| Jan 01, 1970 | Daily Report |
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22601. 600 से अधिक देशी बीज किए विकसित, 9वीं पास किसान ने तोड़े कई विश्व रिकॉर्ड।
- 1. जय प्रकाश सिंह अन्य किसानों की तरह ही एक सामान्य किसान हैं। इन्होंने धान की 460, गेहूं की 120 और दालों की 30 किस्में विकसित की हैं।
- 2. उनके द्वारा विकसित गेहूं के बीज की एक किस्म से 79 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की उपज होती है।
- 3. इसी तरह धान का बीज (HJPW157) जीरा की तरह दिखता है और साइज़ में काफी छोटा है। यह 130 दिनों में पक कर तैयार हो जाता है और सिंचाई की भी कम जरूरत पड़ती है।
- 4. उन्होंने एक खास तरह का वुड एप्पल या बेल भी उगाए हैं। इसके एक ही गुच्छे में 8-10 फल लगते हैं। वह गरीब किसानों के लिए इसकी पैदावार बढ़ा रहे हैं।
22602. माँ की परेशानी देख इस बेटे ने बना दिया एक घंटे में 200 चपाती तैयार करने वाला रोटीमेकर
- 1. यह कहानी कर्नाटक के बोम्मई एन वास्तु की है, जिन्होंने एक ऐसे रोटीमेकर का निर्माण किया है जो एक घंटे में लगभग 200 चपाती तैयार करता है।
- 2. चित्रदुर्ग स्थित होसादुर्ग के रहने वाले बोम्मई एन वास्तु ने जब देखा कि उनकी मां को रोटी बनाने में दिक्कत हो रही है तो उन्होंने यह नायाब चीज बना डाली।
- 3. चलाने में बेहद आसान छह किलो की इस मशीन की लागत 15 हजार रुपये है। इसका आकार इंडक्शन स्टोव जैसा है।
22603. प्रयागराज के पीएचडी स्कॉलर ने गंगा की मिट्टी से बनाई बिजली, राष्ट्रपति कोविंद करेंगे सम्मानित
- 1. संगम नगरी प्रयागराज के रहने वाले एक इंजीनियरिंग शोधार्थी जितेंद्र प्रसाद ने गंगा नदी की मिट्टी से बिजली उत्पादन की तकनीकी विकसित की है।
- 2. जितेंद्र को इसके लिए राष्ट्रपति द्वारा गांधीवादी यंग टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन (ज्ञाति) अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा। पिछले चार साल की कड़ी मेहनत के बाद जितेंद्र को उपलब्धि हासिल हुई है।
- 3. जितेंद्र ने बताया कि, पहले 12 वोल्ट की बैटरी को चार्ज किया और फिर इसे 230 वोट के एसी वोल्टेज में बदलकर बिजली के बल्ब को नौ घंटे तक जलाया।
- 4. इस प्रतिष्ठित पुरस्कार की सेलेक्शन कमेटी में पांच पद्मश्री और दो पद्मविभूषण प्राप्त वैज्ञानिक एवं अन्य आईआईटी के प्रोफेसर थे, जिन्होंने जितेंद्र प्रसाद का साक्षात्कार लिया।
22604. 500 रुपये और एक पुरानी साइकिल, इस इनोवेशन से उठा सकते हैं भारी से भारी गमला
- 1. जितेंद्र की पत्नी अर्चना को एक दिन गमला उठाते समय चोट आ गई थी और गमला भी टूट गया। इस घटना के बाद उन्होंने इस बारे में कुछ करने की ठानी!
- 2. जितेंद्र ने पहले सोचा कि ऐसा क्या किया जाये जिससे कि यह समस्या हल हो। फिर उन्हें साइकिल का ख्याल आया। वह एक कबाड़ी के पास गए और अपनी ज़रूरत के हिसाब से लोहे की रोड आदि लेकर आये। उन्होंने साइकिल के सिर्फ अगले हिस्से को इस काम के लिए इस्तेमाल में लिया। अगले हिस्से में ही उन्होंने लोहे की दो-तीन रोड को ऐसे लगाया जिससे कि गमला उठाने में आसानी हो।
- 3. जितेंद्र कहते हैं कि वह तरह-तरह के और भी कई इनोवेशन पर काम कर रहे हैं, जिसमें एक महत्वपूर्ण इनोवेशन उनके लिए है जो सुन नहीं सकते। उनका दवा है कि उन्होंने एक ऐसा यंत्र ईजाद किया है, जिसे दांतो के बीच में रखने के बाद कोई भी बहरा व्यक्ति सुन सकता है। उनका यह यंत्र अभी ट्रायल में है।
22605. भारत के रिसायकल मैन का कमाल, कचरे में पड़े मास्क और PPE किट्स से बना दी वाटर-प्रूफ ईंट
- 1. बिनीश को भारत का रीसायकल मैन कहा जाता है और कहें भी क्यों न, आखिर यह आदमी वेस्ट को फिर से इस्तेमाल करके बिल्डिंग मटेरियल बनाने में माहिर जो है।
- 2. बिनीश, बीड्रीम (BDream) नाम की कंपनी के संस्थापक हैं। वह इंडस्ट्रियल वेस्ट को सस्टेनेबल बिल्डिंग मटीरियल बनाने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हैं। उनका पहला इनोवेशन पेपर मिल से निकलने वाले कचरे को रीसायकल करके पी-ब्लॉक ईंट बनाना था। अब उन्होंने उसी कड़ी में कोरोना वेस्ट जैसे कि इस्तेमाल किए हुए मास्क, ग्लव्स और पीपीई किट से भी पी-ब्लाक 2.0 ईजाद किया है।
- 3. बिनीश सितंबर से यह ईंटे बनाना शुरू करेंगे और इसके लिए वह अस्पताल, स्कूल, सैलून, बस स्टॉप और अन्य सार्वजानिक स्थानों से बायोमेडिकल वेस्ट इकट्ठा करेंगे, जिसके लिए हर जगह इको-बिन रखी जाएगी। इन बिन्स में एक मार्क होगा जो इसके पूरे भरने पर आपको सूचित करेगा।
22606. इंजीनियर ने बनाई नई तकनीक, 12 घंटे में 250 किलो फल प्रोसेस कर कमा सकते हैं करोड़ों
- 1. महाराष्ट्र के नितिन खाडे की बनाई इस मशीन से आप 500 से ज़्यादा प्राकृतिक उत्पाद बना सकते हैं।
- 2. नितिन ने 2012 में अपनी फ़ूड प्रोसेसिंग कंपनी, ‘महाराष्ट्र फ़ूड प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजीज’ की नींव रखी। इसके ज़रिए वह अंगूर, हल्दी, मोरिंगा, मिर्च जैसी फसलों की प्रोसेसिंग करके किशमिश, हल्दी पाउडर, मोरिंगा पाउडर, तरह-तरह के फलैक्स आदि बना रहे हैं।
- 3. नितिन खड़े के काम की खास बात यह है कि जिस तकनीक से वह फ़ूड प्रोसेसिंग करते हैं, उसे उन्होंने खुद तैयार किया है और इसका पेटेंट भी हासिल कर लिया है।
- 4. फ़ूड प्रोसेसिंग के साथ-साथ उन्होंने मशीनरी पर भी काम करना शुरू किया। वह 24 किलोग्राम की क्षमता से लेकर 250 किलोग्राम की क्षमता तक की मशीन बना रहे हैं। वह कहते हैं कि उनका सपना है कि हमारे देश के किसान खुद अपनी फसल को प्रोसेस करें और ग्राहकों तक पहुंचाए।
22607. Watch | India's only athlete at the 2022 Winter Olympics
- Meet 31-year-old Arif Khan, an alpine skier from Kashmir. He is the only athlete representing India at the 2022 Beijing Winter Olympics.
- He will compete in two events - alpine skiing slalom and giant slalom. He is the first Indian athlete to qualify for two different events at the Winter Olympics
- Arif hails from Tangmarg hill station, near Gulmarg in Kashmir. He attributes his success to his father, Yaseen Khan a ski tour operator. Yaseen introduced Arif to skiing when he was less than 10-years-old. Arif has been practicing skiing for eight to nine months a year in minus 20-25 degrees Celsius
22608. आविष्कार: मात्र रू. 5000 की इस मशीन से शुरू कर सकते हैं अगरबत्ती का बिज़नेस
- 1. बांस की खेती करने वाले लोग इस मशीन की मदद से अपने घर में ही बांस की प्रोसेसिंग का काम भी शुरू कर सकते हैं!
- 2. राल्ते और साइलो की इस मशीन में आपको बस बांस डालना है और फिर कटर को आगे-पीछे करना है। आपको एक बार में ही 50 बांस की 1.2 मिमी चौड़ी और मोटी स्टिक मिल जाएंगी। राल्ते का कहना है कि इस मशीन से एक व्यक्ति एक घंटे में लगभग 5000 स्टिक बना सकता है। उनकी इस सफलता के बाद, उन्हें NEDFI (North Eastern Development Finance Corporation Ltd) के चेयरमैन से आर्थिक मदद मिली और उन्होंने उनके लिए वर्कशॉप खुलवाई। उनकी मदद की वजह से उनका यह इनोवेशन नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन तक पहुंचा।
- 3. राल्ते और साइलो को उनकी इस मशीन का पेटेंट भी मिला हुआ है और इसकी कीमत 5 हज़ार रुपये है!
22609. Indian Marine Products registers export growth of 35% during April-December 2021
- Exports of the Indian Marine Products registered a growth of 35% to USD 6.1 Billion during April-December 2021 as compared to USD 4.5 Billion during the same period in the year 2020, claimed the Ministry of Commerce and Industry
- In the month of December 2021, exports of Marine Products touched USD 720.51 Million, registering a growth of 28.01% over USD 562.85 Million logged in December 2020, said a senior officer of the Commerce Ministry.
- In a bid to further promote the Blue Revolution in the country, India has set a budget of Rs. 20,050 crore for various development schemes of the fisheries sector in India.
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22610. वुडेन स्टोव, लेमन कटर से खेती की मशीनों तक, 10वीं पास ने किए 20 से भी ज्यादा इनोवेशन!
- 1. भरत भाई को अगर हम एक सीरियल इनोवेटर भी कहें तो गलत नहीं होगा क्योंकि उन्होंने एक के बाद एक नए- नए इनोवेशन किये हैं। आज भी उनका इनोवेशन का सिलसिला बिना रुके जारी है।
- 2. दसवीं कक्षा के बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी और पूरा वक़्त वर्कशॉप में बिताने लगे। पिता की मदद करते-करते खुद उन्होंने कब इनोवेशन करना शुरू कर दिया, उन्हें पता भी नहीं चला। उन्होंने अब तक शायद 20 से भी ज्यादा इनोवेशन किये हैं, जिनमें से कुछ के लिए उन्हें दो बार राष्ट्रीय सम्मान मिला है।
- उन्होंने निम्बू तोड़ने के लिए एक जुगाड़ बनाया। दरअसल, जब निम्बू के पेड़ पर कांटे होने की वजह से यह बहुत मुश्किल भरा काम हो जाता है। इसलिए भरत भाई ने ‘लेमन कटर’ बनाया- उन्होंने इसके लिए एक पीवीसी पाइप लिया जिसकी लम्बाई को कम-ज्यादा किया जा सकता है। इसके एक सिरे पर उन्होंने कैंची लगाई जाती है जो कि लीवर की मदद से काम करती है। दूसरे सिरे से जब लीवर को खींचते हैं तो कैंची काम करती है और वह निम्बू को टहनी से काट लेती है।