| Jan 01, 1970 | Daily Report |
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23061. 'आत्मनिर्भर भारत' की मिसाल हैं काशी के जितेंद्र, जानिए रियल हीरो के जीवन की कहानी
- सारनाथ के हीरामनपुर गांव में रहने वाले जितेंद्र वर्मा के शरीर के नीचे का हिस्सा काम न करने के बावजूद भी जितेंद्र ने कभी हौसला नहीं हारा और पिछले 17 सालों से बिस्तर पर लेट कर ही सिलाई का काम करते आ रहे हैं, और अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं।
- 23 फरवरी 2003 को जितेंद्र की ज़िंदगी से खुशियां चली गई थीं। एक अच्छे टेलर मास्टर की जिंदगी में उस मनहूस दिन ने वो भूचाल ला दिया कि अब वो बैठने के लायक भी नहीं रहे। आपको बता दें कि 2003 में हुए एक एक्सीडेंट में जितेंद्र के शरीर के निचले हिस्से ने काम करना बंद कर दिया था। उनकी रीढ़ की हड्डी में चोट लगने की वजह से अब वह कभी भी चल फिर नहीं सकते और न ही बैठ सकते हैं। लेकिन उन्होंने कभी भी अपना हौसला नहीं हारा और अपनी उम्मीद को बांधे रखा।
- जितेंद्र ने दोबारा अपने सिलाई के काम को शुरू किया और अपने हुनर की अपनी पहचान बनाई। जितेंद्र बेड पर ही लेटे-लेटे लोगों के लिए कपड़े सिलते हैं। वहीं वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के चलते इन दिनों मास्क सिलकर अपने आसपास के मोहल्लों में मुफ्त में वितरण कर रहे हैं ताकि इस कोरोना वायरस से लड़ा जा सके। इसके साथ ही वो और लोगों को आत्मनिर्भर होने के गुर भी सिखाते हैं।
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23062. ढलती उम्र में है दूसरों के लिए कुछ करने की चाह, खुद सिलकर मुफ्त में बांटे 2000 मास्क
- मास्क बनाने की मुहिम के बारे में वह बतातीं हैं, “जब लॉकडाउन हुआ तब मैं बेंगलुरू में बेटे के घर में थी। एक दिन मेरी बेटी ने एक वीडियो भेजा कि कैसे लोग घरों पर ही मास्क बना रहे हैं। इसके बाद ही मैंने मास्क बनाना शुरू किया।”
- जब तक वह बेंगलुरू में रहीं तो वहाँ पर हाथ से ही मास्क बनाकर सफाई कर्मचारी, सब्ज़ीवालों, चौकीदार आदि को बांटतीं रहीं। लॉकडाउन के बाद वह सांगली लौट आईं। यहाँ भी अपने सभी काम करते हुए उन्होंने मास्क बनाना ज़ारी रखा। यहाँ पर वह अपनी सिलाई मशीन से मास्क बनाती हैं। उन्होंने अब तक 2000 से भी ज्यादा मास्क बांटे हैं।
- “अब तो मेरे जीवन का उद्देश्य यही है कि मैं दूसरों की सेवा कर पाऊं। किसी ज़रूरतमंद के लिए कुछ करूँ, इससे ज्यादा और क्या चाहिए? बाकी मेरे बच्चे और उनके बच्चे हमेशा मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहते हैं। ढलती उम्र में अक्सर यही लगता है कि कुछ करने के लिए नहीं है लेकिन यह सिर्फ एक मिथक है। कभी भी यह नहीं सोचें कि अब आप कुछ नहीं कर सकते, अब जितनी सांसे मिली हैं, कम से कम उनमें तो किसी के लिए कुछ करने की कोशिश कर ही सकते हैं,” उन्होंने कहा।
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23063. Mask making is a regular activity at this home for abandoned intellectually-challenged children in Chennai
- The tailoring unit at Sri Arunodayam in Kolathur was up against a steep target. Three thousand masks had to be delivered to the voluntary organisation REACH, and the work had to be accomplished in 15 days, with 12 tailors. In regular circumstances, this would hardly be a pressure-cooker situation.
- They work from 10 a.m. to 5 p.m. usually, and on days with an unusual ask, they put in those much-needed extra hours. That is how they met this target.
- This month, Sri Arunodayam, a non-profit that provides a home for 108 children with intellectual disabilities who have been abandoned by their parents, completes one year of its mask project.
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23064. Homeopathy and Unani effective in prevention of novel coronavirus infections: AYUSH ministry
- It recommended that homoeopathic medicine Arsenicum album 30 could be taken empty stomach daily for three days as a preventive medicine against the infection.
- It also suggests some Ayurvedic practices and medicines, Unani drug decoctions and home remedies which can be useful in prevention of nCoV infection.
- The ministry has advised covering face while coughing or sneezing and preferably using an N95 mask while travelling or working in public places to avoid droplet transmissions. It also recommended prophylactic measures/immunomodulatory drugs as per Ayurvedic practices and taking measures to strengthen the immune system through a healthy diet and lifestyle practices.
23065. हर्बल से भागेगा कोरोना? ICAR का दावा- मिल गए वो पौधे जिनका रस कर सकता है कोविड-19 का खात्मा
- भारतीय वैज्ञानिकों ने कुछ हर्बल पौधों में ऐसे कम्पाउंड पाए हैं जिनसे कोरोना वायरस (Coronavirus) का इलाज किया जा सकता है। यह दावा हिसार के नैशनल रिसर्च सेंटर ऑन इक्वॉइन्स (NRCE) के वैज्ञानिकों का है। NRCE इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) के तहत आने वाला संस्थान है।
- ICAR ने इस रिसर्च की फाइंडिग्स पर फॉर्मल नोट जारी किया। इससे वैज्ञानिकों के लिए कोविड-19 मरीजों के इलाज का कोई रास्ता निकल सकता है। NRCE के डेप्युटी डायरेक्टर जनरल (एनिमल साइंस) बीएन त्रिपाठी ने बताया कि यह ऐसी लीड है जिसने NRCE के साइंटिस्ट्स को कई वायरस के खिलाफ अच्छे नतीजे दिए हैं। हालांकि उन्होंने उन पौधों के बारे में इस वक्त बताने से मना कर दिया।
- कोरोना वायरस के शुरुआती मॉडल पर बेस्ड है रिसर्च - नोट में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी के समय आपात स्थिति को देखते हुए ICAR-NRCE हिसार के वैज्ञानिकों ने कुछ नैचरल प्रॉडक्ट्स के असर का आंकलन किया। ये प्रॉडक्ट्स इंसानी इस्तेमाल के लिए सुरक्षित हैं और आमतौर पर खांसी-बुखार ठीक करने में यूज होते हैं। साइंटिस्ट्स ने चिकन कोरोना वायरस के इन्फेक्शन मॉडल का स्टडी में इस्तेमाल किया ताकि कुछ हर्बल पौधों के एंटीवायरल इफेक्ट को जांचा जा सके।
23066. बाबा रामदेव ने लॉन्च की कोरोना की आयुर्वेदिक दवा Coronil, 7 दिन में मरीजों को ठीक करने का दावा
- बाबा रामदेव ने कोरोना की आयुर्वेदिक दवा (Ayurvedic Medicine of Corona) बनाने का दावा करते हुए , कोरोनिल नाम की मेडिसिन लॉन्च की है। दवाओं के ट्रायल के दौरान तीन दिन के अंदर 69 पर्सेंट रोगी नेगेटिव हो गए। इसके अलावा ट्रायल के दौरान सात दिन में 100 फीसदी मरीज नेगेटिव हो गए।
- बाबा रामदेव का दावा है कि उन्होंने दवा के लिए पहले एथिकल अप्रूवल लिया, फिर भारत की क्लिनिकल ट्रायल रजिस्ट्री (CTIR) से ट्रायल की परमिशन ली। इसके बाद दवा का ट्रायल शुरू हुआ। उन्होंने कहा कि इस दवा का क्रिटिकल पेशंट्स पर सेकेंड ट्रायल होगा। रामदेव का दावा है कि इस दवा को लॉन्च करने तक सारे वैज्ञानिक नियमों का पालन किया गया है।
- किसी भी दवा को यूज करने पर उसके साइड-इफेक्ट्स का खतरा रहता है। हालांकि रामदेव के मुताबिक, उनकी 'दिव्य कोरोना किट' का कोई साइड इफेक्ट नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ये सब जड़ी-बूटियों से मिलाकर बनाया है, इसका शरीर पर कोई नकरात्मक असर नहीं मिला है।
23067. दवा कंपनी सन फार्मा ने कोविड-19 के लिए लॉन्च की फ्लूगार्ड टेबलेट, सिर्फ 35 रुपए रखी है कीमत; इसी हफ्ते से बाजार में होगी उपलब्ध
- फ्लूगार्ड टेबलेट से देश में कोरोना के हल्के लक्षणों वाले मरीजों का इलाज किया जाएगा
- सन फार्मा दुनिया की चौथी और देश की सबसे बड़ी जेनेरिक फार्मा कम्पनी है
- सन फार्मास्युटिकल्स इंडस्ट्रीज ने मंगलवार को कोविड-19 के मरीजों के लिए फ्लूगार्ड टेबलेट लॉन्च की। एक टेबलेट की कीमत 35 रुपए है। फ्लूगार्ड टेबलेट से देश में कोरोना के हल्के लक्षणों वाले मरीजों का इलाज किया जाएगा।
23068. कोरोना की एक और दवा बाजार में, जानिए कितनी है कीमत
- ल्यूपिन ने भारत में कोविड- 19 की दवा ‘कोविहाल्ट’ को बाजार में उतारा
- 200 एमजी की गोली के रूप में 10 गोलियों की स्ट्रिप, 49 रुपये की एक गोली हल्के और कम गंभीर रोगियों के इलाज में इस्तेमाल किया जा सकता है
- आपात स्थिति में इस्तेमाल के लिए डीजीसीआई से मिली अनुमति
23069. दवा:भारतीय कंपनी MSN ग्रुप ने कोरोना की दवा 'फेविलो' लॉन्च की, 200 एमजी वाली एक टेबलेट की कीमत 33 रुपए
- हैदराबाद की जेनरिक फार्मा कंपनी MSN ग्रुप ने कोरोना की सबसे सस्ती दवा 'फेविलो' लॉन्च की है। इसमें फेविपिराविर ड्रग का डोज है।
- 200 एमजी फेविपिराविर की एक टेबलेट 33 रुपए की होगी। कंपनी के मुताबिक, जल्द ही फेविपिराविर की 400 एमजी टेबलेट भी लॉन्च की जाएगी।
- कोरोना के मरीजों के लिए पहले भी MSN ग्रुप एंटीवायरल ड्रग ऑसेल्टामिविर को ऑस्लो नाम से लॉन्च कर चुका है। यह 75 एमजी की टेबलेट है।
23070. कोरोना के इलाज के लिए बाजार में आई एक और दवा, जानिए क्या है खूबी
- डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज लिमिटेड (Dr Reddy's Laboratories Limited) ने भारत में कोविड-19 संक्रमितों के इलाज के लिए रेम्डेसिविर दवा को बाजार में जारी करने की घोषणा की है। यह दवा 'Redyx' ब्रांड नाम के तहत उपलब्ध होगी।
- गिलीड ने डॉ. रेड्डीज लैब को रेम्डेसिविर के पंजीकरण, विनिर्माण और बिक्री का अधिकार दिया है। इस तरह के अधिकार भारत सहित 127 देशों में कोविड-19 के संभावित इलाज में काम आने वाली इस दवा के लिए दिए गए हैं।
- भारत के दवा महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने रेम्डेसिविर का इस्तेमाल भारत में कोविड-19 के गंभीर लक्षण वाले अस्पताल में भर्ती मरीजों पर आपात स्थिति में करने की मंजूरी दी है।