बताया कि गांव के एक किसान ने इस काम के लिए तुर्की से ऐसी ही एक मशीन मंगवाई थी। उसकी कीमत 12 लाख रुपये थी। फिर भी रिज़ल्ट इतना अच्छा नहीं रहा। दीपक की बनाई मशीन उससे काफी ज्यादा बेहतर है और इसकी कीमत भी सिर्फ तीन लाख रुपये है
23905. उत्तराखंड: अलग-अलग काम किए पर नहीं मिली सफलता, अब जैविक खेती से कमाते हैं लाखों
- टिहरी गढ़वाल के मैड तल्ला गांव में रहनेवाले सुंदर लाल चमोली और उनकी पत्नी बिगुला चमोली पिछले 20 सालों से भी ज्यादा समय से पहाड़ों में जैविक तरीकों से खेती कर रहे हैं। यह दंपति आज अपने इलाके में बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए प्रेरणा बने हुए हैं। क्योंकि सुंदर लाल और बिगूला ने गांव में रहकर अपनी खेती करते हुए ही अपने परिवार को एक बेहतर जीवन दिया है। उन्होंने अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दी है।
- हम कृषि विभाग के सहयोग से अपनी खेती जैविक तरीकों से करते हैं। पुराने ढर्रे से हटकर हमने नए तरीके सीखे हैं और अलग-अलग फसल उगाकर अच्छी कमाई कर रहे हैं।
- सबसे ज्यादा तसल्ली इस बात की है कि हम न सिर्फ अपने परिवार को बल्कि अपने सभी ग्राहकों को भी शुद्ध और जैविक उत्पाद खिला रहे हैं। फल-सब्जियों से लेकर धान, राजमा और दलहन तक, सभी कुछ बिना किसी रसायन के प्रयोग के उगाया जाता है
23906. दिव्यांग हैं पर निर्भर नहीं! खुद सीखी कला और नारियल के बेकार खोल को बना लिया आय का ज़रिया
- आज हम आपको ओडिशा के एक ऐसे ही युवक की कहानी सुनाने जा रहे हैं, जो शरीर से तो दिव्यांग हैं, पर मन सुर हुनर में हम सबसे कई ज़्यादा सक्षम हैं। लॉकडाउन के दौरान उन्होंने अपने हुनर को तराशा और आज नारियल के खोल से एक से बढ़कर एक क्रॉफ्ट बनाकर बेच रहे हैं।
- ओडिशा के सब्यसाची पटेल पहले थर्माकॉल, फल-सब्जियों में नक्काशी का काम करते थे। वहीं लॉकडाउन में, उन्होंने नारियल के खोल से प्रोडक्ट्स बनाना शुरू किया, जिन्हें वह ऑनलाइन बेच रहे हैं। ओडिशा के बलांगीर जिला स्थित पुइंतला (Puintala) गांव के 29 वर्षीय सब्यसाची पटेल की है। सब्यसाची को बचपन से ही रीढ़ की हड्डी में दिक्क्त है, जिससे वह ज्यादा समय खड़े नहीं रह सकते हैं और न ठीक से चल पाते हैं।
- वह फेसबुक के जरिए ही अपने आर्ट-क्रॉफ्ट को बेच रहे हैं लेकिन इसके बावजूद उन्हें ऑर्डर मिल रहे हैं। उनकी कला को लोग पसंद कर रहे हैं। सब्यसाची को उम्मीद है कि आने वाले समय में जब उनकी बनाई चीजें अमेजन पर आएंगी तो उनका रोजगार बढ़ेगा और उनकी कमाई भी बढ़ेगी।
23907. इंजीनियर ने अपार्टमेंट में लगाया ऐसा वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, बच रहे रु. 50 हजार/माह
- ‘जल ही जीवन है’ इस बात का एहसास हमें तब होता है, जब हमारे आसपास के जलस्रोत सूखने (Water Crisis In Bengaluru) लगते हैं। जब पानी की किल्लत होती है, तब हमें पानी के बचाव और संरक्षण का ख़्याल आता है। बेंगलुरु में रहनेवाले लोगों के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ। बेंगलुरु के बेगुर में ‘मेट्रोपोलिस गुरुकृपा अपार्टमेंट परिसर’ के बोरवेल, साल 2018 में सूखने लगे थे।
- वहां, जब पानी की किल्लत होने लगी, तो लोगों ने पानी के टैंकर खरीदने का मन बना लिया। लेकिन इसी अपार्टमेंट में एक शख्स ऐसा भी था, जिसे पानी के टैंकरों की जरूरत नहीं थी। दरअसल, उनके पास एक ऐसा रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम (Rain Water Harvesting System) प्लान था, जिसके बलबूते वह पानी की किल्लत से लड़ सकते थे।
- RWH सिस्टम के लिए सामान खरीदना ज्यादा महंगा सौदा साबित नहीं हुआ। गणेश और अपार्टमेंट में रहने वाले कुछ लोगों ने मिलकर एक ई कॉमर्स वेबसाइट से जरूरत का सारा सामान खरीदा। इस पर लगभग 20 हजार रुपये का खर्च आया था और फिर प्लंबर की मदद से इसे परिसर में इंस्टॉल करा दिया गया।
- साल 2019 में जब बारिश हुई, तो उसके बाद से सिस्टम ने प्रभावी तरीके से काम करना शुरू कर दिया। सिस्टम को तैयार करने में जितना भी खर्च आया था, वह कुछ समय में ही वसूल हो गया। दरअसल, अब पानी के टैंकर पर खर्च होने वाला पैसा बचने लगा। अपार्टमेंट में लगे प्लांट से, अतिरिक्त पानी पास की झील में चला जाता है, जो धीरे-धीरे घटते जल स्तर को सुधारने में मदद करेगा।
23908. 21 वर्षीय कैफ अली ने डिज़ाइन किया ऐसा चलता-फिरता घर, जिसमें नहीं होगा किसी वायरस का खतरा
- दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से आर्किटेक्चर की पढ़ाई कर रहे, 21 वर्षीय कैफ अली ने अपने छात्र जीवन में ही कुछ ऐसा कमाल कर दिखाया है, जिसे पूरी दुनिया सलाम कर रही है।
- दिल्ली में रहने वाले कैफ अली को अपने ‘स्पेस इरा प्रोजेक्ट’ के लिए डायना अवॉर्ड, अर्न्स्ट एंड यंग अवॉर्ड, कॉमनवेल्थ मिशन द्वारा सस्टेनेबल डेवलपमेंट अवार्ड जैसे कई पुरस्कार मिल चुके हैं। जानिए क्या है यह प्रोजेक्ट।
- उन्होंने एक ऐसा शेल्टर होम डिजाइन किया, जिसे कहीं भी आसानी से शिफ्ट किया जा सकता है, जिसमें महामारी का खतरा नहीं होगा और सबसे खास बात यह है कि यह सस्ता होने के कारण, आम आदमी की पहुँच से बाहर नहीं होगा।
- उन्हें कॉमनेवेल्थ मिशन के तहत अपने आर्किटेक्चरल इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए, 3 लाख रुपए भी दिए गए हैं। अली के इस डिजाइन को ग्लोबल स्टूडेंट अवॉर्ड के तहत टॉप-60 में भी चुना गया है और यदि वह इसे जीत जाते हैं, तो उन्हें सम्मान के रूप में 7 करोड़ रुपए मिल सकते हैं।
- अली को इस पोर्टेबल डिजाइन के लिए प्रतिष्ठित डायना अवॉर्ड, अर्न्स्ट एंड यंग अवॉर्ड, कॉमनवेल्थ मिशन द्वारा सस्टेनेबल डेवलपमेंट अवार्ड जैसे कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। साथ ही, उनके आर्किटेक्चरल इनोवेशन को संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम द्वारा भी मान्यता दी गई है।
23909. काम की तलाश में गढ़वाल से आए लखनऊ, टिफिन बनाया, ठेला चलाया, आज 4 रेस्टोरेंट्स के हैं मालिक
- अगर आप में कुछ बड़ा करने की चाह है, तो आप उसे अपनी मेहनत से हासिल कर सकते हैं। आपका काम छोटा हो या बड़ा, अपने काम के प्रति जूनून ही आपको सफल बनाता है। आज हम आपको जिस शख्स की कहानी सुनाने जा रहे हैं, वह कभी लखनऊ में ठेले पर मोमोज और नूडल्स बेचा करते थे, लेकिन आज अपनी मेहनत के बल पर वह चार रेस्टोरेंट के मालिक हैं।
- यह प्रेरक कहानी लखनऊ के मशहूर रेस्टोरेंट ‘नैनीताल मोमोज’ के मालिक रंजीत सिंह की है। उनकी कहानी पढ़कर आपको मेहनत और जज्बे की ताकत पर यकीन हो जाएगा। गरीबी की अंधेरी गलियों से निकलकर, आज रंजीत सिंह के ‘नैनीताल मोमोज’ नाम से शहर में चार आउटलेट्स हैं। वहीं इलाहाबाद, दिल्ली और गोवा में भी, एक-एक फ्रेंचाइजी रेस्टोरेंट हैं, जिसे उनके संबंधी ही चलाते हैं।
- साल 1997 में काम की तलाश में उत्तराखंड के एक गांव से लखनऊ आए रंजीत सिंह ने कई छोटे-छोटे काम करने के बाद, साल 2008 में एक ठेले से खुद के बिजनेस की शुरुआत की थी। आज लखनऊ में उनके चार रेस्टोरेंट्स हैं।
23910. 4 Years, 15 States: How Cycling Through India Helped Me Build A Self-Sustaining Village
- Former journalist Ankit Arora has travelled across 15 Indian states on his cycle, and lived with 600 families along the way. Using all the traditional knowledge he has gained, he’s now trying to promote a sustainable and organic lifestyle through his model village
- Ankit has also constructed a sofa made from mud and used plastic and glass bottles. “These bottles were collected as waste from rivers and the Hogenakkal waterfall located nearby,” Ankit says.
- In addition, the village has two ponds for rainwater harvesting, 60 fruit-bearing plants, and an organic farm. “We grow vegetables like spinach, tomatoes, green chilli, okra, and bitter gourd, as well as fruit trees like mango, tamarind, and jackfruit, among others. The village is self-reliant when it comes to procuring vegetables and fruit supply,” Ankit explains.