| Jan 01, 1970 | Daily Report |
| RISING BHARAT | News Count (103024) | |
20881. एक एकड़ के चौथाई हिस्से में लगाया ड्रैगन फ्रूट, कमाई पांच लाख रुपए से ज्यादा
Contribution of SOCIETY to “Make in India” Self-employment (Atmanibhar)
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Agriculture(Organic Farming)
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- उत्तर प्रदेश के किसान रविंद्र पांडेय ने ड्रैगन फ्रूट की सफल खेती से आज अपनी अलग पहचान बनायी है।
- 31 वर्षीय रविंद्र पांडेय, एक प्रगतिशील किसान हैं। वह कौशाम्बी (उत्तर प्रदेश) जिले के सिराथू तहसील में, टेंगाई गाँव के रहने वाले हैं। उन्हें ‘ड्रैगन फ्रूट’ की सफल खेती के लिए, काफी पहचान मिल रही है। अपनी एक एकड़ जमीन के चौथाई भाग में ड्रैगन फ्रूट की खेती (Dragon Fruit Ki Kheti) करके, वह अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। साथ ही, वह दूसरे किसानों को भी, ड्रैगन फ्रूट के पौधे तैयार करके दे रहे हैं।
- रविंद्र और उनके परिवार ने अपनी जमीन पर ‘थाईलैंड रेड’ किस्म के 440 ड्रैगन फ्रूट के पौधे लगाए।
20882. टूटे हुए पेड़ों और बेकार लकड़ी के टुकड़ों से बनाते हैं Sustainable Furniture
Innovation and startups, ISRO/Defense/Water infrastructure/EV and other sectors
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Innovations in Bharat
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- वाराणसी के संदीप सरन, ‘काठ कागज’ नामक होम-स्टूडियो चलाते हैं, जहाँ बेकार पड़ी लकड़ियों का इस्तेमाल कर, वह अपने ग्राहकों की जरूरतों के मुताबिक़ Sustainable Furniture बनाकर देते हैं।
- 2017 में संदीप ने एक वॉक-इन होम स्टूडियो, ‘काठ कागज़’ की शुरुआत की।
- संदीप फर्नीचर (Sustainable Furniture) और लकड़ी के सभी सामान बनाने के लिए, लकड़ी को अपसाइकल या बेकार लकड़ी का इस्तेमाल करते हैं।
20883. 1050 वर्ग फ़ीट में उगाते हैं मशरूम, हर महीने होती है 30 हज़ार की कमाई
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- 1) The जमशेदपुर के राजेश कुमार, पिछले लॉकडाउन से पहले अपनी नौकरी छोड़कर घर लौट आये थे। उन्होंने घर में ही मशरूम की खेती शुरू की, जिससे आज वह हर महीने अच्छी कमाई कर रहे हैं।
- 2) राजेश को एक मशरूम बैग को तैयार करने में 42 रु. का खर्च आता है। मशरूम तैयार होने के बाद, एक बैग से वह 140 से 200 रुपये तक की कमाई कर पाते हैं।
- 3) राजेश, फिलहाल 70 से ज्यादा लोगों तक मशरूम पहुंचा रहे हैं। और 30 से ज्यादा लोगों को ट्रेनिंग दे चुके हूँ।
20884. Meerut: सरकारी नौकरी छोड़कर बत्तख पालन से लाखों कमा रहा ये युवा, जानिए कैसे?
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- मेरठ के बिजौली गांव के रहने वाले हिमांशु त्यागी ने 2018 में बीटेक पास कर सरकारी नौकरी की. एक साल तक सरकारी नौकरी करने के बाद हिमांशु ने 3 बीघा जमीन पर बत्तख पालन का काम शुरू किया.
- हिमांशु ने बत्तख पाले उनके अंडे बेंचे और वह लखपति बन गए. हिमांशु त्यागी कहते हैं कि उनको लगभग सरकारी नौकरी से 48 हज़ार मिलते थे और अब वह बत्तख पालन करके लगभग डेढ़ लाख रुपए महीना कमा रहे हैं.
- वर्ष-2020 में हिमांशु त्यागी और उनके बेटे संजय त्यागी ने छह लाख रुपये की लागत से कार्य शुरू किया था. एक दिन में 600 अंडे तैयार होते हैं. उनके पास एक हजार मादा और 200 नर हैं. उनके अंडों की आपूर्ति दिल्ली, नोएडा, उत्तराखंड में की जा रही है
20885. एक ही पेड़ पर 22 तरह के आम उगाकर, ऑटो मैकेनिक ने कमाएं 50 लाख रुपये
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- सांगली (महाराष्ट्र) के काकासाहेब ने मैकेनिक का काम छोड़, खेती से जुड़ने का फैसला किया। आज अपने 20 एकड़ के खेत में वह फलों की नर्सरी चला रहे हैं।
- हर साल, प्रति एकड़ 2 टन आम की फसल उगाते हैं। इस तरह 10 एकड़ के हिसाब से, कुल 20 टन आम उगते हैं। वह सूखे इलाके में आम उगाकर दूसरे किसानों के लिए एक आदर्श बन गए हैं।
- एक ऑटोमोबाइल मैकेनिक से किसान बने सावंत, आज एक ‘कृषि-उद्यमी’ बन चुके हैं। अपने खेत और नर्सरी से वह 25 और लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं।
20886. एक छोटे-से बदलाव ने बदली किस्मत, आज यह किसान कमा रहा है सालाना 35 लाख रुपये
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- पहले जहां पारंपरिक खेती से घर का गुजारा मुश्किल से चलता था, वहीं आज अपनी मेहनत और कुछ नए प्रयासों की बदौलत लाखों कमा रहे हैं, महाराष्ट्र के प्रगतिशील किसान तुकाराम गुंजल।
- पहले दो एकड़ जमीन पर खेती शुरू की और बारी-बारी से टमाटर, गेंदा और तुरई उगाना शुरू किया। ,
- तुकाराम ने मल्चिंग, ड्रिप सिंचाई जैसे नए खेती के तरीकों को अपनाया। नई तकनीकों से उनकी खेती में रासायनिक खाद और कीटनाशकों का खर्चा भी कम हो गया।
20887. खेती से जहां मुश्किल था आमदनी बढ़ाना, आज ईको-टूरिज्म से कमा रहे हैं 50 लाख सालाना
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- उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के पास बसे क्यारी गांव के दो भाई, शेखर और नवीन उपाध्याय ने अपने दोस्त राजेंद्र सती के साथ मिलकर, ईको-टूरिज्म को बनाया अपने रोजगार का ज़रिया।
- 2010 में ‘कैंप हॉर्नबिल’ नाम से, एक इको टूरिज्म स्पाॅट बनाना शुरू किया।
- गांव के कुछ कलाकारों और लोगों की मदद लेकर मिट्टी के कमरे बनाए। शेखर ने बताया कि हमारे कैंप के बनाए रूम में सिर्फ फाउंडेशन और बाथरूम में सीमेंट और टाइल का इस्तेमाल किया गया है।
20888. COVID में गंवाई दुबई की नौकरी, झोपड़ी में मशरूम उगा, 1 महीने में कमाए 2.5 लाख रुपए
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- जनवरी में सतिंदर ने एक कंक्रीट फेसीलिटी और बांस व प्लास्टिक से बनी दो झोपड़ियों का सेट-अप करके मशरूम उगाना शुरू किया।
- इनके अंदर, अनुकूल तापमान बनाए रखने के लिए उन्होंने एयर-कंडीशनर्स लगाए।
- रामनगर के सब्जी बाजार, विवाह स्थलों, बैंक्वेट हॉल, रेस्तरां और अन्य ग्राहकों को मशरूम बेचे थे।अपने उद्यम से प्रति माह 2.5 लाख रुपये कमाते हैं।
20889. इंजीनियर बेटे ने दिया पिता का साथ तो चल पड़ा मछली पालन बिज़नेस, अब सालाना कमा रहे 16 लाख
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- उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले के प्रखर सिंह ने अपने पिता का साथ देने के लिए शहर की नौकरी छोड़कर, मछली पालन व्यवसाय शुरू किया। आज वह अपने साथ 100 दूसरे किसानों को भी इस व्यवसाय से जोड़कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।
- 38 बीघा जमीन में मछलीपालन का छोटा सा सेटअप बनवाया।
- लॉकडाउन के दौरान उनका काम काफी अच्छा चलने लगा। चूंकि लॉकडाउन में ट्रांसपोर्ट की दिक्क्त थी, इसलिए कई लोकल विक्रेता इनके पास से मछलियां लेने लगे। साथ ही इनका उत्पादन भी अच्छा होने लगा। आज वह उत्तर प्रदेश सहित बिहार, बंगाल, मध्य प्रदेश में भी अपना उत्पाद भेज रहे हैं।
20890. UP के सत्यम ने ऑनलाइन पढ़ाकर दो महीने में 15 लाख का बिजनेस किया, छत्तीसगढ़ के अजय मोबाइल ऐप से हर महीने 1.5 लाख कमा रहे
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Dainik Bhaskar
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- उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के रहने वाले सत्यम गुप्ता पिछले चार साल से यूट्यूब के जरिए स्टूडेंट्स को पढ़ा रहे हैं। 9 लाख से ज्यादा उनके सब्सक्राइबर्स हैं। हाल ही में उन्होंने ऑनलाइन ऐप के माध्यम से भी टीचिंग शुरू की है।
- 30 हजार से ज्यादा डाउनलोड्स हैं। पिछले दो महीने में 15 लाख रुपए से ज्यादा का कोर्स उन्होंने सेल किया है।
- छत्तीसगढ़ के बालोद के रहने वाले अजय साहू एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता खेती-किसानी करते हैं, लेकिन उन्हें हमेशा से पढ़ाई में दिलचस्पी रही।