| Jan 01, 1970 | Daily Report |
| RISING BHARAT | News Count (101903) | |
23861. इस इंजीनियर ने बनाई कम लागत वाली मशीन, जो बंजर ज़मीन को घंटों में बनाती है खेती के योग्य
Innovation and startups, ISRO/Defense/Water infrastructure/EV and other sectors
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Innovations in Bharat
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- अधिकांश लोगों के लिए शिक्षा सिर्फ पैसा कमाने और आगे बढ़ने का जरिया है। लेकिन 25 साल के दीपक ऐसा नहीं सोचते। उनके अनुसार शिक्षा का फायदा तभी है, जब वह किसी जरूरतमंद के काम आ सके। अपनी इस सोच के चलते दीपक ने इंजीनियरिंग करने के बाद नौकरी की राह नहीं पकड़ी बल्कि किसानों के लिए एक ऐसी किफायती हार्वेस्टिंग मशीन बनाने में जुट गए, जिससे उनकी बंजर पड़ी सैंकड़ों एकड़ जमीन को खेती के योग्य बनाया जा सके।
- तेलंगाना के इंजीनियर दीपक रेड्डी ने एक ऐसी मल्टी हार्वेस्टिंग मशीन बनाई है, जो बंजर जमीन से पत्थरों और चट्टानों को खोदकर उन्हें बाहर निकाल फेंकती है। यह आलू, प्याज और अन्य जड़ों वाली सब्जियों की भी खुदाई कर सकती है।
- संतोष ने बताया कि गांव के एक किसान ने इस काम के लिए तुर्की से ऐसी ही एक मशीन मंगवाई थी। उसकी कीमत 12 लाख रुपये थी। फिर भी रिज़ल्ट इतना अच्छा नहीं रहा। दीपक की बनाई मशीन उससे काफी ज्यादा बेहतर है और इसकी कीमत भी सिर्फ तीन लाख रुपये है
23862. उत्तराखंड: अलग-अलग काम किए पर नहीं मिली सफलता, अब जैविक खेती से कमाते हैं लाखों
Contribution of SOCIETY to “Make in India” Self-employment (Atmanibhar)
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Self -Reliance
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- टिहरी गढ़वाल के मैड तल्ला गांव में रहनेवाले सुंदर लाल चमोली और उनकी पत्नी बिगुला चमोली पिछले 20 सालों से भी ज्यादा समय से पहाड़ों में जैविक तरीकों से खेती कर रहे हैं। यह दंपति आज अपने इलाके में बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए प्रेरणा बने हुए हैं। क्योंकि सुंदर लाल और बिगूला ने गांव में रहकर अपनी खेती करते हुए ही अपने परिवार को एक बेहतर जीवन दिया है। उन्होंने अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दी है।
- हम कृषि विभाग के सहयोग से अपनी खेती जैविक तरीकों से करते हैं। पुराने ढर्रे से हटकर हमने नए तरीके सीखे हैं और अलग-अलग फसल उगाकर अच्छी कमाई कर रहे हैं।
- सबसे ज्यादा तसल्ली इस बात की है कि हम न सिर्फ अपने परिवार को बल्कि अपने सभी ग्राहकों को भी शुद्ध और जैविक उत्पाद खिला रहे हैं। फल-सब्जियों से लेकर धान, राजमा और दलहन तक, सभी कुछ बिना किसी रसायन के प्रयोग के उगाया जाता है
23863. दिव्यांग हैं पर निर्भर नहीं! खुद सीखी कला और नारियल के बेकार खोल को बना लिया आय का ज़रिया
Life for Society: Case Studies
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Inspiring Stories of Students/Employees/Senior citizen/Organisation/individual
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- आज हम आपको ओडिशा के एक ऐसे ही युवक की कहानी सुनाने जा रहे हैं, जो शरीर से तो दिव्यांग हैं, पर मन सुर हुनर में हम सबसे कई ज़्यादा सक्षम हैं। लॉकडाउन के दौरान उन्होंने अपने हुनर को तराशा और आज नारियल के खोल से एक से बढ़कर एक क्रॉफ्ट बनाकर बेच रहे हैं।
- ओडिशा के सब्यसाची पटेल पहले थर्माकॉल, फल-सब्जियों में नक्काशी का काम करते थे। वहीं लॉकडाउन में, उन्होंने नारियल के खोल से प्रोडक्ट्स बनाना शुरू किया, जिन्हें वह ऑनलाइन बेच रहे हैं। ओडिशा के बलांगीर जिला स्थित पुइंतला (Puintala) गांव के 29 वर्षीय सब्यसाची पटेल की है। सब्यसाची को बचपन से ही रीढ़ की हड्डी में दिक्क्त है, जिससे वह ज्यादा समय खड़े नहीं रह सकते हैं और न ठीक से चल पाते हैं।
- वह फेसबुक के जरिए ही अपने आर्ट-क्रॉफ्ट को बेच रहे हैं लेकिन इसके बावजूद उन्हें ऑर्डर मिल रहे हैं। उनकी कला को लोग पसंद कर रहे हैं। सब्यसाची को उम्मीद है कि आने वाले समय में जब उनकी बनाई चीजें अमेजन पर आएंगी तो उनका रोजगार बढ़ेगा और उनकी कमाई भी बढ़ेगी।
23864. इंजीनियर ने अपार्टमेंट में लगाया ऐसा वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, बच रहे रु. 50 हजार/माह
Life for Society: Case Studies
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Giving your full life to Society
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- ‘जल ही जीवन है’ इस बात का एहसास हमें तब होता है, जब हमारे आसपास के जलस्रोत सूखने (Water Crisis In Bengaluru) लगते हैं। जब पानी की किल्लत होती है, तब हमें पानी के बचाव और संरक्षण का ख़्याल आता है। बेंगलुरु में रहनेवाले लोगों के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ। बेंगलुरु के बेगुर में ‘मेट्रोपोलिस गुरुकृपा अपार्टमेंट परिसर’ के बोरवेल, साल 2018 में सूखने लगे थे।
- वहां, जब पानी की किल्लत होने लगी, तो लोगों ने पानी के टैंकर खरीदने का मन बना लिया। लेकिन इसी अपार्टमेंट में एक शख्स ऐसा भी था, जिसे पानी के टैंकरों की जरूरत नहीं थी। दरअसल, उनके पास एक ऐसा रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम (Rain Water Harvesting System) प्लान था, जिसके बलबूते वह पानी की किल्लत से लड़ सकते थे।
- RWH सिस्टम के लिए सामान खरीदना ज्यादा महंगा सौदा साबित नहीं हुआ। गणेश और अपार्टमेंट में रहने वाले कुछ लोगों ने मिलकर एक ई कॉमर्स वेबसाइट से जरूरत का सारा सामान खरीदा। इस पर लगभग 20 हजार रुपये का खर्च आया था और फिर प्लंबर की मदद से इसे परिसर में इंस्टॉल करा दिया गया।
- साल 2019 में जब बारिश हुई, तो उसके बाद से सिस्टम ने प्रभावी तरीके से काम करना शुरू कर दिया। सिस्टम को तैयार करने में जितना भी खर्च आया था, वह कुछ समय में ही वसूल हो गया। दरअसल, अब पानी के टैंकर पर खर्च होने वाला पैसा बचने लगा। अपार्टमेंट में लगे प्लांट से, अतिरिक्त पानी पास की झील में चला जाता है, जो धीरे-धीरे घटते जल स्तर को सुधारने में मदद करेगा।
23865. 21 वर्षीय कैफ अली ने डिज़ाइन किया ऐसा चलता-फिरता घर, जिसमें नहीं होगा किसी वायरस का खतरा
Innovation and startups, ISRO/Defense/Water infrastructure/EV and other sectors
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Innovations in Bharat
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- दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से आर्किटेक्चर की पढ़ाई कर रहे, 21 वर्षीय कैफ अली ने अपने छात्र जीवन में ही कुछ ऐसा कमाल कर दिखाया है, जिसे पूरी दुनिया सलाम कर रही है।
- दिल्ली में रहने वाले कैफ अली को अपने ‘स्पेस इरा प्रोजेक्ट’ के लिए डायना अवॉर्ड, अर्न्स्ट एंड यंग अवॉर्ड, कॉमनवेल्थ मिशन द्वारा सस्टेनेबल डेवलपमेंट अवार्ड जैसे कई पुरस्कार मिल चुके हैं। जानिए क्या है यह प्रोजेक्ट।
- उन्होंने एक ऐसा शेल्टर होम डिजाइन किया, जिसे कहीं भी आसानी से शिफ्ट किया जा सकता है, जिसमें महामारी का खतरा नहीं होगा और सबसे खास बात यह है कि यह सस्ता होने के कारण, आम आदमी की पहुँच से बाहर नहीं होगा।
- उन्हें कॉमनेवेल्थ मिशन के तहत अपने आर्किटेक्चरल इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए, 3 लाख रुपए भी दिए गए हैं। अली के इस डिजाइन को ग्लोबल स्टूडेंट अवॉर्ड के तहत टॉप-60 में भी चुना गया है और यदि वह इसे जीत जाते हैं, तो उन्हें सम्मान के रूप में 7 करोड़ रुपए मिल सकते हैं।
- अली को इस पोर्टेबल डिजाइन के लिए प्रतिष्ठित डायना अवॉर्ड, अर्न्स्ट एंड यंग अवॉर्ड, कॉमनवेल्थ मिशन द्वारा सस्टेनेबल डेवलपमेंट अवार्ड जैसे कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। साथ ही, उनके आर्किटेक्चरल इनोवेशन को संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम द्वारा भी मान्यता दी गई है।
23866. काम की तलाश में गढ़वाल से आए लखनऊ, टिफिन बनाया, ठेला चलाया, आज 4 रेस्टोरेंट्स के हैं मालिक
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Inspiring Stories of Students/Employees/Senior citizen/Organisation/individual
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- अगर आप में कुछ बड़ा करने की चाह है, तो आप उसे अपनी मेहनत से हासिल कर सकते हैं। आपका काम छोटा हो या बड़ा, अपने काम के प्रति जूनून ही आपको सफल बनाता है। आज हम आपको जिस शख्स की कहानी सुनाने जा रहे हैं, वह कभी लखनऊ में ठेले पर मोमोज और नूडल्स बेचा करते थे, लेकिन आज अपनी मेहनत के बल पर वह चार रेस्टोरेंट के मालिक हैं।
- यह प्रेरक कहानी लखनऊ के मशहूर रेस्टोरेंट ‘नैनीताल मोमोज’ के मालिक रंजीत सिंह की है। उनकी कहानी पढ़कर आपको मेहनत और जज्बे की ताकत पर यकीन हो जाएगा। गरीबी की अंधेरी गलियों से निकलकर, आज रंजीत सिंह के ‘नैनीताल मोमोज’ नाम से शहर में चार आउटलेट्स हैं। वहीं इलाहाबाद, दिल्ली और गोवा में भी, एक-एक फ्रेंचाइजी रेस्टोरेंट हैं, जिसे उनके संबंधी ही चलाते हैं।
- साल 1997 में काम की तलाश में उत्तराखंड के एक गांव से लखनऊ आए रंजीत सिंह ने कई छोटे-छोटे काम करने के बाद, साल 2008 में एक ठेले से खुद के बिजनेस की शुरुआत की थी। आज लखनऊ में उनके चार रेस्टोरेंट्स हैं।
23867. 4 Years, 15 States: How Cycling Through India Helped Me Build A Self-Sustaining Village
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- Former journalist Ankit Arora has travelled across 15 Indian states on his cycle, and lived with 600 families along the way. Using all the traditional knowledge he has gained, he’s now trying to promote a sustainable and organic lifestyle through his model village
- Ankit has also constructed a sofa made from mud and used plastic and glass bottles. “These bottles were collected as waste from rivers and the Hogenakkal waterfall located nearby,” Ankit says.
- In addition, the village has two ponds for rainwater harvesting, 60 fruit-bearing plants, and an organic farm. “We grow vegetables like spinach, tomatoes, green chilli, okra, and bitter gourd, as well as fruit trees like mango, tamarind, and jackfruit, among others. The village is self-reliant when it comes to procuring vegetables and fruit supply,” Ankit explains.
23868. [फंडिंग अलर्ट] K&L Wellness ने सीड राउंड में जुटाए 30 करोड़ रुपये
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- K&L Wellness अपने हेल्थटेक प्लेटफॉर्म को लॉन्च और स्केल करने के लिए फंड का इस्तेमाल करेगी। इसके अतिरिक्त, यह अपनी टीम का विस्तार करने और एक मजबूत और स्केलेबल इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण पर विचार कर रहा है।
- सीरियल आंत्रप्रेन्योर करण तलरेजा और इंटीग्रेटिव और लाइफस्टाइल मेडिसिन के क्षेत्र में समग्र लाइफस्टाइल कोच ल्यूक कॉटिन्हो द्वारा स्थापित, K&L प्राकृतिक, टिकाऊ, और योग और ध्यान के पारंपरिक तरीके का उपयोग करके मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और मोटापे सहित जीवन शैली की बीमारियों के लिए चिकित्सीय-आधारित स्वास्थ्य समाधान प्रदान करता है।
- स्टार्टअप इस फंड का इस्तेमाल अपने हेल्थटेक प्लेटफॉर्म को लॉन्च और स्केल करने के लिए करेगा। इसके अतिरिक्त, यह अपनी टीम का विस्तार करने और एक मजबूत और स्केलेबल इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण पर विचार कर रहा है।
23869. स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़े हर सवाल का जवाब देने के लिए वर्चुअल चिकित्सक है यह AI-संचालित हेल्थटेक स्टार्टअप
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- मई 2017 में स्थापित, हेल्थटेक स्टार्टअप एक एआई-पावर्ड, वॉयस-आधारित वर्चुअल फिजिशियन है जो चिकित्सा मार्गदर्शन प्रदान करता है और रोगियों को समय पर चिकित्सा सहायता लेने के लिए निर्देशित करता है।
- रोहित के अनुसार, ZINI भारत में डॉक्टर-रोगी अनुपात में अंतर को दूर कर सकता है। ZINI संरचित डेटा एकत्र करने में भी मदद कर सकता है, जो रिसर्च को बढ़ावा दे सकता है और नीति निर्माताओं को अपने समुदायों के बारे में डेटा संचालित निर्णय लेने में मदद कर सकता है।
- आप इस सर्विस तक एक ऐप के माध्यम से पहुंच सकते हैं। ZINI यूजर्स को किसी भी चिकित्सा लक्षण या स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों के बारे में 'टॉक टू ZINI' यानी जिनी से बात करने की अनुमति देता है। एलेक्सा जैसे अनुभव के साथ, ऐप 950+ स्वास्थ्य लक्षणों, 300+ बीमारियों का मूल्यांकन कर सकता है, एक विस्तृत रिपोर्ट प्रदान कर सकता है, क्या करना चाहिए इसको लेकर बता सकता है और जहां मरीज पहुंच सकता है वहां आस-पास की चिकित्सा सुविधाओं का विवरण साझा कर सकता है।
23870. More than 114 crore 46 lakh COVID vaccine doses administered in country so far; Recovery rate stands at 98.28 per cent
India Fights Corona: Vaccination Drive and Initiatives
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NEWS SERVICES DIVISION
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- more than 73 lakh 44 thousand doses were administered in the last 24 hours. The Ministry said that a total of 11 thousand 919 new cases were reported in the last 24 hours.
- India's Active caseload stands at one lakh 28 thousand 762 and the active cases account for less than one per cent of total cases and is currently at 0.37 per cent, the lowest since March 2020. The recovery rate is currently at 98.28 per cent, the highest since march,2020. A total of 11 thousand 242 people recovered in the last 24 hours and total recoveries touched over three crore 38 lakh and 85 thousand.
- Over 62 crore 82 lakh COVID tests have been conducted in the country so far. In the last 24 hours, more than 12 lakh 32 thousand tests were conducted.